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सीरम इंस्टिट्यूट में जॉब करने के लिए कितनी करनी पड़ती है पढ़ाई-लिखाई, जानें कहां-कहां होता है यह कोर्स?

दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन कारखाने में काम करना चाहते हैं तो ये खबर आपके लिए जरूरी है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन का उत्पादन कर दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थी.

अगर आपने बायोटेक्नोलॉजी या फिर अपने इसके अलावा भी अन्य कोई कोर्स किया है तो दुनिया के सबसे बड़े वैक्सीन कारखाने में नौकरी कर आप अपने करियर को संवार सकते हैं. पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया दुनिया में सबसे ज्यादा वैक्सीन उत्पादन का रिकॉर्ड कायम कर चुका है. कोरोना वायरस से बचाव के लिए कोविशील्ड का उत्पादन कर सुर्खियां बटोरने वाले इस संस्थान ने तब एक साल में 1.5 बिलियन से ज्यादा टीकों का उत्पादन किया था. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में कई पदों के लिए भर्ती होती है, जिनके लिए शिक्षा और योग्यता की आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं.

संस्थान में कई पद भरे जाते हैं. जिनमें साइंटिस्ट, मेडिकल ऑफिसर, रिसर्च एसोसिएट, इंजीनियर, टेक्नीशियन, एडमिनिस्ट्रेटिव पद आदि शामिल हैं. जिनके लिए योग्यता अलग-अलग हैं. किसी भी मेडिकल संस्थान में वैज्ञानिक बनने के लिए आपको बीएससी बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रसायन विज्ञान/संबंधित फील्ड में एमएससी पास होने के साथ जरूरी अनुवभ होना जरूरी है. जबकि कई जगह पीएचडी भी आवश्यक है.

इन्हें भी मिल सकती है जॉब 

इंजीनियर बनने के लिए संबंधित फील्ड में इंजीनियरिंग किया हुआ होना जरूरी है. यदि प्रोडक्शन इंजीनियर के पद पर भर्ती है तो उम्मीदवार का इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग पास होना जरूरी है साथ ही उसके पास जरूरी अनुभव भी होना चाहिए. रिसर्च एसोसिएट पदों के लिए आमतौर पर बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रसायन विज्ञान जैसे सब्जेक्ट्स से बीएससी/एमएससी पास उम्मीदवारों को रखा जाता है.

टेक्नीशियन के पद के लिए आमतौर पर न्यूनतम 10+2 विज्ञान बायोलॉजी, केमिस्ट्री या फिजिक्स के साथ आईटीआई या डिप्लोमा इन बायोटेक्नोलॉजी/मॉइक्रोबायोलॉजी/मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी की डिग्री जरूरी होती है. वहीं, एडमिनिस्ट्रेटिव पदों के लिए ग्रेजुएशन जरूरी होती है.

मान्यता प्राप्त संस्थान से करें कोर्स

उम्मीदवार इन कोर्स को मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से कर सकते हैं. जो बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, रसायन विज्ञान और अन्य संबंधित विषयों में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स कराते हैं. आप अपनी रुचि के क्षेत्र के आधार पर विश्वविद्यालयों की लिस्ट चेक कर सकते हैं और कोर्स कर सकते हैं.

इन संस्थानों से भी कर सकते हैं पढ़ाई

  • इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलॉजी (आईसीजीईबी), नई दिल्ली
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (एनआईआई), नई दिल्ली
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे
  • अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स)
  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी)

यह भी पढ़ें- JEE के काफी स्टूडेंट्स हर साल क्यों कर लेते हैं आत्महत्या, पढ़ाई के दबाव में जान देना सिर्फ भारत में आम या विदेशों में भी यह दिक्कत?

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पत्रकारिता की दुनिया में जब बात पढ़ाई-लिखाई, लाइफस्टाइल, फीचर या न्यूज की आती है, तो चन्द्रिल कुलश्रेष्ठ का नाम सहज ही सामने आता है. जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त कर चुके चन्द्रिल बीते पांच वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं और इस दौरान इन्होंने पत्रकारिता के कई रंग देखे हैं - खबरों की तह तक जाना, आम लोगों की जिंदगी से जुड़ी बातें सामने लाना और क्राइम से जुड़ी कहानियों को तथ्यात्मक ढंग से पेश करना उनकी खासियत बन चुकी है.

चन्द्रिल न सिर्फ रिपोर्टिंग में निपुण हैं, बल्कि कंटेंट राइटिंग, स्टोरी कंसेप्टिंग और फीचर प्रजेंटेशन में भी उनका अंदाज बेहद खास है. खबरों की दुनिया में जहां अक्सर रफ्तार और सनसनी का बोलबाला होता है, वहीं चन्द्रिल की कलम तथ्यों के साथ संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए काम करती है. वह मानते हैं कि पत्रकारिता का असली उद्देश्य जनता को सही और सटीक जानकारी देना है, न कि महज ध्यान खींचना. यही वजह है कि उनके द्वारा लिखी गई स्टोरीज ना सिर्फ पढ़ने में रोचक होती हैं, बल्कि विश्वसनीयता के मानक पर भी खरी उतरती हैं.

इन दिनों चन्द्रिल ABP Live से जुड़कर कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर काम कर रहे हैं. चाहे बात सरकारी नौकरियों की अपडेट्स की हो, स्कूली शिक्षा में हो रहे बदलावों की या फिर खेती-किसानी से जुड़े जमीनी मुद्दों की हर विषय पर उनकी पकड़ गहरी और प्रस्तुतिकरण सहज होता है. वह खबर को महज सूचना नहीं, बल्कि एक अनुभव की तरह पेश करने में यकीन रखते हैं, ताकि पाठक उससे खुद को जोड़ सके.

क्राइम रिपोर्टिंग में भी चन्द्रिल की शैली अलग है. वह किसी भी केस को सिर्फ घटनाओं के सिलसिले के रूप में नहीं दिखाते, बल्कि उसके पीछे छिपे सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और कानूनी पहलुओं को भी उजागर करने की कोशिश करते हैं.

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