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Omicron: अमेरिका को हिला देने वाले इस 'ओमिक्रोन' से आखिर हमें क्यों नहीं लग रहा इतना डर?

Corona New Variant: अगर आप अभी भी अपने इस दुश्मन 'ओमिक्रोन' वायरस को अपने मुकाबले कमजोर समझ रहे हैं,तो फिर जरा उस अमेरिका का हाल जान लीजिये, जिसकी आबादी महज़ 33 करोड़ है और जहां हर दिन 10 लाख से ज्यादा कोविड के मामले सामने आ रहे हैं.वहां के ज्यादातर प्रांत के अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहे हैं और वहां हड़कंप का माहौल है जिसे अमेरिकी न्यूज़ चैनलों पर देखा जा सकता है.हमारे नेताओं को चुनांवी रैलियों में ज्यादा से ज्यादा भीड़ जुटाने का मोह है लेकिन अमेरिका ने दुनिया भर में माने जाने वाले सबसे प्रतिष्ठित 'ग्रैमी अवार्ड्स’ समारोह को स्थगित कर दिया है,जो 31 जनवरी को होना था. फर्क सिर्फ एक सोच का होता है कि लोगों की जिंदगी बचाना जरुरी है या फिर चुनांवी भीड़ जुटाकर उसका तमाशा देखना ही आखिरी मकसद है.

वैसे तो हम लोग आदत से ही बेपरवाह हैं लेकिन सच ये भी है कि जब मुसीबत गले पड़ जाती है,तब हमारे हाथ में सरकार को कोसने के सिवा कोई और दूसरा हथियार नज़र नहीं आता है.लिहाज़ा,इस बार अपने राज्य की सरकार को कोसने से पहले जरा ये ख्याल जरुर करें कि उसे ऐसी पाबंदियाँ लगाने की जरुरत आखिर क्यों पड़ रही है. बेशक दुनिया भर के विशेषज्ञ यही मान रहे हैं कि ओमिक्रोन वायरस उतना जानलेवा नहीं है लेकिन फिर भी ये नहीं भूलना चाहिए कि इससे पहले आकर कहर बरपाने वाले 'डेल्टा' वायरस ने दुनिया के कई मुल्कों का पीछा अभी तक छोड़ा नहीं है और उसमें भारत भी शामिल है. इसलिये अभी तक हमारे महामारी विशेषज्ञ भी ये पता नहीं लगा पाये हैं कि देश में पिछले 8-10 दिन में कोरोना संक्रमित मरीजों की जो मौत हुई है,उसकी मुख्य वजह ओमिक्रोन था या फिर डेल्टा वायरस या फिर दोनों का कॉम्बिनेशन था. ऐसी रिसर्च करके उसके सटीक नतीजे देने में वैज्ञानिकों को भी इसलिये वक़्त लग रहा है क्योंकि कोविड का ये वायरस हर बार एक नया भेस बदलकर आ रहा है,जो मेडिकल साइंस की दुनिया को चकमा देने में भी कामयाब हो रहा है.

कोई भी ये नहीं चाहेगा कि हमारे देश में फिर से वो नौबत आ जाये,जो पिछले साल दूसरी लहर के दौरान हम सबने अपनी आँखों से देखी और न जाने कितनों ने अपनों को असमय ही खो दिया.लेकिन यकीन मानिये कि अमेरिका के तीन प्रदेशों में इस वक़्त कुछ वैसा ही नजारा है,जो हमने कोरोना की दूसरी लहर के वक़्त देखा था. अमेरिका के मेरिलैंड, न्यूयॉर्क व कैलिफोर्निया प्रांतों के अस्पतालों में कोरोना की वजह से हालात बेकाबू होने लगे हैं.वहां के आईसीयू वार्ड भी अब पहले जितने खाली नहीं हैं.जबकि लोगों को चिकित्सा-सुविधा देने के मामले में अमेरिका आज भी दुनिया में अव्वल नंबर पर है. ऐसे में वहाँ के डॉक्टर व विशेषज्ञ लोगों से बूस्टर खुराक लेने, भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं जाने और मास्क पहनने की अपील बार-बार कर रहे हैं कि अगर आपको जिंदगी प्यारी है,तो फिर जानबूझकर इससे खिलवाड़ मत कीजिये

ये जानकर थोड़ी हैरानी होती है लेकिन सच यही है कि अमेरिका में अब हर दिन 10 लाख से ज्यादा कोविड-19 के मामले सामने आ रहे हैं और अस्पतालों में बेड न मिलने से वहां हड़कंप के ठीक वैसे ही हालात हैं,जो हम अपने देश में पिछले साल अप्रैल में देख-भुगत चुके हैं. अमेरिका के एक महामारी विशेषज्ञ ने जो बताया है,वह डराने वाला सच है लेकिन उससे भारत को और ज्यादा सचेत होने की जरुरत है.वहां के विशेषज्ञ डॉ.फहीम योनुस ने चेताया है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट को हल्के में न लें, मेरे अस्पताल में 100 फीसदी मरीज वेंटिलेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनकी इस चेतावनी को हमें बेहद गंभीरता से लेना होगा. डॉ. फहीम अमेरिकी यूनिवर्सिटी ऑफ मेरिलैंड में महामारी मामलों के प्रमुख डॉक्टर हैं.उन्होंने मेरिलैंड के अस्पताल में आईसीयू भरे होने की जानकारी देते हुए ट्वीट किया है," ओमिक्रॉन को हल्के में न लें, मास्क पहने, कोरोना टीके की बूस्टर खुराक लें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें." हालांकि उन्होंने कुछ ही दिनों में इस लहर के खत्म होने का दावा भी किया है.

अमेरिका के ही एक और प्रांत कैलिफोर्निया की बात करें,तो खबर है कि वहाँ के अस्पताल बेहद बुरे दौर में हैं. बताते हैं कि उस राज्य में कोरोना संक्रमण में आश्चर्यजनक रुप से बढ़ोतरी हुई है.वहां के स्वास्थ्य व मानव सेवा मंत्री डॉ. मार्क गैली का ये बयान हमें सचेत करने के लिए पर्याप्त है. उन्होंने कहा है कि "यहां अस्पतालों के बिस्तर मरीजों से भरे हैं और आईसीयू बेड भी अब पहले जितने खाली नहीं हैं." कैलिफोर्निया हॉस्पिटल एसोसिएशन के एक  पदाधिकारी कियोमी बर्चिन ने तो ये कहकर सबको चौंका दिया है कि "यहां के 40 फीसदी अस्पताल अहम कर्मचारियों की कमी से गुजर रहे हैं." यानी ओमिक्रोन वायरस के फैलने और उससे खुद को बचाने का खौफ इतना ज्यादा है कि वहां स्वास्थ्य सेवा से जुड़े अहम लोगों ने अस्पताल आना ही बंद कर दिया है.बताया गया है कि  न्यूयॉर्क, कैंटुकी, टैक्सास व फ्लोरिडा में भी बुरे हालात हैं और वहां के अस्पताल भी मरीजों से भरे पड़े हैं.न्यूयॉर्क में ही यू एन यानी संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय है जहां दुनिया के तकरीबन दो सौ देशों के प्रतिनिधि व उनके परिवार रहते हैं.लिहाज़ा,वे लोग भी वहां की हक़ीक़त देखकर ही अपने देश की सरकार को आगाह कर रहे हैं कि इसे हल्के में लेने की गलती मत कीजिये.

अगर ब्रिटेन के हालात को देखें,तो वहां भी हर दिन तकरीबन दो लाख नये मामले सामने आ रहे हैं.लेकिन वहां एक सर्वे हुआ है जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं.महामारी के विशेषज्ञ मानते हैं कि आमतौर पर कोरोना के लक्षण चार  हफ्ते या उससे कुछ अधिक समय तक रहते हैं.लेकिन इस सर्वे के मुताबिक देश के 5 लाख लोगों में एक साल से कोरोना के लक्षण मिलने का खुलासा हुआ है.ब्रिटेन के राष्ट्रीय सांख्यिकी दफ्तर के मुताबिक, देश में बड़ी आबादी में लंबे समय से कोविड की मौजूदगी की जानकारी मिली है, जो चिंता का विषय है. लिहाज़ा, ये दो मुल्क हमें कुछ सबक लेने के लिए आगाह कर रहे हैं जिनकी आबादी भारत के मुकाबले कुछ भी नहीं है. अगर अब भी हम सचेत नहीं हुए, तो फिर कब होंगे?

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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