तेल का भंडार, फिर भी कर्ज मांग रहा सऊदी अरब; क्या कंगाली की ओर बढ़ रहा देश?
सऊदी अरब एक ऐसा देश है, जिसके पास कच्चे तेल का अथाह भंडार है. यह टोटल ग्लोबल ऑयल का लगभग 15.14% हिस्सा है. हालांकि, बावजूद इसके सऊदी दूसरे देशों से कर्ज मांगने को मजबूर है.

सऊदी अरब इन दिनों फंड जुटाने की कोशिश में जुटा हुआ है. इसका खुलासा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में हुआ है. दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच जंग से सऊदी के तेल सेक्टर पर बुरा प्रभाव पड़ा है. कारोबार में आ रही दिक्कतों के चलते देश की अर्थव्यवस्था इस वक्त दबाव में है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के नेशनल डेट मैनेजमेंट सेंटर (NDMC) ने अंतरराष्ट्रीय बैंकों से 8 अरब डॉलर के नए सिंडिकेटेड लोन के लिए बातचीत शुरू भी कर दी है. इसके साथ ही, सऊदी की दिग्गज तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) भी अलग से लेंडर्स के साथ संभावित फाइनेंसिंग पर चर्चा कर रही है.
ईरान युद्ध का बुरा असर
सऊदी यह कदम एक ऐसे समय में उठाने जा रहा है, जब ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच जंग और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर कई हमले हुए. ऊपर से लाल सागर में हूती विद्रोहियों के खतरे की वजह से शिपिंग रूट पर भी रुकावट आई है. इस दरमियान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने से कच्चे तेल का निर्यात पश्चिमी तट से होकर करना पड़ रहा है, जिसमें खर्च ज्यादा बैठ रहा है. इन्हीं सबके चलते साल 2026 की दूसरी तिमाही में सऊदी अरब का ऑयल सेक्टर महज 25% पर सिमटकर रह गया है. यह कोरोना महामारी के बाद दूसरी सबसे बड़ी गिरावट है.
नुकसान में सऊदी का ऑयल सेक्टर
बेशक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से सऊदी को कुछ हद तक राहत मिली है, लेकिन चूंकि तेल का निर्यात पहले जिस हिसाब से होता है, उसके मुकाबले इसकी मात्रा में गिरावट आई है इसलिए रेवेन्यू भी घटा है.
जुलाई 2026 में जारी वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 की दूसरी तिमाही में सऊदी अरब ने 34.3 अरब रियाल (लगभग 9.1 अरब डॉलर) का बजट घाटा दर्ज किया है. हालांकि यह घाटा पहली तिमाही (33.5 अरब डॉलर) के मुकाबले कम है, फिर भी 2026 के लिए अनुमानित 44 अरब डॉलर के कुल वार्षिक घाटे की भरपाई के लिए सरकार को बाजार और बैंकों से बड़े पैमाने पर ऋण उठाना पड़ रहा है.
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