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Explained: एयरफोर्स से लेकर टीचर्स को कैद करने तक... NEET UG Re-Exam 2026 को लीकप्रूफ बनाने के अंदरूनी पहलू क्या?

Re NEET 2026: सरकार और NTA ने 37 दिनों में यह किला खड़ा किया. PM मोदी खुद निगरानी कर रहे हैं. NEET का री-एग्जाम सिर्फ परीक्षा नहीं, यह 23 लाख सपनों, देश की शिक्षा व्यवस्था और NTA की साख का सवाल है.

करीब 23 लाख स्टूडेंट्स 21 जून 2026 को NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा (Re NEET) देने वाले हैं. तीन महीने पहले 3 मई को हुई मूल परीक्षा पेपर लीक के गंभीर आरोपों के चलते रद्द कर दी गई थी. इस बार सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता है. इस बार ऐसी व्यवस्था की है, जिसकी कल्पना भी शायद ही किसी ने की हो. वायुसेना के विमानों से लेकर पेपर सेट करने वालों को बंधक बनाने तक, टेलीग्राम बैन से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरे तक तैनात हैं. पूरा देश नजर रखे हुए है कि क्या ये सारे इंतजाम 23 लाख सपनों को सुरक्षित रख पाएंगे या नहीं...

वायुसेना की 200 से ज्यादा उड़ानें: 18 हब तक पहुंचे पेपर

सबसे बड़ी चुनौती थी पेपर को समय पर, सुरक्षित और बिना किसी छेड़छाड़ के पूरे देश में पहुंचाना. आमतौर पर यह काम 10 12 दिनों में होता है, लेकिन इस बार वक्त बहुत कम था. इसलिए सरकार ने भारतीय वायुसेना (IAF) को इस काम में लगा दिया.

13 जून को यह मिशन शुरू हुआ और पिछले 3-4 दिनों में IAF ने करीब 200 सॉर्टियां (उड़ानें) भरीं. Mi-17 हेलीकॉप्टर और C-17 ग्लोबमास्टर जैसे ट्रांसपोर्ट विमानों के ज़रिए सीलबंद पेपर के पैकेट देशभर के 18 से 20 रीजनल हब तक पहुंचाए गए.

सिर्फ हवाई मार्ग ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के और भी कड़े इंतजाम किए गए. CRPF और CISF के जवानों की दोहरी सुरक्षा के साथ पेपर की ढुलाई की गई. दूरदराज और संवेदनशील इलाकों के लिए खास हेलिपैड बनाए गए. मिसाल के तौर पर, 16 जून को तिरुनेलवेली में आर्मी हेलीकॉप्टर की ट्रायल लैंडिंग भी कराई गई.

इन हबों से पेपर को सड़क मार्ग से परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाएगा. पेपर की ट्रंक (तिजोरी) को परीक्षा शुरू होने से करीब 45 मिनट पहले ही जिला अधिकारी (DM) और पुलिस की मौजूदगी में खोला जाएगा.

टेलीग्राम पर रोक: क्यों और कैसे?

16 जून को सरकार ने टेलीग्राम ऐप को 22 जून तक ब्लॉक कर दिया. दरअसल, NTA को पता चला कि टेलीग्राम पर 'PAPER LEAKED NEET', 'Re NEET 2026' और 'Private Mafia' जैसे नामों से कई चैनल चल रहे थे. ये चैनल छात्रों को झांसे में लेकर 14,000 से 25,000 रुपये और कहीं कहीं 10 लाख रुपए तक की मांग कर रहे थे. सबसे बड़ी चाल यह थी कि टेलीग्राम का मैसेज एडिटिंग फीचर इस्तेमाल करके ये चैनल पुराने मैसेज में एडिट करके झूठा 'पेपर लीक' का भ्रम फैला रहे थे.

NTA ने कहा कि 200 से ज्यादा टेलीग्राम चैनल हटाने जैसे दूसरे विकल्प काम नहीं आए, इसलिए आखिरी हथियार के तौर पर बैन लगाना पड़ा. टेलीग्राम का मैसेज एडिटिंग फीचर 30 जून तक बंद कर दिया गया. हालांकि, टेलीग्राम के CEO पावेल दुरोव ने इस फैसले की आलोचना की और कहा कि 15 करोड़ भारतीय यूजर्स को सजा मिल रही है. NTA ने खुद माना कि VPN के जरिए बैन को बायपास किया जा सकता है, लेकिन इससे फ्रॉड मार्केट पर अंकुश लगेगा.

पेपर सेटरों का आइसोलेशन: कोई बाहर से बात नहीं कर सकता

शायद सबसे कड़ा और अनोखा कदम यह है कि पेपर बनाने, मॉडरेट करने और ट्रांसलेट करने वाले सभी एक्सपर्ट्स को एक सीक्रेट और छिपी हुई जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है. वहां डिजिटल ब्लैकआउट है यानी फोन, लैपटॉप, इंटरनेट, स्मार्टवॉच सब बंद. 21 जून को परीक्षा खत्म होने तक यह 'लॉकडाउन' जारी रहेगा.

इतना ही नहीं पूरी प्रोसेस को कई हिस्सों में बांट दिया गया है, ताकि किसी एक व्यक्ति या समूह को पूरी चेन की जानकारी न हो. पेपर के कई सेट तैयार किए गए हैं, जो एक मास्टर कंप्यूटर में एन्क्रिप्टेड फॉर्म में स्टोर हैं.

परीक्षा केंद्रों पर: बायोमेट्रिक, CCTV, जैमर और AI से सुरक्षा

अब बात करते हैं परीक्षा केंद्रों की जहां 23 लाख छात्र 21 जून को पहुंचेंगे:

  • हर स्टूडेंट को अनिवार्य बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से गुजरना होगा. फेशियल रिकॉग्निशन और लाइव फोटोग्राफी भी होगी, ताकि कोई नकली या प्रॉक्सी कैंडिडेट तो नहीं आया. थ्री लेयर सिक्योरिटी होगी- एंट्री गेट पर, हॉल के अंदर और बाहर निकलते वक्त.
  • हर सेंटर पर हाई डेफिनेशन सीसीटीवी कैमरे लगे हैं. लाइव फीड NTA कंट्रोल रूम, जिला प्रशासन, राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को एक साथ भेजी जा रही है.
  • 5G जैमर लगाए गए हैं ताकि मोबाइल, ब्लूटूथ और वाई फाई सिग्नल पूरी तरह बंद रहें.
  • AI इनेबल्ड कैमरे क्लासरूम को स्कैन करेंगे और किसी भी संदिग्ध हरकत को सेंट्रल कमांड को रिपोर्ट करेंगे.

सबसे खास बात CCTV फुटेज की पोस्ट एग्जाम फॉरेंसिक जांच होगी. यानी लाइव मॉनिटरिंग में छूटी गई कोई गड़बड़ी भी बाद में पकड़ी जा सकेगी. फुटेज को कम से कम 90 दिनों तक सुरक्षित रखा जाएगा. परीक्षा की अवधि 195 मिनट कर दी गई है, ताकि वेरिफिकेशन की अतिरिक्त प्रक्रिया को समायोजित किया जा सके. छात्र परीक्षा खत्म होने से पहले हॉल से बाहर नहीं निकल सकेंगे.

OMR शीट्स की सुरक्षा: CRPF और CISF की निगरानी

परीक्षा खत्म होने के बाद भी सुरक्षा जारी रहेगी. OMR शीट्स को सील करके CRPF और CISF के जवानों की निगरानी में रखा जाएगा. इन्हें CCTV कैमरों के नीचे रखा जाएगा, जब तक कि इन्हें मूल्यांकन के लिए न भेज दिया जाए.

तो क्या यह सारे इंतजाम कारगर साबित होंगे?

इसके पेशेवर और नुकसान दोनों पहलुओं को समझते हैं:

कामयाबी की संभावनाएं

  • IAF की 200 से ज्यादा सॉर्टियों की जिम्मेदारी है कि पेपर समय पर और बिना छेड़छाड़ के पहुंचे. पहले की तुलना में यह बहुत बड़ा सुधार है.
  • पेपर बनाने वालों तक पहुंच पूरी तरह कट गई है. 3 मई वाली लीक में सबसे बड़ा सवाल यही था कि पेपर कहां से लीक हुआ, अब उस रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है.
  • बायोमेट्रिक और फेशियल वेरिफिकेशन से नकली उम्मीदवार भेजने की पुरानी चाल अब काम नहीं करेगी.
  • CCTV और फॉरेंसिंक जांच के तहत लाइव निगरानी के बाद भी फुटेज की बाद में जांच होगी, जिससे कोई गड़बड़ी नहीं छिप पाएगी.
  • 5G जैमर और AI कैमरों से तकनीकी रूप से किसी भी तरह की बाहरी मदद या नकल को रोका जा सकेगा.
  • 5 लाख से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.

चुनौतियां और कमजोरियां

  • NTA ने खुद माना है कि VPN से बैन को टाला जा सकता है. लीक करने वाले दूसरे प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट हो सकते हैं.
  • 500 से ज्यादा शहरों में 23 लाख से ज्यादा छात्रों को एक साथ संभालना मुश्किल हो सकता है. इतने बड़े पैमाने पर हर केंद्र पर पूरी सख्ती बनाए रखना बहुत मुश्किल है. कोई न कोई इंसानी या तकनीकी चूक हो सकती है.
  • 'लीक' का मतलब सिर्फ पेपर नहीं होता यानी अगर कोई परीक्षा के दौरान सवालों की फोटो बाहर भेज देता है, तो वह भी एक तरह की लीक ही है. 5G जैमर से यह रुकेगा, लेकिन हर सेंटर पर यह पूरी तरह काम करेगा, इसकी गारंटी नहीं मिली है.
  • पेपर सेंटर आइसोलेशन कड़ा कदम है, लेकिन अगर कोई सेटर पहले से ही बाहर संपर्क में था, तो हो सकता है नुकसान पहले ही हो चुका हो.

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ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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