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कश्मीर में 'सपोले आतंकी' के पलने की क्या है पूरी कहानी, कहां से आते हैं पैसे? नाग की इकॉनोमी का पूरा राज

Jammu Kashmir Terrorist Economy: सरकार समय-समय पर इनकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए एक्शन लेती रहती है. ऐसे में जरूरत है इस वक्त और कड़े कदम उठाने की ताकि पूरी तरह से इन आतंकियों की गतिविधियों पर ब्रेक लग सके.

Jammu Kashmir Terrorist Economy: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में भारतीय पर्यटकों पर बड़ा हमला किया गया, जिसमें 26 बेगुनाहों की मौत हो गई. इस आतंकी घटना ने पूरे देश को बुरी तरह से झकझोर कर रख दिया है. कश्मीर की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इन्हीं पर्यटकों पर टिकी है और अब तक ऐसे बहुत ही कम मामले आए जब पर्यटकों को ऐसे निशाना बनाया गया हो. ऐसे में जिस तरह की आतंकियों ने कायराना हरकतें की है, उसने ये सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब इसके खात्मे के लिए कुछ और कड़े कदम उठाने की जरूरत है.

भारत सरकार की तरफ से लगातर पहलगाम मामले पर मंथन किया जा रहा है. देश से जवाब देने की पुरजोर मांगें हो रही है. इन सबके बीच आखिर ये सवाल उठता है कि जो कश्मीर में ये सपोले आतंकी पल रहे हैं, उसके लिए पैसा कहां से आता है?  कौन इन्हें पैसे देता है और किसी तरह का इनका नेटवर्क और इकॉनोमी है? 

सपोले आतंकी की कितनी बड़ी इकॉनोमी?

दरअसल, कश्मीर में इस वक्त कई तरह के पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं, जैसे- लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीआरएस. इन्हें न सिर्फ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का पूरा समर्थन हासिल है बल्कि ये आतंकी संगठन ड्रग्स तस्करी जैसे कारोबार में संलिप्त हैं. ये अफीम, हेरोइन-चरस और अन्य सभी तरह के ड्रग्स की सप्लाई करते हैं और उनसे आए पैसे से भारत के खिलाफ साजिशें रचते हैं. 

इन आतंकी संगठनों की नकली करेंसी के कारोबार में भी संलिप्तता सामने आती रही है. सपोले आतंकियों के लिए पाकिस्तान में कई ऐसे संगठन है जो न सिर्फ चैरिटेबल संगठनों के नाम पर पैसा इकट्ठा कर इन्हें पालते हैं बल्कि कश्मीर के भोले-भोले और बेरोजगार युवाओं को भड़काकर उसे भारत के खिलाफ दिमाग में जहक भरते हैं. इन कश्मीर भोले-भाले युवाओं को वे सीमा पार लेकर जाते हैं और जब पूरी तरह से उनका ब्रेन वॉश हो जाता है, उसके बाद वे उन्हें फिदायीन बनाकर भारत के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं.

वसूली का भी धंधा

इतना ही नहीं, इन आतंकियों की अर्थव्यवस्था में एक धंधा भी है और वो है वसूली का. इसके अलावा, पाकिस्तान का साथ ही कुछ अन्य देश भी है जो इन आतंकियों को समर्थन कर उन्हें फंडिंग करते हैं. इन्हें हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा भेजा जाता है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि भारत सरकार इन सभी चीजें से अनभिज्ञ है. 

सरकार समय-समय पर इनकी आर्थिक कमर तोड़ने के लिए एक्शन लेती रहती है. ऐसे में जरूरत है इस वक्त और कड़े कदम उठाने की ताकि पूरी तरह से इन आतंकियों की गतिविधियों पर ब्रेक लग सके. नहीं तो फिर इसी तरह से भारत के अंदर बेकसूर लोगों के खून बहाते रहेंगे.

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राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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