Marine Insurance: पश्चिम एशिया की जंग के बीच भारत का बड़ा फैसला! जहाजों के लिए देसी insurance शुरू
Marine Insurance: मिडिल ईस्ट के बीच जंग के चलते समुद्री बीमा का खर्च बढ़ गया है. जिसे देखते हुए अब सरकार देसी इंश्योरेंस लेकर आई है. भारतीय जहाजों के लिए पहली बार सरकारी P&I पॉलिसी शुरू करने वाली है.

Marine Insurance: पश्चिम एशिया में जंग छिड़ी तो असर सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों पर नहीं पड़ा. समुद्र के रास्ते कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों का बीमा खर्च भी तेजी से बढ़ गया. युद्ध वाले इलाकों में जहाज भेजने पर विदेशी बीमा कंपनियों ने वॉर रिस्क प्रीमियम कई गुना बढ़ा दिया. कुछ मामलों में बीमा कवर देने से भी इनकार होने लगा. इससे भारतीय शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ी और सप्लाई चेन पर भी दबाव आया.
इसी चुनौती से निपटने के लिए सरकार अब देसी समाधान लेकर आई है. वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने गुरुवार को देश की पहली सरकारी गारंटी वाली P&I - Protection and Indemnity बीमा पॉलिसी लॉन्च की. यह भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल के तहत दी जाएगी और इसे न्यू इंडिया एश्योरेंस ने तैयार किया है.
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क्या होता है P&I बीमा?
आसान भाषा में समझें तो जहाज का बीमा और उस पर लदे सामान का बीमा अलग-अलग होता है. लेकिन अगर जहाज की वजह से किसी तीसरे पक्ष को नुकसान हो जाए तो उसका खर्च P&I बीमा उठाता है.
जैसे जहाज से तेल रिसकर समुद्र प्रदूषित हो जाए या जहाज डूब जाए और उसका मलबा हटाना पड़े, चालक दल के किसी सदस्य के साथ हादसा हो जाए या किसी दूसरे जहाज या बंदरगाह को नुकसान पहुंच जाए.
ऐसे मामलों का खर्च इसी बीमा से कवर होता है. अब तक भारतीय जहाज मालिक इसके लिए ज्यादातर विदेशी बीमा क्लबों पर निर्भर थे.
जंग ने क्यों बढ़ा दी थी परेशानी?
पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बाद विदेशी बीमा कंपनियों ने वॉर रिस्क प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी कर दी यानी उसी जहाज और उसी सामान के लिए भारतीय कंपनियों को पहले से कहीं ज्यादा बीमा प्रीमियम देना पड़ रहा था.
सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर विदेशी कंपनियां बीमा कवर देने से मना कर दें तो जहाज कई बंदरगाहों पर फंस सकते हैं क्योंकि बिना बीमा के जहाजों को प्रवेश नहीं मिलता. इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने 12 मई 2026 को भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल शुरू किया था. अब इसी के तहत पहली सरकारी P&I पॉलिसी जारी की गई है.
सरकार का दावा- बीमा खर्च में आई बड़ी कमी
सरकार का कहना है कि BMIP शुरू होने के बाद वॉर रिस्क प्रीमियम में करीब 35 से 40 फीसदी तक कमी आई है. हालांकि सरकार ने यह नहीं बताया कि पहले और अब प्रीमियम की वास्तविक दरें क्या हैं.
29 जुलाई 2026 तक इस पूल के तहत 1,608 पॉलिसियां जारी की जा चुकी हैं जिनमें कार्गो वॉर रिस्क और जहाज वॉर रिस्क कवर शामिल हैं.
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पहली पॉलिसी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को
देश की पहली सरकारी P&I पॉलिसी शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया - SCI को दी गई. इस पॉलिसी में चालक दल और कार्गो से जुड़ी देनदारी, समुद्री प्रदूषण का खर्च, डूबे जहाज का मलबा हटाने का खर्च और दुनिया भर के बंदरगाहों पर 24 घंटे सहायता देने वाला पोर्ट कॉरस्पॉन्डेंट नेटवर्क शामिल है. सरकार के मुताबिक इस कवर की अधिकतम सीमा 1.5 अरब डॉलर तक है.
आम लोगों पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा समुद्र के रास्ते मंगाता है. तेल, खाद, दाल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई जरूरी सामान जहाजों से आते हैं. जब जहाज का बीमा महंगा होता है तो उसका असर सामान की कीमतों पर भी पड़ता है.
सरकार का कहना है कि देसी बीमा व्यवस्था से लागत कम होगी, विदेशी कंपनियों पर निर्भरता घटेगी और समुद्री बीमा का पैसा देश में ही रहेगा.
























