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यामानाशी-यूपीः नई औद्योगिक क्रांति की दस्तक

जापान के यामानाशी प्रांत से आया उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल जब लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मेज़ पर बैठा, तो यह उस भरोसे की पुष्टि थी जो जापान ने उत्तर प्रदेश की बदलती हुई तस्वीर पर जताया है. फ़ूजी पर्वत की तलहटी में बसा यामानाशी अपने सटीक इंजीनियरिंग उद्योगों, इलेक्ट्रॉनिक कल-पुर्जों और उन्नत ऑटो-कंपोनेंट विनिर्माण के लिए विश्वभर में जाना जाता है.

औद्योगिक रूप से समृद्ध ऐसा प्रांत जब उत्तर प्रदेश पर भरोसा जताता है तो यह उस बदलाव की पुष्टि है जो योगी सरकार में अब स्पष्ट रूप से दिखाई देती है. इस सरकार ने नीतिगत स्पष्टता, अवसंरचनात्मक तत्परता और निवेशक-हितैषी प्रशासनिक संस्कृति को विकसित करके राज्य से बीमारू का ठप्पा हटाया है और देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते औद्योगिक गंतव्यों के रूप में खुद को स्थापित किया है. यामानाशी की यूपी से साझेदारी राज्य की बदलती हुई तस्वीर की चमकदार कड़ी है. एक ऐसी कड़ी, जो प्रदेश की आर्थिक उन्नति और लाखों हाथों को रोज़गार देने की संभावनाओं को मूर्त रूप देने में सक्षम है. 

जापान की विरासत, भारत का अनुभव
जापान की ऑटोमोबाइल दक्षता को पूरा विश्व मान्यता देता है. दुपहिया वाहनों से लेकर आधुनिक चार-पहिया कारों तक, जापानी कंपनियों ने परिशुद्धता, गुणवत्ता नियंत्रण और नवाचार का जो मानक गढ़ा है, उसने वैश्विक परिवहन उद्योग की दिशा बदली है. यह सफलता लीन मैन्युफैक्चरिंग और काइज़न यानी निरंतर सुधार की उस कार्यसंस्कृति का परिणाम है, जो न्यूनतम बर्बादी के साथ उच्चतम गुणवत्ता सुनिश्चित करती है. टोयोटा की जस्ट-इन-टाइम इन्वेंट्री प्रणाली हो या पैनासोनिक की लिथियम-आयन और सॉलिड-स्टेट बैटरी अनुसंधान में बढ़त, जापान सभी में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है. चूंकि भारत और जापान के औद्योगिक रिश्ते पहले से ही काफी सहज रहे हैं इसलिए उत्तर प्रदेश को इसका हर क्षेत्र में लाभ मिलेगा. 

अस्सी के दशक में सुजुकी और भारत सरकार के संयुक्त उद्यम ने न केवल आम भारतीय परिवार के लिए कार को सुलभ बनाया, बल्कि देश में पहली बार विश्वस्तरीय ऑटो-कंपोनेंट इकोसिस्टम की नींव भी रखी. इसके बाद होंडा, यामाहा और सुजुकी जैसी कंपनियों ने भारतीय दोपहिया बाजार में विश्वसनीयता और कम उत्सर्जन का मानक स्थापित किया.  यामानाशी का यह प्रतिनिधिमंडल उसी ऐतिहासिक साझेदारी की अगली और कहीं अधिक महत्वाकांक्षी कड़ी है. इस बार लक्ष्य पेट्रोल-डीज़ल नहीं, बल्कि भविष्य का इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग है.

योगी सरकार का विजन: नीति से जमीन तक
बीते नौ वर्षों से अधिक समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक निवेश को लेकर जो निरंतरता और गंभीरता दिखाई है, वह आज इस तरह की वैश्विक साझेदारियों की ज़मीन तैयार कर चुकी है. कानून-व्यवस्था में सुधार, ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में राज्य की छलांग, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था और उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग नीति जैसे ठोस कदमों ने निवेशकों के मन में यह विश्वास भरा है कि यूपी अब क्रियान्वयन का राज्य बन चुका है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में समर्पित ‘जापानी सिटी’ का विकास इसी दूरदृष्टि का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जो जापानी ईवी कंपनियों और उनके सहायक उद्योगों को एक एकीकृत तैयार ढांचा उपलब्ध कराएगा. 

बैटरी, आपूर्ति श्रृंखला और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
किसी इलेक्ट्रिक वाहन की कुल लागत का एक बड़ा हिस्सा उसकी बैटरी में जाता है. यामानाशी की सटीक इंजीनियरिंग विशेषज्ञता रखने वाली इकाइयां यदि उत्तर प्रदेश में बैटरी असेंबली और सेल-निर्माण इकाइयां स्थापित करती हैं, तो इसका सीधा असर ईवी की स्थानीय लागत में उल्लेखनीय कमी के रूप में दिखेगा. जापानी कंपनियां जहां भी जाती हैं, अपने साथ आपूर्तिकर्ताओं की एक पूरी शृंखला लेकर आती हैं. इससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यीडा कॉरिडोर के स्थानीय एमएसएमई क्षेत्र को सीधा बल मिलेगा  और ईवी कंट्रोलर, वायरिंग हार्नेस तथा मोटर जैसे महत्वपूर्ण कल-पुर्जों का घरेलू निर्माण संभव होगा. इसका अर्थ है आयात पर निर्भरता में कमी, विदेशी मुद्रा की बचत, और ‘मेक इन इंडिया’ के साथ-साथ ‘मेक इन यूपी’ के सपने को साकार करने वाला एक सुदृढ़ औद्योगिक आधार.

कुशल कार्यबल: भविष्य की नींव
बड़ी जरूरत कुशल कार्यबल की है. उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में भी सजग है. यूपी-जापान साझेदारी के अंतर्गत जापानी कंपनियां राज्य के आईटीआई और पॉलिटेक्निक संस्थानों के साथ मिलकर विशेष "सेंटर ऑफ एक्सीलेंस" स्थापित कर सकती हैं, जहां प्रदेश के युवाओं को सीधे जापानी ईवी तकनीक, गुणवत्ता मानकों और लीन मैन्युफैक्चरिंग पद्धतियों में प्रशिक्षित किया जाएगा. यह उत्तर प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीकी क्षमता से लैस करने का एक दीर्घकालिक निवेश भी सिद्ध होगा.

रोज़गार, निर्यात और एक ट्रिलियन डॉलर का सपना
यामानाशी के साथ बनने वाली यह साझेदारी केवल कारखानों और मशीनों तक सीमित नहीं रहेगी. यीडा और एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में बढ़ते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश से जापानी ईवी क्लस्टरों के माध्यम से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होंगे. कुशल इंजीनियरों से लेकर असेंबली-लाइन कर्मियों और लॉजिस्टिक्स सेवाओं तक. इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों और स्पेयर पार्ट्स को दक्षिण-पूर्व एशिया तथा अन्य वैश्विक बाज़ारों में निर्यात करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा, जिससे प्रदेश केवल घरेलू खपत के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा.

योगी सरकार की सतत और स्थिर प्रोत्साहन नीतियां, जापान की तकनीकी उत्कृष्टता और विशाल कार्यबल, जब ये तीनों तत्व एक साथ आते हैं, तो परिणाम समूचे प्रदेश के भविष्य में दिखाई देता है. यह साझेदारी उत्तर प्रदेश को न केवल एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को गति देगी, बल्कि प्रदेश को दक्षिण एशिया के अग्रणी इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में भी प्रतिष्ठित करेगी. यामानाशी से आया यह प्रतिनिधिमंडल इसलिए एक व्यापारिक यात्रा भर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक पुनर्जागरण का एक जीवंत प्रमाण है, जिसकी नींव नीति की स्पष्टता, नीयत की सच्चाई और नेतृत्व के अटूट संकल्प पर टिकी है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]

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