बजट 2019: अर्थव्यवस्था की चुनौतियों, निवेशकों के विश्वास को कैसे जीतेगी मोदी सरकार, क्या है प्लान
पिछले कुछ वक्त से देश को आर्थिक क्षेत्र में संकट सामना करना पड़ा है, जिसके कारण निवेशकों के मन में अविश्वास पैदा हो गया है. इस बजट में वित्त मंत्री फिर से निवेशकों की विश्वास बहाली के लिए कदम उठा सकती हैं.

नई दिल्ली: 5 जुलाई को आने वाले बजट को लेकर निवेशकों के साथ-साथ आम लोगों में भी चर्चा तेज हो गई है. पिछले कुछ वक्त से देश की घटती जीडीपी और कृषि से लेकर अलग-अलग क्षेत्रों के वित्तीय संकट की वजह से निवेशकों के माथे पर कुछ चिंता की लकीरें उभर आई हैं. इस बार के बजट में कुछ ऐसी वित्तीय समस्याएं हैं जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है.
आर्थिक क्षेत्र किसी भी अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन है. लेकिन आईएलएंडएफएस जैसे संकट का अभी तक हल नहीं हो पाने के कारण रियल एस्टेट और ऑटो सहित विभिन्न क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ा है. इन सब की वजह से निवेशकों के विश्वास पर असर पड़ा है. इस बार के बजट में एनपीए के मुद्दे, आईबीसी मामलों के तेजी से समाधान, बैंकों को अच्छी गुणवत्ता वाली एनबीएफसी संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहित करके विश्वास बहाली के लिए कदम उठाए जा सकते हैं.
रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ वक्त से लगातार गिरावट बनी हुई है, इंफ्रास्टक्चर सेक्टर में लंबित प्रोजेक्टिंग और भविष्य की योजनाओं के लिए, फंडिंग और उनके पर्फारमेंस में परीक्षण की जरूरत है, अब देखना होगा कि इस बजट में वित्त मंत्री इन्हें लेकर क्या रुख अख्तियार करती हैं. अगर इस बजट में इन्हें लेकर किसी तरह की सकारात्मक घोषणा की जाती है, तो इसका खुले दिल से स्वागत किया जाएगा.
ऑटोमोबाइल सेक्टर को गंभीर मंदी का सामना करना पड़ रहा है, कमजोर घरेलू मांग और नॉन बैंक व्हीकल फाइनेंसरों के कारण पैसों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. इसकी वजह से प्रमुख ऑटो निर्माताओं को उत्पादन में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. भारत में पैसेंजर व्हीकल की बिक्री ने मई में लगभग 18 साल में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की. इसके अलावा, सरकार के द्वारा ग्रीन ई-वाहनों को अपनाने में जल्दबाजी करना, इस क्षेत्र के लिए चुनौतियां हैं. अब इस बार बजट से उम्मीद है कि इस क्षेत्र में कुछ सकारात्मक घोषणाएं की जा सकती हैं.
वित्तीय वर्ष 2019 में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में गिरावट के कारण भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था तमगा खोना पड़ा था. अब मोदी सरकार 2.O पर इस मंदी को दूर करके भारतीय उद्योग धंधों को वापस पटरी पर लाने का दबाव है, इसके अलावा, सरकार को "मेक इन इंडिया" कार्यक्रम पर भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है. अब देखना दिलचस्प होगा की सरकार इसे लेकर क्या कदम उठाती है.
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Source: IOCL





















