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IT Portal: अनक्लेम्ड शेयरों और डिविडेंड में फंसे हजारों करोड़ रुपये, मदद के लिए तैयार है आईटी पोर्टल

IT Portal For Unclaimed Shares: शेयरों के डिविडेंड के बारे में जब कोई 7 सालों तक खोज-खबर नहीं लेता या दावा नहीं करता, तो उनको अनक्लेम्ड सस्पेंस खाते में और उसके बाद आईईपीएफ खाते में भेज दिया जाता है.

New IT Portal: सालों से अनक्लेम्ड पड़े शेयरों और डिविडेंडपर उनके निवेशकों या कानूनी उत्तराधिकारियों को फिर से दावेदारी करने में मदद करने के लिए सरकार ने अपने कदम बढ़ाए हैं. वित्त मंत्री ने केंद्रीय बजट 2023 के दौरान घोषणा की कि सरकार निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष (आईईपीएफ) प्राधिकरण के लिए एक इंटीग्रेटेड आईटी पोर्टल स्थापित करेगी. नए पोर्टल की घोषणा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से निवेशकों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, उनके लिए अपने अनक्लेम्ड शेयरों या डिविडेंड पर फिर से दावा करने की प्रक्रिया आसान होगी. इस पोर्टल के जरिए समग्र वित्तीय क्षेत्र को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाया जा सकेगा.

क्या होते हैं अनक्लेम्ड शेयर और डिविडेंड?

शेयर मार्केट की दुनिया में कुछ कंपनियां हैं जो अपने शेयरधारकों को समय-समय पर अपने मुनाफे में से हिस्सा देती हैं. मुनाफे के रूप में मिलने वाला यही हिस्सा डिविडेंड कहलाता है. अनक्लेम्ड डिविडेंड से मतलब है कि कंपनी ने तो डिविडेंड का भुगतान कर दिया है लेकिन शेयरधारकों द्वारा इसका दावा किया जाना अभी बाकी है. यह कई कारणों से हो सकता है, मसलन, शेयरधारक ने कंपनी के रिकॉर्ड में अपना पता अपडेट नहीं किया और डिविडेंड उसे मिल नहीं पाया या कंपनी के रिकॉर्ड में बैंक खाता अपडेट नहीं किया गया हो या फिर  शेयरधारककी मौत हो गई हो. इसके अलावा रिकार्ड में मौजूद नाम से मिलान न हो पाना जैसे कई अन्य कारण भी होते हैं.

शेयरों के डिविडेंड के बारे में जब कोई सात सालों तक खोज-खबर नहीं लेता या दावा नहीं करता, तो शेयरों को अनक्लेम्ड सस्पेंस खाते में और उसके बाद आईईपीएफ खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता है. यह कई कारणों से भी हो सकता है जैसे पता बदल जाना, निवेशक का विदेश चले जाना, निवेशक की मौत, शेयर प्रमाणपत्रों का खो जाना या फिर नाम के मेल न खाने की समस्या. 

इंवेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (आईईपीएफ)

निवेशकों के बीच उनके अनक्लेम्डडिविडेंड और शेयरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सरकार ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के तहत 2016 में निवेशक शिक्षा और संरक्षण कोष (इंवेस्टरएजुकेशन एंड प्रोटेक्शनफंड) की अवधारणा तैयार की थी. सरकार का प्राथमिक उद्देश्य अनक्लेम्ड शेयरों के दुरुपयोग को रोकना और शेयरधारकों के हितों को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करना था.

दिलचस्प बात ये है कि सूचीबद्ध कंपनियों के 5685 करोड़ रुपये के अनक्लेम्डडिविडेंड सामने आए हैं, जिनका कोई पूछनहार या दावेदार नहीं था. इसी तरह से 117 करोड़ अनक्लेमड शेयरों को आईईपीएफमें स्थानांतरित कर दिया गया है. वर्तमान बाजार मूल्यों के अनुसार आज इनकी कीमत लगभग 50,000 करोड़ रुपये के आस-पास होगी.

मौजूदा समय में, आईईपीएफ में पड़े शेयरों और डिविडेंड को पाने के लिए दावेदारों को आईईपीएफ फॉर्म-5 भरकर ऑनलाइन क्लेम करना होता है. उसके बाद संबंधित कंपनी के नोडल अधिकारी को दस्तावेजों की हार्ड कॉपी जमा करनी होती है. इस पूरी प्रक्रिया में कंपनी, इसके रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) और आईईपीएफ प्राधिकरण के साथ फॉलोअप करना जरूरी होता है. लेकिन मुश्किल ये हैं कि दावेदारों को इस प्रक्रिया और दस्तावेज़ीकरण के बारे में या तो स्पष्ट या फिर न के बराबर जानकारी होती है. इसके अलावा कई पार्टियों से निपटने और अपने दावे को ट्रैक करने के लिए भी उनके पास कोई एकल मंच नहीं होता है, जिसकी वजह से उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. प्रक्रिया को आसान बनाने के लिएआईईपीएफ अथॉरिटी ने हाल ही में सभी हितधारकों से प्रतिक्रिया और सुझाव लेने के लिए "आईईपीएफ प्राधिकरण में रिफंड प्रक्रिया पर परामर्श पत्र" पेश किया और आईईपीएफ के लिए एक इंटिग्रेटिड आईटी पोर्टल का भी प्रस्ताव रखा.

आईईपीएफ के लिए इंटीग्रेटेड आईटी पोर्टल

इस इंटिग्रेटिड आईटी पोर्टल स्थापित करने के लिए सरकार के इस कदम से अनक्लेम्ड शेयरों और अनपेडडिविडेंड पर फिर से क्लेम करने की प्रक्रिया में और आसानी हो जाएगी. जिन शेयरधारकों ने पिछले सात सालों से अपने डिविडेंड या शेयरों की खोज-खबर नहीं ली है या फिर क्लेम नहीं किया है, वे सभी अब आईईपीएफ आईटी पोर्टल पर जाकर देख सकते हैं कि उनके अनक्लेम्ड शेयरों को आईईपीएफ में स्थानांतरित किया गया है या नहीं. इसके बाद वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए सीधे पोर्टल के माध्यम से अपने शेयर या डिविडेंड पर दावा कर सकते हैं. यह निवेशकों को उनके दावे की वास्तविक समय की स्थिति की जांच करने और कंपनियों को सरकार द्वारा उठाई गई किसी भी विसंगती से निपटने में सक्षम बनाएगा. इसके अलावा, इस बात की भी संभावना है कि एक निश्चित मूल्य से कम के दावों को सीधी प्रक्रिया के जरिए अप्रूव कर दिया जाए.

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नोटः इस लेख के लेखक जीएलसीवेल्थ के को-फाउंडर संचित गर्ग हैं और प्रकाशित विचार उनके निजी हैं.

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