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जेपी इंफ्राटेक के घर खरीदारों को दावा ठोकने के लिए 24 अगस्त तक का समय

दिवालिया होने की कगार पर पहुंची जेपी इंफ्राटेक की आवासीय परियोजनाओं में पैसा लगाने वालो को 24 अगस्त तक अपना दावा ठोकना होगा. ये आवासीय परियोजनाएं मुख्य रुप से दिल्ली से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे के दोनों ओर स्थित हैं.

नई दिल्लीः दिवालिया होने की कगार पर पहुंची जेपी इंफ्राटेक की आवासीय परियोजनाओं में पैसा लगाने वालो को 24 अगस्त तक अपना दावा ठोकना होगा. ये आवासीय परियोजनाएं मुख्य रुप से दिल्ली से सटे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे के दोनों ओर स्थित हैं. संसद से मंजूर हुए नए दिवालिया कानून के तहत जेपी इंफ्रा समेत 12 कंपनियोंके दिवालिया होने का खतरा है. वहीं जेपी के प्रोजेक्ट्स में फंसे घर खरीदारों के लिए ये समय बेहद मुश्किल है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दिवालिया समाधान प्रक्रिया शुरु करने का निर्देश दिया है. इसी फैसले के तहत बैंकों, कर्मचारियों और घर खऱीदने वाले समेत सभी पक्षों को अपना दावा पेश करना का मौका मिलेगा. दावों के लिए विभिन्न पक्षों के लिए अलग-अलग फॉर्म है. मसलन घर खरीदने वालों को फॉर्म बी भरना होगा, जबकि बैकों और वित्तीय संस्थाओं को फॉर्म सी और कर्मचारियों को फॉर्म डी भरना है. ये सभी फॉर्म www.ibbi.gov.in वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकते हैं. बैंक व वित्तीय संस्थाओं को केवल इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ही फॉर्म भरने का विकल्प है जबकि बाकी सभी व्यक्तिगत तौर पर, डाक के द्वारा या फिर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दावा पेश कर सकते हैं. इलेक्ट्रॉनिक तरीके से फॉर्म भेजने के लिए आप ईमेल आईडी IRPJIL@bsraffliates.com का इस्तेमाल कर सकते हैं जबकि व्यक्तिगत तौर पर या डाक से भजने का पता कुछ इस प्रकार है: ANUJ JAIN INTERIM RESOLUTION PROFESSIONAL FOR JAYPEE INFRATECH LIMITED C/o BSRR & Co. Cgartered Accountants Tower B, DLF Cyber City Phase II Gurugram – 122002 (Haryana) क्या है पूरा मामला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जेपी की आवासीय परियोजनाओं में पैसा लगाने वालों के लिए संकट खड़ा हो गया है. आईडीबीआई बैंक की याचिका पर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी ने जेपी समूह की अग्रणी कंपनी जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दिवालिया कानून (Bankruptcy and Insolvency Code) के तहत कार्यवाही शुरु करने का निर्देश दिया है. दिवालिया कानून के तहत कार्यवाही की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रोफेशनल की नियुक्ति की गयी है जबकि कंपनी के निदेशक बोर्ड को निलंबित कर दिया गया है. ये प्रोफेशनल, कंपनी प्रबंधन और बैंकों के साथ मिलकर कंपनी की वित्तीय स्थिति सुधारने और कर्ज चुकाने का रास्ता ढ़ुंढ़ने की कोशिश करेगा जिसमें शुरुआती तौर पर छह महीने का समय मिलेगा जिसे बाद में तीन महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है. इसके बाद भी अगर कंपनी की माली हालत नही सुधरी और कर्ज चुकाने का रास्ता नहीं निकला तो बैंक उसकी संपत्ति बेचने का काम शुरु कर सकते है. ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच के आदेश के मुताबिक, 526.11 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है. चूंकि ये एख लाख रुपये से कहीं ज्यादा है.इसीलिए आईडीबीआई बैंक ने बेंच के सामने दिवालियापन कानून के तहत कार्यवाही शुरु करने का प्रस्ताव किया. पहले जेपी समूह ने इस प्रस्ताव पर अपनी आफत्ति जतायी थी, लेकिन 4 अगस्त को उसने अपनी आपत्ति वापस ले ली. आपत्ति वापस लेने के पीछे कंपनी ने साफ किया कि वो तमाम बैंकों और उसकी परियोजनाओं में घर खरीदने वालों के हितों को देखते हुए ही उसने ये कदम उठाया. इसी के बाद इलाहाबाद बेंच ने अपना फैसला सुना दिया. फैसला 9 अगस्त से प्रभावी माना जाएगा. अब अगर इसमें ज्यादा से ज्यादा नौ महीने का समय जोड़ दे तो अप्रैल तक वित्तीय स्थिति सुधारने का समय है जिसके बाद संपत्तियो की नीलामी शुरु हो सकती है.

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