कैफे में अब नहीं कर पाएंगे मीटिंग! 1 घंटे से ज्यादा समय पर लगेगा 1000 रु. प्रति घंटे एक्स्ट्रा चार्ज, नोटिस वायरल
एक यूजर शोभित बकलीवाल द्वारा रेस्टुरेंट के नोटिस की तस्वीर पोस्ट किए जाने के बाद कुछ ही मिनटों में हजारों व्यूज और प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कई लोग इस कदम को ग्राहकों के प्रति कठोर बताते हुए नाराज़गी जता रहे हैं.

Bengaluru Cafe No More Meeting: बेंगलुरु के कैफे और रेस्टुरेंट्स में लंबे समय तक बैठकर मीटिंग करने या दोस्तों के साथ घंटों बातचीत करने की आदत अब विवाद का कारण बन गई है. आईटी और स्टार्टअप हब माने जाने वाले इस शहर में कैफे अक्सर अनौपचारिक ऑफिस या मीटिंग स्पेस के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं, जहां लोग एक कप कॉफी के साथ लैपटॉप खोलकर घंटों बैठे रहते हैं.
इसी वजह से कई रेस्टुरेंट मालिकों को नुकसान झेलना पड़ता है, क्योंकि उनकी टेबल लंबे समय तक भरी रहती हैं, लेकिन ऑर्डर कम होते हैं या धीरे-धीरे दिए जाते हैं, जिससे नए ग्राहकों को जगह नहीं मिल पाती और वे वापस लौट जाते हैं. इस समस्या से निपटने के लिए कुछ लोकल रेस्टुरेंट्स ने नियम लागू किया है कि एक घंटे से ज्यादा बैठने पर ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा.
क्यों लिया ये फैसला?
इस फैसले की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई. बेंगलुरु के एक रेस्टुरेंट की दीवार पर लगे नोटिस में साफ लिखा था कि मीटिंग की अनुमति नहीं है और यदि कोई ग्राहक एक घंटे से अधिक समय तक बैठता है, तो उससे प्रति घंटे 1000 रुपये अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा. इस नोटिस की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट होते ही हजारों लोग इस पर प्रतिक्रिया देने लगे.
saw this notice posted at an eatery in BLR pic.twitter.com/nnEpjPjRjg
— Shobhit Bakliwal (@shobhitic) January 25, 2026
कई यूजर्स ने इसे ग्राहकों के साथ अन्याय बताते हुए नाराज़गी जताई और कहा कि कैफे हमेशा से बातचीत और मीटिंग्स के लिए सामाजिक स्थान रहे हैं. वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने रेस्टुरेंट मालिकों का समर्थन करते हुए कहा कि बिना पर्याप्त ऑर्डर किए घंटों टेबल घेरकर बैठना गलत है और इससे छोटे व्यवसायों को आर्थिक नुकसान होता है.
लोगों का निकल रहा गुस्सा
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक रेस्टुरेंट के नियम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलते शहरी जीवन, वर्क-फ्रॉम-कैफे कल्चर और बिज़नेस के व्यावहारिक पक्ष के बीच टकराव को दर्शाता है. एक तरफ ग्राहक कैफे को आरामदायक और खुली जगह मानते हैं, तो दूसरी तरफ रेस्टुरेंट मालिकों के लिए हर टेबल की एक आर्थिक कीमत होती है. यही वजह है कि यह फैसला लोगों को दो हिस्सों में बांट रहा है और कैफे संस्कृति को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है.
Source: IOCL

























