डीजल महंगा होने से सेब के दाम छुएंगे आसमान, वजह ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि कुछ और है
डीजल की कीमत बढ़ने का असर अब सेब की खेती पर भी पड़ सकता है. कई इलाकों में कीट नियंत्रण के लिए डीजल ऑयल इमल्शन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बागवानों की लागत बढ़ सकती है.

- सेब के पेड़ों की कीट नियंत्रण में डीजल का प्रयोग होता है।
- डीजल ऑयल इमल्शन सर्दियों में कीटों को खत्म करता है।
- किसानों को अब आधुनिक व सुरक्षित कीटनाशकों को अपनाना चाहिए।
- बढ़ी डीजल कीमतों से बागवानों की लागत में वृद्धि होगी।
Diesel Price Impact on Apple Farming: डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कुछ सेक्टरों तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. इसका असर अब बागवानी और खासतौर पर सेब की खेती पर भी देखने को मिल सकता है.
बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ इलाकों में सेब के पेड़ों की देखभाल और कीट नियंत्रण के लिए डीजल का इस्तेमाल पारंपरिक तरीके के तौर पर किया जाता रहा है. आज डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से बागवानों की लागत बढ़ने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है. आइए जानते हैं, इस विषय में विस्तार से.
सेब के पेड़ों में क्यों इस्तेमाल होता है डीजल?
सेब की खेती में डीजल का इस्तेमाल सीधे फलों पर छिड़काव के लिए नहीं किया जाता. इसे एक खास तरह के “डीजल ऑयल इमल्शन” के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसका इस्तेमाल सर्दियों के मौसम में पेड़ों पर किया जाता है.
इस स्प्रे का मुख्य उद्देश्य पेड़ों पर लगने वाले कीटों, खासकर सैन जोस स्केल जैसे खतरनाक कीड़ों को नियंत्रित करना होता है. स्प्रे पेड़ के तने और शाखाओं पर एक परत बना देता है, जिससे कीड़ों को हवा नहीं मिल पाती और वे खत्म हो जाते हैं.
कैसे तैयार किया जाता है यह मिश्रण?
इस बनाने के लिए डीजल को पानी और साबुन के साथ मिलाकर एक ऑयल-इन-वॉटर इमल्शन तैयार किया जाता है. आमतौर पर करीब 4.5 लीटर डीजल को साबुन और 54 से 72 लीटर पानी के साथ मिलाया जाता है. इसके बाद इसे पेड़ों की शाखाओं और तनों पर छिड़का जाता है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
यह तरीका काफी पुराना माना जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक इसका इस्तेमाल फलों के आने से काफी पहले किया जाता हैं. गलत समय या ज्यादा मात्रा में उपयोग करने पर यह पेड़ों को नुकसान भी पहुंचा सकता है.
अब आधुनिक विकल्पों को अपना रहे किसान
समय के साथ अब खेती में आधुनिक और ज्यादा सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल किया जा रहा है. कई किसान अब रिफाइंड एग्रीकल्चरल स्प्रे ऑयल का इस्तेमाल करते हैं. जिसे पारंपरिक डीजल मिश्रण की तुलना में ज्यादा प्रभावी और कम नुकसानदायक माना जाता है.
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