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UPSC Results 2019: बचपन से जुझारू कुमार सौम्य ने स्पेशली ऐबल्ड होने के बावजूद ऐसे पास की UPSC परीक्षा

आज यूपीएससी 2019 परीक्षा का रिजल्ट डिक्लेयर हुआ है. बिहार के कुमार सौम्य ने 696वीं रैंक के साथ यह परीक्षा पास की है. एक पैर में पोलियो से ग्रसित सौम्य अपनी कमी को ही अपनी खूबी मानते हैं. आज जानते हैं कुमार सौम्य के इस सफर के बारे में.

UPSC Results 2019 Declared: बिहार के एक छोटे से गांव के रहने वाले कुमार सौम्य को जिंदगी ने बहुत पहले ही चुनौतियों का दामन थमा दिया था जब बहुत छोटी उम्र में मेडिकल नेगलीजेंस के कारण उनके दांये पैर में पोलियो हो गया था. एक लंबे समय तक सौम्य ने इस सच्चाई को स्वीकार नहीं किया और एक बच्चे के रूप में जितना संभव था, अपनी नाराजगी, अपना विरोध दर्ज किया पर कुछ चीजें इंसानी पकड़ से परे होती हैं. काफी हाथ-पांव मारने के बाद और सौम्य के माता-पिता के बहुत प्रयास करने के बाद भी उनका पैर ठीक नहीं हो पाया. अपने पैर की समस्या से उपजी नाराजगी को सौम्य ने जुनून में बदला और हर वो काम किया जिसके लिए उन्हें कहा गया कि तुम नहीं कर सकते. फिर चाहे वो क्रिकेट खेलना हो या साइकिल चलाना. जैसे-जैसे सौम्य अपने जीवन में इन छोटे-छोटे एचीवमेंट्स को हासिल कर रहे थे, वैसे-वैसे उनका कांफिडेंस बढ़ता जा रहा था. अपनी एक कमी को पूरा करने के लिए वे हजार खूबियां खुद में भर लेना चाहते थे.

 

इसलिए चाहते थे एकेडमिक्स में अच्छा करना –

सौम्य कहते हैं कि क्लास दसवीं तक आते-आते मैं समझ गया था कि मुझे अपनी एकेडमिक्स को अच्छा करना होगा अगर मैं अपनी इस शारीरिक कमी को कुछ हद तक कवर करना चाहता हूं. शायद इसीलिए सौम्य ने हमेशा से पढ़ाई पर फोकस किया और बिहार में स्कूलिंग की शुरुआत से आईआईटी मुंबई तक का सफर हमेशा अच्छे अंकों से तय किया. आईआईटी मुंबई से सौम्य ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया और एक अच्छी कॉरपोरेट जॉब करने लगे. यहां सौम्य ने रिस्क एनालिस्ट के पद पर काम किया. कुछ दिनों की नौकरी के बाद सौम्य को जॉब सैटिस्फेक्शन जैसी कोई चीज अनुभव नहीं हुई. इस काम में पैसा था पर सौम्य हमेशा से ग्राउंड लेवल पर काम करके लोगों की मदद करना चाहते थे. सौम्य को लगा की सिविल सर्विसेस से अच्छा मौका उन्हें कोई क्षेत्र नहीं दे सकता.

पिताजी का रहा जबरदस्त सपोर्ट –

अपने जमे-जमाये कैरियर को छोड़कर जब कोई कैंडिडेट कहे कि वह एकदम नई फील्ड में जाकर अपनी किस्मत आजमाना चाहता है, खासकर एक ऐसी फील्ड जिसमें सफलता की कोई गारंटी नहीं तो सामान्यः लोगों के रिएक्शन निगेटिव ही आते हैं. पर सौम्य गर्व से कहते हैं कि यूपीएससी देने के उनके निर्णय को उनके माता-पिता और परिवार ने पूरा सपोर्ट किया. खासकर उनके पिताजी ने फाइनेंशियल बैकअप देकर सौम्य की सबसे बड़ी मुश्किल दूर कर दी. अंततः नौकरी छोड़कर सौम्य सिविल सर्विसेस की तैयारी करने दिल्ली आ गए और यहां कोचिंग ज्वॉइन कर ली.

फिजिकली डिसऐबल्ड होने के कारण सौम्य को आम कैंडिडेट की तुलना में बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता था पर सौम्य बचपन से ही जुझारू प्रवृत्ति के हैं, उन्हें आसानी से मिलने वाली चीजें समझ नहीं आती. उन्हें कम्यूट करने में खासी दिक्कत होती थी पर वे मन में तय कर चुके थे कि जो सपना उन्होंने देखा है, उसके लिए इतना संर्घष तो बनता है. दरअसल वे इससे ज्यादा के लिए तैयार थे.

 

पहले अटेम्पट में ही हुये चयनित –

सौम्य ने एक साल तैयारी करके अपना पहला अटेम्पट दिया और 979 रैंक के  साथ उनका सेलेक्शन हो गया. सौम्य को मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में असिस्टेंट डायरेक्टर का पद मिला. हालांकि यहां सौम्य को अपने काम में मजा आ रहा था पर रैंक सुधारने के लिए उन्होंने फिर से परीक्षा दी और दूसरी बार में साक्षात्कार राउंड तक पहुंचकर सेलेक्ट नहीं हुए. यह फेज सौम्य के लिए थोड़ा कठिन था क्योंकि बचपन से एकेडमिक्स में अच्छा करने वाले या कहें जीतने वाले सौम्य को फेल्योर की आदत ही नहीं थी. हालांकि बहुत कम समय में वे यह समझ गए थे कि बाकी परीक्षाओं में और इसमें बहुत अंतर है. सौम्य ने फिर से साहस इकट्ठा किया और तीसरी बार परीक्षा दी. इस बार सौम्य को 696 रैंक मिली है.

असफल छात्रों को सौम्य की सलाह –

कुमार सौम्य कहते हैं कि यह परीक्षा ऐसी है जिसके रिजल्ट के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता, इसमें यह तक जरूरी नहीं कि इस साल आपका चयन हो गया है तो अगले साल भी होगा. इसलिए बेहतर होगा सच्चाई को स्वीकारें और यह समझ लें कि एक एग्जाम में फेल होने का मतलब यह कतई नहीं होता कि आप जीवन में फेल हो गए हैं. एक परीक्षा आपके भविष्य का निर्धारण नहीं कर सकती. केवल प्रयास करना हमारे हाथ में है, जिसमें हमें कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए. वे आगे कहते हैं, यूपीएससी की जर्नी ऐसी ही है कि तैयारी के दौरान ज्यादातर कैंडिडेट्स की लाइफ में कभी न कभी डिप्रेसिव फेज आ जाता है पर इसमें उलझने के बजाय बाहर निकलिए. यूपीएससी का सफर, उसकी तैयारी के लिए तय किया गया सफर कभी बेकार नहीं जाता. एक इंसान के तौर पर यह आपको निखार देता है. इस डील में आप किसी भी सूरत में नुकसान नहीं उठाएंगे.

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