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लॉ की डिग्री के लिए ये हैं अमेरिका के सबसे महंगे कॉलेज, फीस देखकर ही उड़ जाएंगे होश

क्या आपको पता है अमेरिका के सबसे महंगे लॉ कॉलेज कौन से हैं? अगर नहीं तो आज हम आपको बताते हैं, जिनकी फीस सुन आपके होश उड़ जाएंगे, आइए जानते हैं...

जब हम अमेरिका में पढ़ाई की बात करते हैं तो ज्यादातर लोग इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कोर्स के बारे में सोचते हैं. हकीकत यह है कि यहां सैकड़ों तरह के कोर्स मौजूद हैं और उनमें से एक है लॉ यानी कानून की पढ़ाई. अमेरिका को कानून की पढ़ाई के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन देश माना जाता है. यहां के लॉ स्कूल न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शामिल हैं. यहां लॉ का प्रोफेशन सबसे ज्यादा सैलरी वाला माना जाता है, जहां एक औसत वकील सालाना करीब 1.45 लाख डॉलर यानी लगभग 1.28 करोड़ रुपये कमाता है.

लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को कई नामी-गिरामी लॉ फर्म्स में नौकरी मिल जाती है, जबकि कुछ अपनी खुद की फर्म शुरू कर देते हैं. यहां की लॉ फैकल्टी छात्रों को ऐसी ट्रेनिंग देती है, जो उनके पूरे करियर में काम आती है. यही वजह है कि अमेरिकी छात्रों के साथ-साथ दुनिया के अलग-अलग देशों से भी लोग यहां पढ़ने आते हैं.

ये हैं टॉप स्कूल 

टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2025 के अनुसार अमेरिका के तीन लॉ स्कूल दुनिया में सबसे आगे हैं. पहले नंबर पर स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी है, जो ग्लोबल लेवल पर भी नंबर वन मानी जाती है. दूसरे स्थान पर है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, जिसका नाम सुनते ही दुनिया भर के छात्र सपने देखने लगते हैं. तीसरे नंबर पर है न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, जो अपने इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के लिए मशहूर है. इन तीनों संस्थानों में पढ़ने के लिए हर साल हजारों छात्र आवेदन करते हैं, लेकिन केवल चुनिंदा को ही मौका मिलता है.

इनमें एडमिशन पाना आसान नहीं है. स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का एक्सेप्टेंस रेट सिर्फ 4% है, यानी 100 में से केवल 4 छात्र ही यहां प्रवेश पा पाते हैं. हार्वर्ड में यह दर और भी कम, सिर्फ 3% है, यानी हर 100 में से केवल 3 को ही दाखिला मिलता है. न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी का एक्सेप्टेंस रेट 9% है, जो बाकी दोनों की तुलना में थोड़ा आसान है, लेकिन फिर भी काफी कठिन है.

स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में देने होंगे इतने रुपये 

अब बात करते हैं पढ़ाई के खर्च की. स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी में एक छात्र को सालाना करीब 92,892 डॉलर यानी लगभग 81.5 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं. इसमें ट्यूशन फीस सबसे ज्यादा है, जो 65,127 डॉलर है. इसके अलावा रहने और खाने पर 21,315 डॉलर, स्टूडेंट फीस पर 2,400 डॉलर, किताबों पर 825 डॉलर और निजी खर्च पर 3,225 डॉलर लगते हैं.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कितनी फीस?

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने का सालाना खर्च करीब 82,866 डॉलर यानी लगभग 73 लाख रुपये है, जिसमें 56,550 डॉलर ट्यूशन फीस, 12,922 डॉलर रहने-खाने का खर्च, 1,592 डॉलर हेल्थ सर्विस, 3,534 डॉलर स्टूडेंट सर्विस और 8,268 डॉलर फूड का खर्च शामिल है. न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में यह खर्च और भी ज्यादा है करीब 1,18,137 डॉलर यानी लगभग 1 करोड़ रुपये. इसमें ट्यूशन फीस 79,954 डॉलर, रहने का खर्च 20,930 डॉलर, खाने पर 6,870 डॉलर, किताबों पर 1,600 डॉलर, हेल्थ इंश्योरेंस 1,188 डॉलर और लोन फीस 220 डॉलर शामिल है.

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रजनी उपाध्याय बीते करीब छह वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाली रजनी ने आगरा विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. बचपन से ही पढ़ने-लिखने में गहरी रुचि थी और यही रुचि उन्हें मीडिया की दुनिया तक ले आई.

अपने छह साल के पत्रकारिता सफर में रजनी ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया. उन्होंने न्यूज, एंटरटेनमेंट और एजुकेशन जैसे प्रमुख वर्टिकल्स में अपनी पहचान बनाई. हर विषय में गहराई से उतरना और तथ्यों के साथ-साथ भावनाओं को भी समझना, उनकी पत्रकारिता की खासियत रही है. उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ खबरें लिखना नहीं, बल्कि समाज की धड़कन को शब्दों में ढालने की एक कला है.

रजनी का मानना है कि एक अच्छी स्टोरी सिर्फ हेडलाइन नहीं बनाती, बल्कि पाठकों के दिलों को छूती है. वर्तमान में वे एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां वे एजुकेशन और एग्रीकल्चर जैसे अहम सेक्टर्स को कवर कर रही हैं.

दोनों ही क्षेत्र समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं और रजनी इन्हें बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभालती हैं. खाली समय में रजनी को संगीत सुनना और किताबें पढ़ना पसंद है. ये न केवल उन्हें मानसिक सुकून देते हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता को भी ऊर्जा प्रदान करते हैं.

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