'जब पुराना जाएगा, तभी तो नया आएगा...', AI के प्रभाव और नौकरियों में छंटनी पर बोले PayTM चीफ
पेटीएम चीफ ने आगे कहा, "जवाब है हां, ये तो प्रकृति का नियम है. हां वत्स, जब तक पुराना नहीं जाएगा, नया नहीं आएगा. ये तो भगवान कृष्णा ने गीता में भी कहा है. ये अपरिहार्य है. वर्तमान नौकरियों को जाना होगा, तभी नई नौकरियां पैदा होंगी."

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से भविष्य में कई तरह के बदलाव की आहट है. ऐसे में पेटीएम के फाउंटर और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने कहा कि टेक्नोलॉजी के साथ नौकिरयों पर खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. टाइम्स नाऊ समिट में उन्होंने कहा कि ये किसी से छिपा नहीं है. आज हम एसटीडी-पीसीओ बूथ नहीं देख रहे हैं, क्योंकि वो काम अब बदल चुका है, जॉब्स बदल गई हैं.
पेन्टर्स और पोस्टर बनानेवाली कंपनियां भी बदल गई और अब धीरे-धीरे ये नहीं रहीं. इस तरह की कई नौकरियां बदल गई और हमने उसे महसूस तक नहीं किया. अब आप ये मान रहे हैं कि कुछ नौकरियां चली जाएंगी.
पेटीएम चीफ ने आगे कहा, "जवाब है हां, ये तो प्रकृति का नियम है. हां वत्स, जब तक पुराना नहीं जाएगा, नया नहीं आएगा. ये तो भगवान कृष्णा ने गीता में भी कहा है. ये अपरिहार्य है. वर्तमान नौकरियों को जाना होगा, तभी नई नौकरियां पैदा होंगी."
उन्होंने आगे कहा- "हम प्रौद्योगिकी और क्षमता के अपने वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के हिस्से के रूप में, भारत की प्रतिभा के बल पर इस रेस में शामिल हैं. हमें खुशी है कि हम AI के इस रेस का हिस्सा हैं..."
गौरतलब है कि एआई के आविष्कार के बाद कई तरह की कयासबाजी हुई और चिंता जताई गई. हालांकि, एक्सपर्ट ये जरूर कह रहे हैं कि इसके अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ते इस्तेमाल से हर क्षेत्र में बदलाव देखने को मिलेगा.
एआई के आने से न सिर्फ पुरानी लीक पर चलने वाली कंपनियों में एक तरह से घबराहट देखी जा सकती है, इससे हर तरह से कारोबा में आमूल-चूल बदलाव की उम्मीद की जा रही है. हालांकि, जरूर भारतीय आटी उद्योग का कहना है कि आटी से जितने रोजगार घटंगे, उससे उतने ही आगे रोजगार ज्यादा पैदा होंगे. उनका कहना है कि ये कुछ समय के लिए तकलीफदेह जरूर होगा, लेकिन आगे जाकर नए कारोबारी मॉडल के तौर पर विकसित होगा.
ये भी पढ़ें: टॉयलेट के पानी से सालाना 300 करोड़ रुपये की कमाई? नितिन गडकरी ने बताया कैसे संभव हुआ
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















