कब तक खत्म हो जाएगा पुराना टैक्स रेजीम? जानें CBDT चीफ की जुबानी
Income Tax: पुराना टैक्स रिजीम कब खत्म होगा या रिटर्न फाइल कर चुके लोगों के रिफंड कब तक आएंगे, इसे लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं. CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने इन बातों का जवाब दे दिया है.

Income Tax: देश के 88 परसेंट टैक्सपेयर्स असेसमेंट ईयर 2025-26 में नए टैक्स रिजीम (New Tax Regime) में चले गए हैं. इसकी जानकारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल (Ravi Agrawal) ने बीते बुधवार को दी. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सरकार फिलहाल पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के तहत रिटर्न फाइल करने की सुविधा खत्म कर दिए जाने पर कोई विचार नहीं कर रही है.
ऐसे में सवाल यह आता है कि पुराना टैक्स रिजीम कब तक खत्म होगा? इसका जवाब देते हुए रवि अग्रवाल ने कहा कि इनकम-टैक्स डिपार्टमेंट के मन में पुराने टैक्स सिस्टम को खत्म करने की अभी कोई तारीख तय नहीं है.
कब तक आएंगे बचे हुए लोगों के रिफंड?
एक जरूरी सवाल यह भी है कि आईटीआर फाइल कर चुके कई लोगों के रिफंड अब तक नहीं आए हैं, उनके अकाउंट में कब तक पैसे आएंगे? इसका जवाब देते हुए CBDT चीफ ने कहा कि हम पहले ही 95 परसेंट तक लोगों को रिफंड बांट चुके हैं. बाकी बचे हुए ज्यादातर रिफंड फरवरी तक क्लियर कर दिए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि रिफंड जारी करने में देरी का मकसद लोगों को नए सिस्टम में धकेलना नहीं है.
नए टैक्स रिजीम को अपनाने में आई तेजी
द इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में रवि अग्रवाल ने बताया कि पूरे देश में लगभग 86 परसेंट टैक्सपेयर्स अभी नए टैक्स रिजीम में हैं, जो असेसमेंट ईयर 2024-25 से 11 परसेंट ज्यादा है. अगर आप इंडिविजुअली की बात करेंगे — ITR 1, 2, 3, और 4 — तो यह पिछले साल के 76 परसेंट के मुकाबले इस बार 88 परसेंट है. अकेले ITR-4 को देखें, तो नए रिजीम में 97 परसेंट लोग हैं. लोगों के पास पुराने और नए टैक्स रिजीम में से किसी एक को चुनने का ऑप्शन है. किसी के ऊपर कुछ थोपा नहीं जा रहा है.
रवि अग्रवाल ने कहा, ''लेकिन हमें उम्मीद और यकीन है कि टैक्सपेयर्स को नए सिस्टम में फायदा दिखेगा और वे इसे अपनाएंगे. फिर हम किसी एक समय पर देखेंगे कि पुराना टैक्स सिस्टम कोई काम का हैया नहीं, लेकिन टैक्सपेयर के पास हमेशा विकल्प रहेगा.''
उन्होंने कहा कि पुराने टैक्स रिजीम को खत्म करने का हमारे मन में पहले से तय कोई तारीख नहीं है. टैक्सपेयर्स के पास पुराने सिस्टम में रहने के अपने कारण होते हैं, जैसे कुछ खास डिडक्शन जो उन्हें ज्यादा फायदेमंद लगता हो.
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Source: IOCL
























