इस दिग्गज प्राइवेट बैंक पर उठे बड़े सवाल, PMO और RBI से की गई शिकायत, जानें क्या है मामला
IndusInd Bank: इंडसइंड बैंक पर एक व्हिसलब्लोअर ने इनसाइडर ट्रेडिंग, वित्तीय गड़बड़ी और प्रशासनिक खामियों के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसकी जांच की मांग PMO, RBI और अन्य एजेंसियों से की गई है.

- व्हिसलब्लोअर ने इंडसइंड बैंक पर इनसाइडर ट्रेडिंग के गंभीर आरोप लगाए।
- पूर्व जोनल हेड पर गोपनीय जानकारी से ₹46 करोड़ कमाने का आरोप है।
- बैंक ने आरोपों का खंडन किया, पहले ₹2000 करोड़ विवाद भी था।
IndusInd Bank Trouble: इंडसइंड बैंक के लिए एक बार फिर नई मुसीबतें खड़ी हो सकती हैं. मिली जानकारी के मुताबिक, एक व्हिसलब्लोअर की शिकायत में इंडसइंड बैंक में कथित इनसाइडर ट्रेडिंग और प्रशासनिक खामियों की जांच की मांग की गई है. जिसकी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और कई अन्य नियामक एजेंसियों को भेजी गई है.
दरअसल यह ताजा आरोप इंडसइंड बैंक द्वारा डेरिवेटिव अकाउंटिंग से जुड़े 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा करने के कुछ ही महीनों बाद सामने आए हैं. फिलहाल शिकायत को गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ), राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) और अन्य अधिकारियों को भी भेजा गया है.
बैंक पर नए आरोप क्या हैं ?
व्हिसलब्लोअर के अनुसार, इनसाइडर ट्रेडिंग, वित्तीय रिकॉर्ड में हेराफेरी, माइक्रोफाइनेंस लोन, ऑडिट परिणाम को दबाने और वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड सदस्यों की ओर से गड़बड़ियों को छुपाने की कोशिश का आरोप लगा है. बता दें, शिकायत के केंद्र में इंडसइंड बैंक के पूर्वी भारत के पूर्व जोनल हेड समीर अग्रवाल हैं.
उन पर आरोप है कि अग्रवाल ने प्रमुख कॉर्पोरेट घटनाक्रमों के सामूहिक होने से पहले ही करीब 815 करोड़ रुपये के शेयर लेनदेन के माध्यम से लगभग 46 करोड़ रुपये का फायदा कमाया है. साथ ही उन्होंने खासतौर पर अपने कॉर्पोरेट बैंकिंगज़िम्मेदारी के माध्यम से प्राप्त गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल परिवार के सदस्यों और जुड़ी संस्थाओं की ओर से किए गए लेन-देन को सहज बनाने के लिए किया.
इंडसइंड बैंक का बड़ा बयान
वही अब बैंक पर लग रहे गंभीर आरोपों के बीच एनडीयूएसइंड बैंक का बयान सामने आया है . द इकोनॉमिक टाइम्स के सवालों का जवाब देते हुए बैंक ने कहा कि वह व्हिसलब्लोअर द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है. आगे कहा उठाए गए सभी मुद्दों की 'विधिवत जांच' की गई है और आंतरिक नीतियों और नियामक आवश्यकताओं के अनुसार ठीक ढ़ंग से कार्रवाई की गई है. इतना ही नहीं बैंक ने यह भी कहा कि उसने कुछ मामलों की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी थी और इसलिए वह इस पर आगे कोई टिप्पणी नहीं करेगा.
2,000 करोड़ रुपये विवाद के बाद नई शिकायत
गौरतलब है कि इस शिकायत का समय महत्वपूर्ण है क्योंकि इंडसइंड बैंक पहले से ही 2,000 करोड़ रुपये के डेरिवेटिव अकाउंटिंग में गड़बड़ी के खुलासे के बाद सुर्खियों में है, जिसने नियामक जांच का मौका दिया और बैंकर में जोखिम प्रबंधन और शासन प्रथाओं के बारे में सवाल उठाए. नए आरोपों से बैंक की भीतरी कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्रों पर ध्यान और भी बढ़ सकता है. फिलहाल, यह आरोप केवल सिर्फ व्हिसलब्लोअर की शिकायत में दावे किए गए हैं, और इस बात का कोई आम संकेत नहीं है कि किसी नियामक ने इन मामलों पर कोई नतीजा निकाला है. द इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, यह शिकायत मई के अंत में बैंक को भेजी गई थी.
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Source: IOCL
























