जीएसटी पेश किए जाने से राज्यों को होगा लाभ: आरबीआई

मुंबई: रिजर्व बैंक ने कहा है कि राज्यों का राजकोषीय घाटा 2016-17 में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया, लेकिन वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को देखते हुए कुल मिलाकर राजकोषीय स्थिति दीर्घकाल में टिकाउ है. केंद्रीय बैंक ने राज्यों के वित्त के लिहाज से वस्तु एवं सेवा कर को बड़ा सकारात्मक बताया है.
आरबीआई ने राज्यों के वित्त पर अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा, ‘‘हाल के साल में राज्यों के कर्ज का बोझ बढ़ने के बावजूद कुल मिलाकर राजकोषीय स्थिति को दीर्घकाल में टिकाउ पाया गया है.’’ संशोधित अनुमान में वित्त वर्ष 2016-17 में राज्यों का एकीकृत सकल राजकोषीय घाटा (जीएसएफडी) बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गया, जो बजट में 3 प्रतिशत रहने का अनुमान था.
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वित्त वर्ष 2015-16 में जीएसएफडी संशोधित अनुमान में 3.6 प्रतिशत रहा जबकि बजट में इसके 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था. राज्यों के राजकोषीय घाटे में वृद्धि का कारण उदय बांड का प्रभाव है. इसके तहत वित्तीय संकट में फंसी बिजली कंपनियों को उबारा गया है. आरबीआई के अनुसार उदय के प्रभाव को हटा दिया जाए तो जीएसएफडी 2.7 प्रतिशत होता.
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केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक एकीकृत जीएसएफडी वित्त वर्ष 2017-18 में घटकर 2.6 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है. रिपोर्ट के अनुसार 25 बड़े राज्यों के आंकड़ों का उपयोग कर यह आंकड़ा निकाला गया है. इसमें पंजाब और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों को शामिल नहीं किया गया है. केंद्रीय बैंक ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर पेश किया जाना राज्यों के लिये सबसे बड़ा लाभकारी है क्योंकि इससे उनका जीएसएफडी कम होने का अनुमान है.
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