देश की फ्यूल खपत में आई गिरावट, औद्योगिक गतिविधियों में गिरावट से चिंता
देश में औद्योगिक गतिविधियों और ट्रांसपोर्टेशन में कमी से फ्यूल डिमांड कम हो रही है जो चिंता का सबब बन सकती है. इसे बढ़ाने के लिए जल्द ही कुछ उपाय किए जाने की जरूरत है.

नई दिल्ली: भारत में फ्यूल की मांग में जुलाई महीने में गिरावट देखी गई है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में जुलाई महीने में फ्यूल मांग में 11.7 फीसदी की गिरावट आई है. जुलाई में फ्यूल खपत गिरकर 15.67 मिलियन टन पर आ गई है. यह एक साल पहले की समान अवधि में हुई 17.75 मिलियन टन खपत की अपेक्षा 11.7 फीसदी कम है.
लॉकडाउन में ढील दिये जाने के बाद मई और जून में फ्यूल खपत में सुधार हुआ. जुलाई महीने में इससे पिछले महीने की अपेक्षा फ्यूल खपत में 3.5 फीसदी की गिरावट आई है. जून 2020 में देश में 16.24 मिलियन टन फ्यूल खपत हुई थी.
जुलाई में हुई डीजल की खपत जून महीने में हुई खपत की तुलना में 6.3 मिलियन टन कम रही है. वहीं, पेट्रोल की मांग जुलाई महीने में एक साल पहले की तुलना में 10.3 फीसदी गिरकर 2.26 मिलियन टन रही है. साथ ही जुलाई में पेट्रोल की मांग में जून महीने की 2.28 मिलियन टन की खपत की तुलना में 0.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
फ्यूल खपत पर नजर रखना क्यों है जरूरी फ्यूल खपत से किसी भी देश की आर्थिक गतिविधियों की स्थिति के बारे में पता चलता है. देश की फ्यूल खपत में अप्रैल महीने में 45 फीसदीी की गिरावट आई थी जो कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के चलते देखी गई थी. औद्योगिक गतिविधियों और ट्रांसपोर्टेशन पर असर रहने के चलते अप्रैल में देश की फ्यूल खपत में बेतहाशा गिरावट आई थी.
Source: IOCL
























