Austere Systems IPO: ये शेयर है या फिर पारस पत्थर, आईपीओ में पहले ही दिन शेयर मार्केट में मचा दिया भारी गदर
Auster Systems IPO: SME सेगमेंट में लिस्टेड कंपनियों में वोलैटिलिटी ज्यादा होती है. शुरुआती दिनों में शेयर की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है जिससे शॉर्ट-टर्म निवेशकों को जोखिम रह सकता है.

Auster Systems IPO: ऑस्टर सिस्टम्स लिमिटेड (ASL) की शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री हुई है. कंपनी का इश्यू प्राइस 55 रुपये था और यह 75.55 रुपये पर जाकर लिस्ट हुआ यानी लगभग 37 प्रतिशत प्रीमियम पर. लिस्टिंग के बाद थोड़े समय में मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिला और शेयर करीब 4 प्रतिशत गिरकर 72 रुपये तक पहुंच गया.
क्यों स्टॉक्स में तेजी?
इस IPO को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला. रिटेल निवेशकों का कोटा 101.81 गुना सब्सक्राइब हुआ. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का कोटा 236 गुना भरा गया. कुल मिलाकर IPO को 1076 गुना सब्सक्रिप्शन मिला जो कि SME सेगमेंट के लिए बेहद बड़ा आंकड़ा है.
कंपनी की स्थापना 2013 में हुई थी. यह आईटी सर्विसेज और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है और एंटरप्राइजेज व स्टार्टअप्स को डिजिटल सॉल्यूशंस प्रदान करती है. कंपनी का पब्लिक इश्यू साइज 15.57 करोड़ रुपये था और इसके शेयर BSE के SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हुए. प्रमोटर्स की हिस्सेदारी IPO से पहले 91.67% थी. कंपनी के प्रमोटर्स में पीयूष गुप्ता. गजानन टेनी. और शिखिर गुप्ता शामिल हैं.
क्या करती है कंपनी?
ऑस्टर सिस्टम्स आईटी सर्विसेज और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है. डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाउड-बेस्ड सॉल्यूशंस की बढ़ती डिमांड के कारण कंपनी को आने वाले वर्षों में अच्छी ग्रोथ संभावनाएं हैं. छोटे और मध्यम उद्योगों के साथ-साथ स्टार्टअप्स में आईटी सेवाओं की जरूरत तेजी से बढ़ रही है जिससे कंपनी के लिए नए क्लाइंट हासिल करने का अवसर है. कंपनी की सर्विस डाइवर्सिफिकेशन और तकनीकी क्षमता इसे प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनाए रख सकती है.
SME प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग के बाद कंपनी को कैपिटल जुटाने और ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में मदद मिलेगी. यदि कंपनी नए प्रोजेक्ट्स और इंटरनेशनल क्लाइंट बेस पर ध्यान देती है तो इसका बिजनेस और मजबूत हो सकता है.
SME सेगमेंट में लिस्टेड कंपनियों में वोलैटिलिटी ज्यादा होती है. शुरुआती दिनों में शेयर की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है जिससे शॉर्ट-टर्म निवेशकों को जोखिम रह सकता है. इसके अलावा आईटी सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा है और बड़ी कंपनियों की मौजूदगी छोटे खिलाड़ियों के लिए चुनौती बन सकती है.
कंपनी का बिजनेस क्लाइंट प्रोजेक्ट्स पर निर्भर है. यदि नए ऑर्डर या कॉन्ट्रैक्ट्स की कमी रहती है तो ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. विदेशी मार्केट्स से जुड़ी अनिश्चितताएं और करेंसी फ्लक्चुएशन भी कंपनी की आय को प्रभावित कर सकते हैं.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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