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IAS Success Story: दो प्रयासों में से दोनों में चयनित प्रियांक, जानें किस स्ट्रेटजी से बने IAS ऑफिसर

प्रियांक किशोर ने साल 2019 की यूपीएससी परीक्षा में 61वीं रैंक के साथ टॉप किया था. इसके पहले भी वह सेलेक्ट हो चुके हैं. आज जानते हैं प्रियांक से उनकी स्ट्रेटजी.

Success Story Of IAS Topper Priyank Kishore: यूपीएससी सीएसई परीक्षा एक ऐसी परीक्षा है जहां लोग अक्सर एक सफलता के लिए तरस जाते हैं. कई बार वे बार-बार अटेम्पट्स देते हैं लेकिन फिर भी सेलेक्ट नहीं होते. वहीं कुछ प्रियांक जैसे कैंडिडेट्स भी होते हैं जो अपने पहले ही अटेम्पट में सफल हो जाते हैं. प्रियांक ने साल 2018 में यूपीएससी सीएसई परीक्षा का पहला अटेम्पट दिया था और पहले ही प्रयास में उनका सेलेक्शन भी हो गया था. इस समय प्रियांक की रैंक आयी 274 जिससे उन्हें इंडियन एकाउंट और ऑडिट सर्विस एलॉट हुई. प्रियांक अपनी इस रैंक से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने 2019 में फिर से कोशिश की. इस साल उन्हें मनमाफिक सफलता मिली जब वे 61वीं रैंक के साथ परीक्षा पास करने में सफल हुए. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में प्रियांक ने इस परीक्षा के बारे में खुलकर बात की खासकर यूपीएससी एग्जाम में रैंक इम्प्रूव करने के टिप्स दिए.

रिजल्ट देखकर नहीं हुए निराश

प्रियांक मानते हैं कि इस परीक्षा में सफल होने के लिए कांफिडेंट होना बहुत जरूरी है साथ ही जरूरी है पॉजिटिव अपरोच रखना. इस वजह से जब साल 2018 का रिजल्ट आया तो अपनी रैंक और स्कोरकार्ड देखकर वे परेशान नहीं हुए हालांकि रिजल्ट उनके मन का नहीं था. बल्कि उन्होंने खुद को यह कहकर प्रेरित किया कि पहले ही अटेम्पट में सफल होकर उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. इससे उनका कांफिडेंस बढ़ा और उनके दिमाग में आया कि पहले अटेम्पट में यहां तक पहुंच सकते हैं तो थोड़े से और प्रयास से आगे भी बढ़ सकते हैं. इसी पॉजिटिव सोच से वे आगे बढ़े और सेकेंड अटेम्पट दिया. हालांकि एक बात का ध्यान रखें कि कांफिडेंट होने में और ओवर-काफिडेंट होने में जो छोटी सी लकीर है वह कभी पार न करें.

शुरुआत की प्री से

प्रियांक मानते हैं कि चाहे अटेम्पट किसी भी नंबर का हो पर हर बार प्री को उतना ही महत्व दें क्योंकि यहीं अटक गए तो गाड़ी आगे बढ़ेगी ही नहीं. इसलिए साल 2018 का रिजल्ट आने के बाद उन्होंने तुरंत साल 2019 की प्री की तैयारी शुरू कर दी. शुरू के डेढ़ से दो महीने उन्होंने सिर्फ और सिर्फ प्री पर फोकस किया. खूब रिवीजन किया और प्रैक्टिस टेस्ट सॉल्व किए ताकि समय के अंदर पेपर खत्म करना तो सीखें ही साथ ही समय रहते अपनी कमियों पर भी काम कर सकें. प्रियांक का प्री के मॉक टेस्ट में प्रदर्शन बहुत अच्छा जा रहा था और वे कांफिडेंट थे कि प्री निकल जाएगा. साल 2019 की प्री परीक्षा देने के बाद प्रियांक ने मेन्स पर फोकस किया. पहले चरण का एग्जाम देने के बाद ही वे जान चुके थे कि एग्जाम अच्छा हुआ है और सेलेक्शन हो जाएगा. इसके बाद वे मेन्स के लिए जी-जान से जुट गए.

अपनी कमियों पर किया फोकस

प्रियांक कहते हैं कि प्री देने के बाद वे मेन्स की तैयारी करने लगे और पहले चरण में उन्होंने पिछले साल का स्कोरकार्ड उठाकर देखा कि कहां कमी रह गई थी. वे इस नतीजे पर पहुंचे कि उनके ऑप्शनल में अच्छे अंक नहीं आए थे. वे कहते हैं कि रैंक 274 से 61 पहुंचने में बहुत अंकों का अंतर नहीं था, मात्र 35 से 40 अंकों में यह अंतर पट गया था. ऐसे में उन्होंने पाया कि अगर ऑप्शनल में थोड़ी और मेहनत की होती तो पहले ही अटेम्पट में रैंक और अच्छी आ जाती.

देखें प्रियांक द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

प्रियांक ने पाया कि उन्होंने समय और डर के कारण प्रैक्टिस पेपर सॉल्व नहीं किए थे. जरूरत थी कि वे ऑप्शनल विषय के और मॉक टेस्ट देते और अभ्यास से इम्प्रूव करते. उन्होंने इस बार यही किया.

मेन्स के लिए आंसर राइटिंग प्रैक्टिस है जरूरी

प्रियांक मानते हैं कि मेन्स में सफलता पाने का एक ही तरीका है कि जितनी हो सके आंसर राइटिंग प्रैक्टिस करें. खूब मॉक टेस्ट दें और उत्तरों को लिख-लिखकर देखें. केवल पढ़ने से कोई लाभ नहीं होता. असली लाभ के लिए आपको टेस्ट पेपर देने होंगे.

इसके साथ ही पूरी जर्नी में पॉजिटिव रहना भी बहुत जरूरी है. जब आप चीजों के सकारात्मक ढ़ंग से लेते हैं तो परिणाम भी अपने आप ही सकारात्मक आने लगते हैं.

प्रियांक की सलाह

प्रियांक कहते हैं कि कांफिडेंट रहें, खूब मॉक टेस्ट दें और इन मॉक टेस्ट्स को सीरियसली लें. केवल टेस्ट देने से ही बात खत्म नहीं होती उन्हें एनालाइज भी करें और देखें कि आप कहां गलती कर रहे हैं और गलती नहीं भी कर रहे हैं तो कहां इम्प्रूव कर सकते हैं. मेन्स लिखने के बाद प्रियांक ने ट्रेनिंग ज्वॉइन कर ली थी पर उन्हें विश्वास था कि सेलेक्शन हो जाएगा. जब रिजल्ट आ गया और सेलेक्शन हो गया उसके बाद उन्होंने साक्षात्कार की तैयारी की. इस बार वे इंटरव्यू के लिए ज्यादा मॉक नहीं दे पाए क्योंकि ट्रेनिंग के लिए शिमला में थे लेकिन पिछले अनुभव से उन्हें जो गलतियां फील हुईं थी उन पर काम किया और उन्हें दूर किया. कुल मिलाकर सकारात्मक सोच के साथ इस एग्जाम को क्लियर करना ज्यादा आसान होता है.

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