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यूपी-यामानाशीः कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति का बड़ा अवसर

उत्तर प्रदेश की आर्थिक उन्नति का रास्ता कृषि क्षेत्र के उन्नत हुए बिना नहीं तैयार हो सकता और इसके लिए जरूरी है कि किसानों को तकनीकी रूप से दक्ष किया जाए. कृषि क्षेत्र प्रदेश की रीढ़ है और यही राज्य के सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देता है. राज्य सरकार के वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के महत्वाकांक्षी संकल्प को साकार करने में कृषि का आधुनिकीकरण और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सबसे निर्णायक कारक साबित होंगे और इस दृष्टि से जापान और उत्तर प्रदेश की साझेदारी न सिर्फ बहुउपयोगी है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने में भी अहम साबित होगी.

यामानाशी प्रान्त के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में आया उच्चस्तरीय जापानी प्रतिनिधिमंडल भले ही मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाश रहा है, लेकिन इस दौरे की परछाई प्रदेश के खेतों तक भी पहुंचती दिखाई दे रही है. यह ऐसा अवसर है जो प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था की सूरत बदलने की क्षमता रखता है और योगी सरकार इस अवसर को अपने किसानों के लाभ के लिए भुनाने में कोई कसर नहीं उठा रही है.
 
उत्तर प्रदेश वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है और इस विशाल लक्ष्य की नींव बिना कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के नहीं रखी जा सकती. प्रदेश की करोड़ों की आबादी का बड़ा हिस्सा अब भी खेती पर निर्भर है, और जब तक खेत की उपज नहीं बढ़ेगी, किसान की जेब में अतिरिक्त आय नहीं आएगी, तब तक शहरों की चमकती इमारतें और औद्योगिक गलियारों की तस्वीर के रंग पूरे नहीं होंगे. यहीं कृषि क्षेत्र में जापानी तकनीक की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है. जापान दुनिया में सटीक और सूक्ष्म कृषि यानी प्रिसिजन फार्मिंग का पर्याय माना जाता है.

वहां की कृषि मशीनरी कंपनियां छोटे और मझोले किसानों के लिए हल्के, किफायती और प्रभावी उपकरण बनाने में महारत रखती हैं. उत्तर प्रदेश के लिए यह बात इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि यहां के अधिकांश किसान छोटी और सीमांत जोत वाले हैं. उनके लिए बड़े ट्रैक्टर और भारी मशीनें न तो व्यावहारिक हैं और न ही किफायती. जब जापानी तकनीक से लैस इकाइयां प्रदेश में स्थापित होंगी, तो रोपाई, निराई और कटाई जैसे श्रमसाध्य कार्यों में लगने वाला समय और लागत, दोनों में भारी कमी आएगी. इसका सीधा असर प्रति एकड़ पैदावार पर पड़ेगा और उसमें होने वाली वृद्धि किसानों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाएगी.
 
उत्तर प्रदेश की खेती की सबसे संवेदनशील नब्ज पानी है. प्रदेश के कई हिस्सों में भू-जल स्तर लगातार गिर रहा है और फसलों के लिए अनिश्चितता बढ़ रही है. जापान, जल प्रबंधन और दक्षता के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में गिना जाता है. वहां की स्वचालित ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियां इतनी सटीक हैं कि फसल को ठीक उतना ही पानी मिलता है जितनी उसे वास्तव में आवश्यकता होती है. यह तकनीक उत्तर प्रदेश के खेतों तक पहुंचती है, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए भूजल को बचाने की एक दीर्घकालिक बीमा पॉलिसी भी साबित होगी.
 
एक और पहलू अक्सर चर्चा से बाहर रह जाता है, वह है ग्रीन एनर्जी और खेती का आपसी तालमेल. जापानी प्रतिनिधिमंडल के दौरे का केंद्रबिंदु ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीक है और यह अप्रत्यक्ष रूप से किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है. पराली जलाना उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे उत्तर भारत के लिए हर साल एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट बन जाता है. जापानी ग्रीन एनर्जी और पावर-टू-गैस तकनीकों की मदद से इसी पराली और कृषि अवशेषों को हरित ऊर्जा और बायो-फ्यूल में बदला जा सकता है. ऐसो होते ही किसानों का कायापलट हो जाएगा. वह केवल अन्नदाता नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जादाता भी बनेगा. यह बदलाव न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा.
 
फसल को सुरक्षित रखकर सही समय पर सही बाजार तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है. उत्तर प्रदेश आलू, आम और तमाम सब्जियों के मामले में देश के अग्रणी उत्पादकों में शुमार है, लेकिन उचित कोल्ड चेन और भंडारण सुविधाओं के अभाव में किसान की मेहनत अक्सर मंडी तक पहुंचने से पहले ही सड़ जाती है. जापान की अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज, फूड पैकेजिंग और प्रिजर्वेशन तकनीक इस समस्या का कारगर समाधान बन सकती है. इससे न केवल फसल की शेल्फ-लाइफ बढ़ेगी, बल्कि किसान अपने उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार से आगे बढ़कर पूर्वी एशिया जैसे वैश्विक बाजारों तक निर्यात करने में सक्षम होंगे. एक ऐसा किसान जो कल तक मंडी में औने-पौने दाम पर उपज बेचने को मजबूर था, वही किसान कल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सकता है.
 
उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रांत के बीच कृषि क्षेत्र को लेकर होने वाले करार ग्रामीण युवाओं के लिए भी अवसर लेकर आएंगे. नई कृषि मशीनरी और तकनीक के संचालन, रखरखाव और उससे जुड़े व्यवसायों में रोजगार तथा उद्यमिता के नए द्वार खुलेंगे. जब खेती तकनीक-संचालित होगी और मशीनों की मरम्मत, संचालन और प्रबंधन के लिए कुशल हाथों की जरूरत होगी, तो युवा वर्ग गांव में रुककर विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बन सकेगा. जरूरी है कि सरकार, उद्योग जगत और जापानी साझेदार मिलकर यह सुनिश्चित करें कि तकनीकी क्रांति की पहुंच बने.
 
यामानाशी प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा एक संकेत है कि उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र में बदलाव के लिए प्रबल आकांक्षी है. जब जापानी तकनीकी दक्षता और उत्तर प्रदेश के परिश्रमी किसानों तथा युवाओं की मेहनत का संगम होगा, तो यह प्रदेश की कृषि व्यवस्था में गहरा बदलाव लाएगा. इससे उत्पादन लागत घटेगी, किसानों की आय दोगुनी होने का सपना साकार होने की दिशा में ठोस कदम बढ़ेगा, और उत्तर प्रदेश देश के एक आधुनिक कृषि-तकनीक केंद्र के रूप में उभर सकेगा. जब खेत तकनीक से जुड़ेंगे, तो न केवल फसलें बदलेंगी, बल्कि गांव की तकदीर भी बदलेगी—और यही उत्तर प्रदेश की अगली आर्थिक क्रांति की असली नींव होगी.

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