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IAS Success Story: सब कुछ गिरवी रख दिया, सिवाय अपने सपने के, जानिए खेतों में काम करने वाले माधव कैसे बने IAS अधिकारी

महाराष्ट्र के माधव गिट्टे साल 2020 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. उनकी यहां तक पहुंचने की जर्नी तमाम संघर्षों से भरी हुई है. किसान से आईएएस बनने तक माधव ने क्या कुछ नहीं सहा. आज जानते हैं माधव के इस कठिन सफर के बारे में.

Success Story Of IAS Topper Madhav Gitte: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के माधव के जीवन में इतने उतार-चढ़ाव आए हैं कि उनकी कहानी सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. जहां लोग भविष्य के लिए रुपया जोड़ते चलते हैं, वहीं माधव एक साल की फीस भरने के बाद ये नहीं जानते थे कि अगले साल की फीस का इंताजम कैसे होगा. कभी 50-60 रुपए के लिए खेत में मजदूरी की, तो कभी खेत से लेकर मकान तक सब गिरवी रख दिया. ऐसे करते हुए माधव की पढ़ाई पूरी हुई. आइये करीब से जानते हैं माधव के जीवन के संघर्ष को.

आप यहां माधव गिट्टे द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए गए इंटरव्यू का वीडियो भी देख सकते हैं

बेहद गरीबी में बीता बचपन –

माधव के परिवार में माता-पिता के अलावा कुल पांच भाई बहन थे. माता-पिता अशिक्षित थे और कुछ जमीन थी उनके पास जिसमें खेती करते थे. इससे कभी भी उनका खर्च पूरा नहीं होता था. माधव और बाकी भाई-बहन भी यथासंभव खेत में मां-बाप की मदद करते थे. कभी अपने खेतों में काम करते थे तो कभी दूसरों के. दूसरों के खेत में मजदूरी करने से दिन के 40 से 60 रुपए तक मिल जाया करते थे.

समय कठिन था कि तभी उनकी मां को कैंसर हो गया. ऑपरेशन कराया गया लेकिन कैंसर पूरी तरह ठीक नहीं हुआ. अंततः माधव जब ग्यारहवीं कक्षा में थे उस समय उनका देहांत हो गया. उनके जाने से पूरा परिवार बिखर गया. आर्थिक तंगी पहले से झेल रहे माधव के परिवार के लिए यह इमोशनल लॉस का भी समय साबित हुआ. क्लास दसवीं जैसे-तैसे पास करने वाले माधव को मां के देहांत के बाद पूरी तरह खेतों में काम करने उतरना पड़ा और बारहवीं का फॉर्म उन्होंने कुछ समय बाद भरा. एक सरकारी स्कूल में कम पैसों में एडमिशन हो गया.

22 किमी रोज चलाते थे साइकिल –

माधव को स्कूल आने के लिए रोज साइकिल से 22 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में वे बताते हैं कि मैं, इतना थक जाता था कि घर आकर खाना खाकर सो जाता था. नतीजतन उनके बारहवीं में 56 प्रतिशत अंक ही आए. ग्रेजुएशन के बारे में वे सोच भी नहीं सकते थे क्योंकि तीन साल पढ़ना और कमाई न करने का ऑप्शन उनके पास था ही नहीं. इसके अलावा वे कोई ऐसी पढ़ाई चाहते थे जिससे जल्दी नौकरी मिल जाए.

उसी समय पास में एक कॉलेज में डिप्लोमा कोर्स लांच हुआ जिसकी फीस बहुत कम थी. किसी तरह गांव वालों से ले-देकर फीस जमा की और यहां उन्होंने बहुत अच्छे अंकों से डिप्लोमा पास किया. वहां के टॉपर बने और मन में और पढ़ने की इच्छा जागृत हुई. हालांकि पैसे की समस्या अभी भी वहीं की वहीं खड़ी थी. इस बीच भी माधव खेतों में काम करते रहे.

धीरे-धीरे सब गिरवी रख दिया –

डिप्लोमा के बाद स्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि माधव को पुणे के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन मिल गया. पहले साल की फीस के लिए खेत गिरवी रखे गए और गांव वालों से उधार लिया गया और पहला साल पूरा हुआ. उस समय नहीं पता था कि बाकी सालों की फीस कैसे भरे जाएगी. खैर धीरे-धीरे बाकी खेत और मकान भी गिरवे रख दिए गए ताकी फीस भरी जा सके. लोगों से ब्याज पर पैसे लेने का काम भी चलता रहा. जैसे-तैसे माधव की इंजीनियरिंग पूरी हुई और उन्हें एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिली. इस दौरान एक बार उन्हें पैसे की बहुत दिक्कत आयी और उन्होंने एजुकेशन लोन लेने की कोशिश की पर सफल नहीं हुए. सिस्टम की यह बात उन्हें बहुत चुभी.

नौकरी से बदले दिन –

जॉब मिलने के बाद जैसा कि पहले से ही तय था माधव ने सारे लोन रीपे करने शुरू किए और गिरवी रखा घर, खेत आदि छुड़ाये. इस समय हालात थोड़ा बदले और नौकरी करते हुए उन्हें दो साल हो गए. इस बीच किसी ने उन्हें यूपीएससी टॉपर्स का साक्षात्कार दिखाया और वे इस तरफ खिंचे. दो महीने उन्होंने परीक्षा के बारे में पूरी जानकारी कलेक्ट की और इस क्षेत्र में आने को कमर कसी. अपने साथ आयी समस्याओं को देखने के बाद माधव चाहते थे कि कुछ ऐसा करें ताकि उन जैसे दूसरे बच्चों को यह सब न झेलना पड़े. इस लिहाज से भी उन्हें आईएएस सेवा में आने का मन हुआ.

समस्या अभी भी पैसे की थी. अगर माधव नौकरी छोड़ेगे तो पढ़ेंगे कैसे क्योंकि सारी कमाई तो लोन चुकाने में चली गई. ऐसे में उनके कुछ दोस्त भगवान बनकर उनके जीवन में आए जिन्होंने उन्हें हर तरह की मदद दी.

दिल्ली से की पढ़ाई –

अपने दोस्तों के बल पर माधव ने दिल्ली जाकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी की. पहले उन्होंने नौकरी के साथ भी यह कोशिश की थी पर पढ़ाई के लिए समय नहीं निकल पा रहा था. आखिरकार उन्होंने जॉब छोड़ दी. साल 2017 में उनका प्री भी क्लियर नहीं हुआ. अगले साल 2018 में वे इंडियन ऑडिट और एकाउंट्स सर्विस के लिए सेलेक्ट हुए पर उनका सपना आईएएस बनने का था. अंततः 2019 की सफलता ने उन्हें 2020 बैच का आईएएस पद दिलाया.

सालों की मेहनत, खेत पर काम, आर्थिक तंगी, लोन, मां की कमी जैसी तमाम मुसीबतों के बाद भी माधव अपने पथ से नहीं हटे. उन्होंने सफल होने की कसम खायी थी और सफल होकर ही दम लिया. वे दूसरे कैंडिडेट्स को भी यही सलाह देते हैं कि कोई भी कारण आपकी सफलता की राह का रोड़ा नहीं बन सकता. अगर ठान लें और जिद पर अड़ जाएं तो सफलता जरूरी मिलती है.

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