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IAS Success Story: बार-बार हुईं असफल पर नहीं टूटने दी हिम्मत, आखिर संजीता बन ही गईं UPSC टॉपर

ओडिशा की संजीता मोहपात्रा ने साल 2019 में अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में 10वीं रैंक प्राप्त की है. एक इंजीनियर से आईएएस ऑफिसर बनने तक आइये जानते हैं कैसा रहा संजीता का यह लंबा सफर.

Success Story Of IAS Topper Sanjita Mohpatra: राउरकेला, ओडिशा की संजीता माहापात्रा की यूपीएससी जर्नी काफी लंबी और थका देने वाली रही है पर इस सफर में भले हर कोई हार मान गया हो पर संजीता ने कभी हार नहीं मानी. बहुत से लोगों को लगने लगा था कि यह सफर कुछ ज्यादा ही लंबा खिंच रहा है पर संजीता जानती थी कि वे क्या चाहती हैं और जो वे चाहती हैं वह इतनी आसानी से नहीं मिल सकता. दरअसल दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए साक्षात्कार में संजीता मोहपात्रा ने कई महत्वपूर्ण बातें बताईं. आइए जानते हैं..

आप यहां संजीता मोहपात्रा द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू का वीडियो भी देख सकते हैं

संजीता का जन्म और शुरुआती शिक्षा राउरकेला से ही हुई. उसके बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया. वे पढ़ाई में हमेशा से अच्छी थी और हर क्लास में उनके बढ़िया अंक आते थे. बीटेक के बाद संजीता की जॉब लग गई और वे एक अच्छी सरकारी नौकरी में आ गईं जो प्रतिष्ठित भी थी और जिसमें पैसा भी था. कुछ साल उन्होंने यह नौकरी की लेकिन तभी उनके मन में बचपन का अपना आईएएस बनने का सपना उछाल मार रहा था. दरअसल संजीता हमेशा से आईएएस बनना चाहती थी. उन्होंने इस बाबत कई बार प्रयास भी किया पर गंभीर प्रयास उन्होंने दो ही बार किया और दूसरे में सेलेक्ट हो गईं. आज जानते हैं संजीता से इस परीक्षा के बारे में.

कॉलेज के बाद किये थे दो प्रयास –

संजीता एक साक्षात्कार में बताती हैं कि उनके शुरू के तीन प्रयास जब उन्होंने कॉलेज खत्म ही किया था, तब दिए थे जो बिलकुल बेकार चले गए क्योंकि उस समय उनकी तैयारी ठीक नहीं थी. वे तब समझ ही नहीं पाई थीं कि आखिर यह परीक्षा है क्या और इसे पास करने के लिए किस स्तर के प्रयास करने पड़ेंगे. संजीता का तीनों ही अटेम्पट्स में प्री भी क्लियर नहीं हुआ था. उसके बाद वे नौकरी करने लग गईं और इस दौरान वे परीक्षा के पैटर्न को समझकर तैयारी में लगी रहीं पर उन्होंने अटेम्पट्स नहीं दिए. चूंकि उनके शहर में उन्हें ठीक से गाइडेंस नहीं मिल पा रहा था इसलिए संजीता ने हर प्रकार की मदद इंटरनेट से ही ली. एक समय के बाद उन्हें लगा कि नौकरी के साथ तैयारी संभव नहीं है और नौकरी छोड़ने का निर्णय लिया. इसी बीच उनकी शादी भी हो गई. आखिरकार बहुत ही मुश्किल से और भारी मन से उन्होंने अपनी लगी लगाई अच्छी नौकरी छोड़ दी. अब संजीता फुल फ्लेज्ड तरीके से तैयारी में जुट गईं.

चौथे प्रयास में भी हुईं असफल –

संजीता के लिए यह समय काफी कठिन था जब चौथे प्रयास में भी उनका सेलेक्शन नहीं हुआ क्योंकि इस बार उन्होंने काफी प्लांन्ड वे में दिल लगाकर तैयारी की थी. हालांकि इस साल उन्होंने पहली बार मेन्स लिखा. खैर संजीता ने हार नहीं मानी और इसमें उनके ससुराल वालों ने भी पूरा साथ दिया और वे फिर से तैयारी करने लगीं. साल 2019 में उनका पांचवां अटेम्पट था जिसमें वे अंततः सफल हुईं. संजीता कहती हैं कि इस बार उम्मीद थी की सफल हो जाऊंगी पर रैंक दस आएगी यह कभी नहीं सोचा था. उनके लिए यह किसी सरप्राइज से कम नहीं था. संजीता ने अपनी मुख्य और बेसिक तैयारी एनसीईआरटी कि किताबों से की है. यही नहीं ठीक से न्यूज पेपर पढ़ना और एनसीईआरटी की किताबों को पढ़ना उन्होंने बहुत पहले शुरू कर दिया था. तब जब बाकी तैयारियों का नामों-निशान भी नहीं था. इससे उन्हें बाद में बेसिक्स के साथ बहुत नहीं जूझना पड़ा. इंजीनियरिंग बैकग्राउंड की होने के बावजूद संजीता ने अपना ऑप्शनल सोशियोलॉजी चुना क्योंकि उन्हें यह पसंद था. इसकी थॉरो नॉलेज के लिए उन्होंने कुछ दिन कोचिंग भी ली लेकिन बाकी सेल्फ स्टडी से ही काम चलाया. 2018 और 2019 दोनों के ही अटेम्पट में उन्होंने कुछ दिन दिल्ली में रहकर टेस्ट सीरीज ज्वॉइन करके अपनी तैयारियों को और अच्छा करने की पूरी कोशिश की. करीब तीन महीने एक बिना खिड़की के कमरे में अकेले रहना और खाने में बस कुछ भी हल्का खा लेना उनके रूटीन का हिस्सा था. वे बताती हैं कि मैं खुद को समझाती थी कि बस तीन महीने की ही तो बात है. ऐसे संजीता ने मॉक टेस्ट दिए, टेस्ट सीरीज ज्वॉइन की और मॉक इंटरव्यू भी दिये. वे इन सभी को बहुत महत्व देती हैं.

संजीता की सलाह –

फ्यूचर एस्पिरेंट्स को संजीता यही सलाह देती हैं कि यह जर्नी बहुत लंबी होती है और यहां अंत में कोई साथ नहीं बचता सिवाय अपने-आपके. इसलिए खुद को खुद ही मोटिवेट करते रहें, कोई दूसरा आपके लिए यह काम नहीं कर पाएगा. जब आप यह परीक्षा देने का फैसला लेते हैं तो आपको पता होता है कि यह देश की सबसे कठिन परीक्षा है तो जाहिर है कि सफलता भी आसानी से या बिना कठिनाइयों के नहीं मिलेगी. इसलिए जब राह में मुश्किलें आएं या सफलता मिलने में देर लगे तो हिम्मत न हारें और इसे सफर का हिस्सा मानकर चलें. संजीता नोट्स बनाती थीं और यह ध्यान रखती थीं कि वे क्रिस्प हों ताकि रिवीजन आसानी से किया जा सके. इसके अलावा आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस, ऐस्से और एथिक्स के पेपर को बराबर महत्व, मॉक पेपर, मॉक इंटरव्यू देकर और खुद पर भरपूर भरोसा रखकर संजीता ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की है.

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