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समझदारी भरा निवेश, डाइवर्सिफिकेशन अपनाकर ऐसे घटाएं जोखिम और बढ़ाएं रिटर्न; जानिए इसके टिप्स

निवेश करते समय समझदारी इसी में मानी जाती है कि जोखिम को फैलाकर रखा जाए, ताकि किसी एक विकल्प में उतार-चढ़ाव का असर पूरी बचत पर न पड़े. यही सोच डाइवर्सिफिकेशन की नींव बनाती है....

Portfolio Diversification Strategy: निवेश करते समय समझदारी इसी में मानी जाती है कि जोखिम को फैलाकर रखा जाए, ताकि किसी एक विकल्प में उतार-चढ़ाव का असर पूरी बचत पर न पड़े. यही सोच डाइवर्सिफिकेशन की नींव बनाती है, जिसमें पैसा अलग-अलग एसेट या साधनों में बांटकर लगाया जाता है. यह फॉर्मूला भले ही आसान लगता है, लेकिन फिर भी बहुत से निवेशक अपनी बचत को कुछ सीमित विकल्पों में ही बांट कर रख देते हैं.

ऐसा करने से जोखिम बढ़ जाता है. डाइवर्सिफिकेशन को समझना और अपनाना लंबे समय की वित्तीय योजना को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है. आइए जानते हैं, आखिर इस फॉर्मूले का इस्तेमाल करके आप कैसे अपनी निवेश की पोर्टफोलियो बना सकते हैं....

अलग-अलग एसेट्स की चाल में अंतर

निवेश के विभिन्न विकल्प की रफ्तार और जोखिम अलग-अलग होती है. समय-समय पर इसमें बदलाव भी आता रहता है. उदाहरण के लिए शेयर, बॉन्ड, सोना, रियल एस्टेट और अन्य विकल्प विभिन्न परिस्थितियों में अलग प्रदर्शन करते हैं. 

कई बार किसी एक एसेट में कमजोरी दिखती है तो दूसरा विकल्प स्थिर रह सकता है या बेहतर रिटर्न भी दे सकता है. जिससे निवेशक के कुल निवेश पर दबाव कम पड़ता है. यही कारण है कि अलग-अलग एसेट्स को पोर्टफोलियो में शामिल करने से खतरे का घाटा कम होता है. साथ ही अच्छे रिटर्न की संभावना बनी रहती है. 

उम्र के हिसाब से बनाएं अपनी प्लानिंग

निवेश करते समय आपकी उम्र भी बहुत मायने रखती है. अगर कोई निवेशक युवा है तो, शुरुआती दौर में ज्यादा ग्रोथ वाले विकल्प का चुनाव कर सकता हैं. जैसे-जैसे जिम्मेदारियां और उम्र बढ़ती है, अपने निवेश को सुरक्षित विकल्प पर शिफ्ट किया जा सकता है.

क्योंकि जीवन के इस पड़ाव में बच्चों की शिक्षा, मेडिकल इमरजेंसी और कई तरह की जिम्मेदारियां सिर पर आ जाती है. ऐसे में ज्यादा रिस्क लेने से बचने की सलाह दी जाती है. अपनी आयु के हिसाब से निवेश पैटर्न में बदलाव करना एक समझदारी भरा फैसला होता है. 

डाइवर्सिफिकेशन बनाए रखने के लिए अपनाएं ये टिप्स

डाइवर्सिफिकेशन को बनाए रखने के लिए कुछ आसान आदतें मददगार हो सकती हैं. सबसे पहले अपने सभी निवेशों को एक जगह लिखकर यह समझें कि कहीं आपकी अधिकांश रकम किसी एक ही विकल्प में तो  नहीं लगी है. इसके बाद अपनी उम्र और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग एसेट्स के लिए एक अनुमान लगाए.

मंथली या तिमाही निवेश के जरिए धीरे-धीरे संतुलन की दिशा में आगे बढ़ें. साथ ही, साल में कम से कम एक बार पोर्टफोलियो जरूर चेक करें. ताकि यदि कोई एसेट जरूरत से ज्यादा बढ़ गया हो तो रीबैलेंस कर संतुलन फिर से कायम किया जा सके.

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)

यह भी पढ़ें: महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी की चर्चा तेज; केंद्रीय कर्मचारियों की नजर सरकार पर, जानिए क्या हो सकता है फैसला?

 

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