Income Tax Refunds Complaint: आकलन वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिफंड में देरी और बढ़ती शिकायतों के बीच आयकर विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि कई करदाताओं द्वारा अपने इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) में ऐसे डिडक्शन और छूट का दावा किया गया है, जिनके वे पात्र नहीं हैं, इसी वजह से उनके रिफंड अटक गए हैं. विभाग के अनुसार, जिन मामलों में डिडक्शन या रिफंड की राशि 50 हजार रुपये से अधिक है, उनकी गहन जांच की जा रही है ताकि गलत दावों को रोका जा सके और केवल वैध रिफंड ही जारी हों.
क्यों फंसे लोगों के रिफंड?
आयकर विभाग ने ऐसे करदाताओं को एसएमएस और ईमेल के जरिए सूचित कर दिया है और उनसे 31 दिसंबर तक रिवाइज्ड आईटीआर फाइल करने को कहा गया है, ताकि वे अपने रिटर्न की दोबारा समीक्षा कर सकें और गलत या अपात्र दावों को सुधार सकें. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन टैक्सपेयर्स के रिफंड सही पाए जाएंगे, उनके खाते में अगले 10 दिनों के भीतर राशि आ सकती है.
विभाग ने यह भी सलाह दी है कि करदाता अपने आईटीआर में किए गए सभी डिडक्शन और छूट के दावों की वैधता स्वयं जांच लें, ताकि भविष्य में अतिरिक्त पूछताछ या नोटिस से बचा जा सके. गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर कई टैक्सपेयर्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने शिकायत की है कि उनके रिफंड रुके हुए हैं और उन्हें विभाग की ओर से किसी तरह की सूचना नहीं मिली.
टैक्सपेयर्स की बढ़ती शिकायतें
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक अप्रैल से 17 दिसंबर के बीच पिछले साल की तुलना में इस बार रिफंड की राशि 13.52 प्रतिशत कम रही है, जबकि आकलन वर्ष 2025-26 के लिए अब तक 15 लाख से ज्यादा रिवाइज्ड आईटीआर फाइल किए जा चुके हैं.
इसके अलावा, आकलन वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच करीब 21 लाख टैक्सपेयर्स अपने रिटर्न अपडेट कर चुके हैं और चालू वित्त वर्ष में अब तक 2,500 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स जमा किया जा चुका है, जिससे साफ है कि विभाग गलत दावों पर सख्ती के साथ-साथ सही रिफंड को समय पर जारी करने की कोशिश कर रहा है.
























