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IAS Success Story: साल 2019 के टॉपर योगेश पाटिल ने तोड़े UPSC परीक्षा से जुड़े कुछ मिथक, यहां पढ़ें विस्तार से

पुणे के योगेश पाटिल ने UPSC परीक्षा से जुड़े कुछ मिथक तोड़े. उन्होंने बताया कि कैसे स्टूडेंट्स इस परीक्षा को लेकर फैली भ्रांतियों पर भरोसा कर लेते हैं. आज इन्हीं मिथकों और उनके सच के बारे में जानते हैं.

Success Story Of IAS Topper Yogesh Patil: साल 2019 के टॉपर, पुणे के योगेश अशोकराव पाटिल ने इससे पहले साल 2018 में भी यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाई थी. इस साल उनकी रैंक आयी थी 231, जिससे उन्हें इंडियन पुलिस सेवा मिली थी. योगेश ने फिर से कोशिश की और साल 2019 में 63वीं रैंक पाकर उन्होंने टॉप किया. दो प्रयास और दोनों में सफल योगेश ने यूपीएससी परीक्षा को लेकर फैले कुछ मिथकों को तोड़ने का प्रयास किया. आज हम आपसे इन्हीं मिथकों की चर्चा करेंगे. आम आपको योगेश के उन जवाबों के बारे में बताने जा रहे हैं जो उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान दिया था.

मिथक – पहले अटेम्पट में पास नहीं हो सकते –

सच – यूपीएससी परीक्षा को लेकर अक्सर स्टूडेंट्स यह मानते हैं कि इसमें पहली बार में सफलता हासिल नहीं की जा सकती, जबकि ऐसा नहीं है. यह आपकी मेहनत और सही स्ट्रेटजी पर निर्भर करता है कि आप पहली बार में परीक्षा पास करते हैं या आपको समय लगता है पर ऐसा कतई नहीं है कि पहली बार में परीक्षा पास नहीं कर सकते. बहुत से कैंडिडेट यह पहले भी साबित कर चुके हैं.

मिथक – क्षेत्रीय भाषा में पढ़ना है परेशानी का सबब –

सच - इस बारे में योगेश कहते हैं कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस भाषा में पढ़ें हैं या किस भाषा में परीक्षा देने का चुनाव करते हैं. बस यह देख लें कि जिस भी भाषा को आप चुनते हैं, उसमें स्टडी मैटीरियल उपलब्ध हो. रही इंग्लिश की बात तो इसे सुधारना इतना भी मुश्किल नहीं. योगेश ने खुद इंग्लिश के न्यूजपेपर ग्रेजुएशन के दिनों से पढ़कर और नेट पर वीडियो देख - देखकर अपनी अंग्रेजी सुधारी थी. हालांकि यह आपके ज्ञानवर्धन के लिए है, ऐसा नहीं है कि इसके बिना आप चयनित नहीं हो सकते, लेकिन थोड़ी जानकारी इस भाषा की जरूरी है.

मिथक – पिछड़े या सुदूर इलाके से हैं तो होगी ज्यादा दिक्कत –

सच - इस बारे में योगेश का कहना है कि इस बात से भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां के रहने वाले हैं. एक बार यह मन बनाने के बाद कि परीक्षा की तैयारी करनी है, हर किसी को एक ही स्तर पर शुरुआत करनी होती है. सभी को मेहनत करनी पड़ती है. योगेश खुद गांव से हैं पर दोनों बार सेलेक्ट हुए.

 

मिथक – सब विषयों के नोट्स बनाना जरूरी है –

सच - अगर सभी विषयों के नोट्स बनाएंगे तो आपका बहुत समय खराब हो जाएगा. बेहतर होगा कुछ विषयों के नोट्स खुद बनाएं और कुछ दूसरों के नोट्स से या बिना नोट्स के काम चलाएं. जैसे योगेश ने अपने नोट्स ऑनलाइन शेयर किए हुए हैं. आप किसी और के नोट्स इस्तेमाल कर सकते हैं.

मिथक – सफलता के लिए जरूरी है 14 से 15 घंटे पढ़ना –

सच - योगेश कहते हैं यह सबकी अपनी क्षमताओं पर निर्भर करता है. जरूरी यह नहीं कि कितने घंटे पढ़े, जरूरी यह है कि वे घंटे कितने प्रोडक्टिव थे. बाकी हर किसी का आईक्यू भी अलग होता है. कोई जल्दी याद कर लेता है कोई समय लेता है. अपनी क्षमताओं के अनुसार स्ट्रेटजी और टाइमटेबल बनाएं पर इसके लिए घंटों पढ़ना होता है यह सही नहीं है.

मिथक – यूपीएससी सिलेबस इज लाइक एवरीथिंग अंडर द सन

सच - यूपीएससी सिलेबस के बारे में कई लोग कहते हैं कि यह अथाह सागर के जैसा है जिसमें सबकुछ आता है पर योगेश कहते हैं ऐसा नहीं है. मेन्स का कोर्स थोड़ा ज्यादा है पर आप यूपीएससी की वेबसाइट से सिलेबस उठाएं और उसी के अनुसार तैयारी करें. अपने सिलेबस की एक बाउंड्री नहीं बनाएंगे तो परेशान हो जाएंगे. इसके साथ ही पुराने सालों के प्रश्न-पत्र देखें, इनसे भी आपको सिलेबस शॉर्ट-आउट करने या समझने में मदद मिलेगी.

मिथक – कोचिंग के बिना नहीं चलता काम –

सच - ऐसा कतई जरूरी नहीं है कि आप लाखों खर्च करके कोचिंग करें ही. एक अच्छा मेंटोर होना ही कई बार काफी होता है जो आपको ठीक से गाइड कर दे. परीक्षा को समझना, उसका नेचर समझना जरूरी है पर इसके लिए कोचिंग ही एक-मात्र तरीका नहीं. यूपीएससी में तीन चीजें जरूरी हैं – क्या पढ़ना है, क्या नहीं पढ़ना है और कैसे पढ़ना है. इनका ज्ञान होने के बाद सेल्फ स्टडी बेस्ट है.

मिथक – यूपीएससी पास करने के लिए जरूरी है सुपर इंटेलिजेंट होना –

सच - योगेश कहते हैं ऐसा भी जरूरी नहीं. अगर आप मेहनती हैं और इस परीक्षा के लिए जरूरी समर्पण करने के लिए तैयार हैं तो आपका पिछला एकेडमिक रिकॉर्ड कैसा था यहा आपने अभी तक कोई सफलता अर्जित की है या नहीं, ये कुछ भी मायने नहीं रखता. जब से सोचेंगे और प्रयास करेंगे, तभी से नया सफर शुरू होता है फिर चाहे दसवीं या बारहवीं में कैसे भी अंक क्यों न हों.

मिथक – बहुत सारी किताबें पढ़ना है जरूरी –

सच - योगेश कहते हैं किताबें बहुत नहीं सीमित होनी चाहिए वरना आप किसी की भी तैयारी ठीक से नहीं कर सकते. रही न्यूज पेपर की बात तो उसे पढ़ना अच्छा है पर ऐसा नहीं कि बिना उसके सफलता नहीं मिल सकती. करेंट अफेयर्स के जो कंपाइलेशन आते हैं आप उन्हें भी पढ़कर एग्जाम क्लियर कर सकते हैं. हालांकि पेपर पढ़ना किसी भी लिहाज से गलत नहीं यह आपको नया नजरिया देता है.

मिथक – यूपीएससी पास करने के लिए हर विषय में अच्छा होना जरूरी है –

सच - ऐसा नहीं है, आपको हर विषय में नहीं केवल अपने ऑप्शनल विषय में अच्छा होना जरूरी होता है. इसके अलावा बाकी विषयों में अगर आप एवरेज भी हैं तो काम चल जाएगा. जो विषय आपकी रैंक बनाते हैं वें हैं, ऑप्शनल, एथिक्स, ऐस्से और साक्षात्कार. इनके लिए जो अतिरिक्त प्रयास कर सकते हैं, वे जरूर करिए पर ऑलराउंडर बनने की कतई जरूरत नहीं.

JEE-NEET 2020 के कैंडिडेट्स को छत्तीसगढ़ सरकार देगी मुफ्त ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा JEE Advanced 2020 के स्टूडेंट्स की मदद के लिए IIT दिल्ली लांच करेगा पोर्टल 

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