Gratuity payment करने से एम्प्लॉयर इस स्थिति में कर सकता है मना, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा
Gratuity payment: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कंपनी की अनुशासन समिति की सुनवाई में कर्मचारी की 'नैतिक अधमता' साबित हो जाती है, ताे एम्प्लॉयर उसका ग्रैच्युटी पेमेंट जब्त कर सकते हैं.

Supreme Court on Gratuity payment: ग्रैच्युटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. 17 फरवरी, 2025 को अपने सुनाए इस फैसले में कोर्ट ने कहा कि ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत किसी कर्मचारी की ग्रैच्युटी जब्त करने के लिए अब आपराधिक दोषसिद्धि जरूरी नहीं है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि अगर एम्प्लॉयर ने किसी कर्मचारी को 'नैतिक अधमता' का कारण बताकर नौकरी से बर्खास्त किया है, तो कर्मचारी की ग्रेच्युटी जब्त करने के लिए यह कारण ही पर्याप्त आधार है.
क्या है 'नैतिक अधमता' का मतलब?
बता दें कि 'नैतिक अधमता' शब्द का इस्तेमाल क्सर श्रम और रोजगार कानून के मामलों में किया जाता है. इसका तात्पर्य ऐसे कार्यों से हैं, जो कि गलत या अनैतिक है जैसे कि धोखाधड़ी करना. सुप्रीम कोर्ट के इस नए आदेश के बाद अब एम्प्लॉयर 'नैतिक अधमता' से जुड़े कार्यों के आधार पर किसी कर्मचारी को नौकरी से निकालता है, तो वह उसे उसकी ग्रैच्युटी का भुगतान करने से भी मना कर सकता है. वकीलों का कहना है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है और 2018 में कोर्ट के सुनाए फैसले से बिल्कुल विपरीत है.
अब नहीं करना होगा कोर्ट के फैसले का इंतजार
इस नए फैसले के साथ अगर 'नैतिक अधमता' की वजह से किसी कर्मचारी को नौकरी से निकाला जाता है, तो एम्प्लॉयर अब ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत उसकी ग्रैच्युटी जब्त करने की कार्रवाई कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं करना होगा.
क्या होता है ग्रैच्युटी?
ग्रैच्युटी लंबे समय तक कंपनी में बने रहने वाले कर्मचारियों को दिया जाने वाला एक महत्वपूर्ण लाभ है. इसके लिए किसी कंपनी या संस्थान में कर्मचारी को कम से कम 5 साल का सर्विस पीरियड पूरा करना चाहिए. इसका भुगतान रिटायरमेंट के वक्त या इस्तीफा देने के बाद या कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को किया जाता है.
ये भी पढ़ें:
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















