भारत का एक फैसला और खत्म हो सकता है रेसिप्रोकल टैरिफ, अमेरिका में मौजूद हैं पीयूष गोयल
Donald Trump Reciprocal Tariff: डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब होता है, सामने वाला देश अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर जितना टैरिफ लगाएगा, अमेरिका भी उस देश से आयातित सामानों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल इन दिनों अमेरिका के दौरे पर हैं. उनका यह दौरा ऐसे समय में काफी अहम माना जा रहा है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के जॉइंट सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत हमसे 100 फीसदी से ज्यादा टैरिफ वसूलता है तो हम भी अगले महीने से ऐसा ही करने जा रहे हैं.
इसके अलावा, उन्होंने ये भी कहा कि दोस्त हो या दुश्मन सभी पर रेसिप्रोकल टैरिफ लागू होगा. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत 2 अप्रैल से पहले इस स्थिति को संभाल सकता है और डोनाल्ड ट्रंप सरकार को मना सकता है कि वह भारत पर रेसिप्रोकल टैरिफ ना लगाएं.
भारत अमेरिका के किन प्रोडक्ट पर लगाता है सबसे ज्यादा टैरिफ
भारत ने अमेरिका से आयातित कुछ उत्पादों पर हाई टैरिफ लगाया है, लेकिन हाल के वर्षों में कई उत्पादों पर टैरिफ में कटौती की गई है. यहां कुछ उत्पादों की लिस्ट है जिन पर पहले हाई टैरिफ था, लेकिन बाद में भारत की ओर से इनके टैरिफ में कटौती की गई.
बोरबॉन व्हिस्की: पहले 150 फीसदी से घटाकर 100 फीसदी और फिर 70 फीसदी कर दिया गया है.
हाई-एंड मोटरसाइकिलें: पहले 50 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी कर दिया गया है.
लक्जरी कारें: पहले 125 फीसदी से घटाकर 100 फीसदी और फिर 70 फीसदी तक की दरें कर दी गईं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ऑटो सेक्टर में अमेरिकी उत्पादों पर हाई टैरिफ लगाता है, जो कभी-कभी 100 फीसदी से अधिक हो जाती हैं. हालांकि, मौजूदा समय की बात करें तो इस समय कोई भी अमेरिकी उत्पाद 100 फीसदी से अधिक टैरिफ के अधीन नहीं है. भारत ने कई उत्पादों पर टैरिफ में कटौती की है ताकि रेसिप्रोकल टैरिफ से बचा जा सके.
अमेरिका कितना टैरिफ लगाता है
अमेरिका भारत से आयातित उत्पादों पर अलग-अलग दरों पर टैरिफ लगाता है, लेकिन ये दरें आम तौर पर कम होती हैं. भारत के प्रमुख निर्यात जैसे औद्योगिक मशीनरी, हीरे और आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, ईंधन, लोहा और स्टील, कपड़े, गाड़ियां और केमिकल्स पर अमेरिकी टैरिफ दरें आमतौर पर 2.72 फीसदी से 3.83 फीसदी के बीच होती हैं. लेकिन, अब यानी 2 अप्रैल से इन सभी चीजों पर टैरिफ बढ़ सकता है.
कैसे खत्म हो सकता है रेसिप्रोकल टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ का मतलब होता है, सामने वाला देश अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर जितना टैरिफ लगाएगा, अमेरिका भी उस देश से आयातित सामानों पर उतना ही टैरिफ लगाएगा. यानी अगर भारत अमेरिकी प्रोडक्ट पर टैरिफ खत्म कर दे या कम कर दे तो अमेरिका भी भारतीय प्रोडक्ट पर टैरिफ खत्म कर देगा या कम कर देगा. हालांकि, इससे भारत जैसे विकासशील देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है.
रेसिप्रोकल टैरिफ भारत को कितना नुकसान पहुंचाएगा
अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ से भारत को होने वाले आर्थिक नुकसान का अनुमान अलग-अलग रिसर्च में अलग-अलग है. जैसे- गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ के कारण भारत की GDP वृद्धि 0.1 से 0.6 प्रतिशत अंक तक प्रभावित हो सकती है. यह प्रभाव अमेरिकी टैरिफ की दर और भारत के निर्यात पर निर्भर करेगा. वहीं, इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) के अनुमान के अनुसार, भारत का अमेरिका को निर्यात FY26 में 2 बिलियन डॉलर से 7 बिलियन डॉलर तक कम हो सकता है. इससे भारत की GDP वृद्धि 5 से 20 बेसिस पॉइंट तक प्रभावित हो सकती है. वहीं, अमेरिकी टैरिफ से भारत के फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर पर विशेष रूप से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे निर्यात में कमी और घरेलू उद्योगों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं.
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Source: IOCL






















