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Pollution बन सकता है मेडिकल इमरजेंसी की वजह, कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस ही आएगा काम

त्‍योहारी सीजन के बाद प्रदूषण में जबरदस्‍त बढ़ोतरी होती है जिससे स्‍वास्‍थ्‍य प्रभावित होता है. ऐसे में जरूरी है कि आपके पास कॉम्प्रिहेंसिव हेल्‍थ इंश्‍योरेंस हो जो मेडिकल के खर्चों को कवर कर सके.

हर साल त्योहारी सीजन के बाद वायु गुणवत्‍ता सूचकांक (AQI) के स्तर में तेजी से वृद्धि होती है. खासकर अगर एनसीआर की बात करें तो इंडेक्स 400-500 के बीच पहुंच जाता है. प्रदूषण के बढ़ते स्तर की वजह से सभी उम्र के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बढ़ते प्रदूषण के इन दुष्‍प्रभावों से बचना लगभग असंभव है. इसलिए बच्चों और बुजुर्गों को खासतौर पर घर के अंदर रहना, मास्क पहनना और एयर प्यूरीफायर लगाने जैसी सावधानियों को बरतने की आवश्यकता होती है.
पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के हेड- हेल्थ इंश्योरेंस अमित छाबड़ा कहते हैं कि प्रदूषण के गंभीर स्तर की वजह से आंखों में जलन, सांस फूलना, गले में खुजली जैसी कई परेशानियों का लोगों को सामना करना पड़ रहा है. फेफड़ों के रोग, हृदय रोग प्रदूषित हवा में सांस लेने के वजह से सांस संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही है. ऐसे किसी भी मेडिकल इमरजेंसी का सामने आना आम बात है, इसलिए इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदते वक्त एक ऐसी पॉलिसी खरीदने की आवश्यकता है जो आपको किसी भी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में पर्याप्त रूप से कवर प्रदान करती हो. आइए, जानते हैं कि आप अपने हेल्‍थ इश्‍योरेंस को कॉम्प्रिहेंसिव कैसे बना सकते हैं. 

हाई इंश्योरेंस वैल्‍यू

दूषित हवा में सांस लेने से सांस संबंधी बीमारियां जैसे लंग्‍स डिजीज, ब्रोन्कियल अस्थमा जैसी क्रॉनिक बीमारियां हो सकती हैं. ज्यादा गंभीर मामलों में, लंबे समय तक जहरीली हवा के संपर्क में रहने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसी गंभीर बीमारियों का इलाज का खर्च 30 से 40 लाख रुपये तक कहीं भी हो सकता है. यह इंश्योरेंस न होने या अपर्याप्त इंश्योरेंस वैल्यू के मामले में भारी वित्तीय बोझ का कारण बन सकता है. इसलिए, महंगे अस्पताल में भर्ती होने और इलाज के खर्च से बचने के लिए पर्याप्त राशि का चुनाव करना उचित है. उदाहरण के लिए, 1 करोड़ रुपये के कवरेज की पेशकश करने वाली पॉलिसी 1100- 1200 रुपये के किफायती मंथली प्रीमियम पर आती है, लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में पूर्ण सुरक्षा प्रदान करती है.

ओपीडी कवरेज

सभी हेल्थकेयर खर्चों में ओपीडी या आउट पेशेंट विभाग का हिस्‍सा लगभग 70% होता है. ज्यादातर समय, प्रदूषित हवा से होने वाली बीमारियों को ट्रिगर कर सकती है जिसके लिए केवल ओपीडी देखभाल की आवश्यकता होती है. हालांकि इनमें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होगी, फिर भी वे नियमित डॉक्‍टर की एडवाइस, दवाईयों का खर्च, या डे-केयर उपचार की आवश्यकता के कारण किसी के भी बजट को बिगाड़ सकते हैं. इसलिए ओपीडी को कवर करने वाला प्लान चुनना आपको ऐसे खर्चों की परेशानियों से बचाएगा.

ऐड-ऑन कवर

छाबड़ा कहते हैं कि बेसिक कवरेज के अलावा, एक हेल्थ पॉलिसी में गंभीर बीमारी, अस्पताल में दैनिक नकद, कंज्यूमेबल्स कवर, पर्सनल एक्सिडेंट कवर आदि जैसे राइडर्स भी शामिल हैं. थोड़े से अतिरिक्त प्रीमियम पर, ये राइडर्स या ऐड-ऑन सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में उचित इलाज मिले. चूंकि प्रदूषण व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है, इसलिए ये राइडर्स आपको किसी भी बड़े मेडिकल खर्च से प्रभावी रूप से बचा सकते है. 

पूरे परिवार को कवर

प्रतिदिन बढ़ता हुआ प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है. इसलिए किसी भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी को परिवार की आवश्कताओं को भी ध्यान में ऱखकर खरीदना चाहिए. उदाहरण के लिए, पति, पत्नी और दो बच्चों वाले परिवार को फ्लोटर प्लान का विकल्प चुनना चाहिए. हालांकि, बड़े हो चुके परिवार, कामकाजी बच्चों के साथ बुजुर्ग माता-पिता को अलग-अलग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी और सीनियर सिटीजन पॉलिसी का विकल्प चुनना चाहिए.

रिस्टोरेशन बेनिफिट

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अब रिस्टोरेशन बेनिफिट के साथ आती हैं. उदाहरण के तौर पर अगर आपकी पॉलिसी 10 लाख रुपये की है और पूरा पैसा खर्च भी हो गया तो दोबार यह 10 लाख रुपये के खर्च को कवर करेगी. अगर पॉलिसीधारक इस बेनेफिट के ऑप्शन को चुनता है और पॉलिसी अवधि के दौरान पूरी इंश्योरेंस राशि का उपयोग कर लेता है, तो बीमित राशि अपने आप ही बहाल हो जाएगी और बढ़ते हुए मेडिकल खर्चों के खिलाफ वित्तीय रूप से सुरक्षित रहेगी.

 

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