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Admissions 2020: कोरोना के कारण कॉलेजों के लिए हॉस्टल खोलना हुआ चुनौती, कुछ ने अपनाएं ये उपाय

इस साल कोरोना के कारण हॉस्टल फैसिलिटी हमेशा की तरह उपलब्ध नहीं हो पा रही है. इससे स्टूडेंट्स और कॉलेजेस दोनों ही समस्या का सामना कर रहे हैं.

Students Are Suffering As Hostels Are Shut Due To Corona: इस साल स्टूडेंट्स को कोरोना के कारण जिन बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उनमें से एक है हॉस्टल सुविधा का न मिलना. कुछ समय पहले जब कोरोना के कारण सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर दिया था, उस समय दिल्ली के जेएनयू से लेकर चंडीगढ़ के सभी कॉलेजेस तक में स्टूडेंट्स को हॉस्टल खाली करने के निर्देश दे दिए गए थे. दरअसल हॉस्टल में सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नॉर्मल नॉर्म्स फॉलो करना आसान नहीं था. खासकर कैंटीन, मैस आदि को रन करना काफी रिस्की था. हालांकि इस निर्णय का बहुत से स्टूडेंट्स ने कड़ा विरोध किया था जो दूर-दराज इलाकों के थे. उनके लिए कोरोना के इस माहौल में घंटों का सफर करके अपने घर जाना आसान नहीं था. फिर धीरे-धीरे हालात बदले और यातायात सुचारू रूप से चलने लगा. कुछ नहीं बदला तो वह था कोरोना का प्रकोप, वह वैसा ही रहा बल्कि दिन पर दिन और बढ़ता ही गया. ऐसे में एक बड़ी समस्या आ रही है जब कॉलेज खुलने का समय पास आ रहा है और कोरोना के चलते हॉस्टल नहीं खुल पा रहे हैं. हालांकि वर्तमान स्थिति देखते हुए सभी कॉलेजेस में ऑनलाइन क्लासेस संचालित होने की ही बात हो रही है पर कुछ स्टूडेंट ऐसे इलाकों से आते हैं जिन्हें इंटरनेट की भी बड़ी समस्या है. ऐसे स्टूडेंट्स के लिए कोई चारा नहीं बचा है कि वे कैसे अपनी क्लासेस ज्वॉइन करें.

सोशल डिस्टेंसिंग के कारण नहीं खुल पा रहे हॉस्टल –

कोरोना से बचाव के लिए जो उपाय बताए जाते हैं उनमें सबसे अहम माना गया है सोशल डिस्टेंसिंग. हॉस्टल के रूम्स में इतनी जगह नहीं होती जहां एक कमरे में एक या कई बार दो स्टूडेंट्स को रखा जा सके. इसके साथ ही हॉस्टल की बाकी सुविधाओं को ठीक से चलाने के लिए जिन इंप्लॉइज की आवश्यकता होगी, इससे उनकी हेल्थ को भी खतरा है. इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज ने कम से कम 30 सितंबर तक हॉस्टल फैसिलिटी को सस्पेंड रखा है. वहीं कुछ कॉलेज जैसे डीएवी कॉलेज सेक्टर 10, यह सुविधा दे रहे हैं कि स्टूडेंट कुछ रकम देकर अपने लिए हॉस्टल रूम पहले से बुक कर लें और जैसे ही फिजिकल क्लासेस शुरू हों, वे तुरंत शिफ्ट हो जाएं. पेमेंट ऑप्शंस को भी लचीला बनाया गया है.

कॉलेज के हॉस्टल न मिलने के साथ ही दूसरी समस्या यह है कि इस माहौल में लोग अपने यहां स्टूडेंट्स को पेइंग गेस्ट भी नहीं रख रहे. इससे कॉलेज हॉस्टल न मिलने के साथ ही उन्हें बाहर भी एकोडमेशन नहीं मिल पा रहा.

कुछ कैम्पेसेस ने किया खुद को आइसोलेट –

इस बार कुछ कैम्पेसेस ने एक नया तरीका भी अपनाया है, जिसके अंतर्गत उन्होंने खुद को आइसोलेट कर दिया है. हालांकि यह काम इतना आसान नहीं है पर कुछ जगहों पर यह करने की योजना बन रही है जैसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) में. इसके अंतर्गत कैम्पस अपनी फुल कैपिसिटी के साथ कॉलेज खोलेंगे और अपने आपको आइसोलेट कर लेंगे. उसके पहले सभी तरह के इंतजाम करके यह देख लिया जाएगा कि कोई अनवेल व्यक्ति कैम्पस में ना आने पाए. जब तक बहुत जरूरी नहीं होगा न कोई अंदर आएगा न कोई बाहर जाएगा. अगर किसी को बाहर जाना भी पड़ता है तो वे अपना खुद का यानी कॉलेज का वाहन प्रयोग करेंगे. यही नहीं कॉलेज में बाकी काम-काज देखने वाले भी वहीं स्टे करेंगे जिनमें शिक्षक भी शामिल हैं. क्लासरूम, कैंटीन, हॉस्टल रूम सभी को समय-समय पर सैनिटाइज किया जाएगा. इस प्रयास के माध्यम से यह इंश्योर किया जाएगा कि पूरा कैम्पस एक यूनिट की तरह काम करे. ऐसा ही इनिशिएटिव अंसल यूनिवर्सिटी ने भी लिया है जहां बड़ी संख्या में विदेशी छात्र पढ़ते हैं जिनका लॉकडाउन के समय अपने देश वापस जाना संभव नहीं था. वहां पूरे कैम्पस में गैरजरूरी मूवमेंट को रिस्ट्रक्टि कर दिया गया था.

ऐसे ही प्रयास करके दूसरे कॉलेजेस भी अपने यहां स्टूडेंट्स को आने की अनुमति दे सकते हैं. हालांकि जब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं बनती स्टूडेंट्स और कॉलेजेस दोनों को ही ऑनलाइन क्लासेस से ही काम चलाना होगा.

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