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कल दुबई में टॉस जीतना भारत के लिए क्यों है बेहद जरूरी?

कहते हैं कि क्रिकेट वो शै है जो खेलने वालों के लिए जुनून है, देखने वालों के लिये नशा है और सटोरियों के लिए रातोंरात अमीर बनने का सबसे आसान जरिया है. कल यानी रविवार को टी-20 विश्व कप में दुबई के मैदान पर भारत और न्यूजीलैंड की टीम के बीच जब यह रोमांचक व ऐतिहासिक मुकाबला होगा, तो इन तीनों का कॉकटेल दिखाई देगा. ऐतिहासिक इसलिये कि ये दोनों ही टीमें पाकिस्तान से शिकस्त खाने के बाद आपस में भिड़ेंगीं और ऐसा टी-20 के विश्व कप में पहली बार होगा. ये मैच इसलिये और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि इसमें जो जीत गया, वही सेमी फाइनल में पहुंचने का सिकंदर बन जायेगा. हारने वाली टीम के लिए विश्व कप का सफर तकरीबन खत्म ही हो जायेगा क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इस मैच को जीतने वाली टीम ही बाकी के तीन मैच जीतने में कामयाब होगी. पाकिस्तान तो सेमी फाइनल के दरवाजे तक पहुंच चुका है लेकिन भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ये है कि पिछले 18 सालों में हम न्यूजीलैंड की टीम को किसी भी तरह के मैच में कभी हरा नहीं सके. लिहाज़ा, भारत की टीम के लिए ये मुकाबला 'करो या मरो' वाली हालत वाला ही होगा.

हालांकि क्रिकेट को सालों से कवर करते आ रहे जानकार मानते हैं कि इस वर्ल्ड कप में कमोबेश ऐसा पहली बार ही देखने को मिल रहा है कि  टॉस जीतने का मतलब है कि उस टीम ने कामयाबी का आधा सफर मैच शुरु होने से पहले ही पूरा कर लिया. इसका सबसे बड़ा सबूत ये है कि इस वर्ल्ड कप  में अब तक 10 मुकाबले खेले गए हैं और इनमें से नौ मैच में टॉस जीतने वाली टीम ही जीती है. दिलचस्प बात ये भी है कि टॉस जीतने वाले इन कप्तानों में से आठ ने  पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया और कामयाबी का झंडा गाड़ दिया. अकेले अफगानिस्तान की टीम ही ऐसी रही है जिसके कप्तान मोहम्मद नबी ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया और स्कॉटलैंड को तो हरा दिया लेकिन शुक्रवार को उनकी टीम पाकिस्तान के हाथों हार गई.

वैसे क्रिकेट मैचों के इतिहास पर गौर करें, तो कई बार टॉस हारने वाली टीम ने भी अपनी विरोधी टीम पर जीत हासिल की है लेकिन इस विश्व कप में ये एक नया ही ट्रेंड देखने को मिल रहा है कि जिसने टॉस जीत लिया, समझो कि वही मैच जीत गया. शायद इसीलिये टूर्नामेंट की कमेंट्री करने वाले भारत के पुराने नामचीन खिलाड़ी भी अब ये मानने लगे हैं कि अगर न्यूजीलैंड को हराना है, तो विराट कोहली को टॉस जरुर जीतना चाहिये. वे पाकिस्तान से टॉस नहीं जीत पाये थे और मैच हार गए, इसलिये अब हर कोई टीम की परफॉर्मेंस से ज्यादा जोर टॉस जीतने पर दे रहा है. हालांकि टॉस जीतना या हारना किसी भी टीम के कप्तान की किस्मत पर निर्भर करता है लेकिन अगर उसी से मैच जीतने का आधा पैमाना तय हो रहा है, तो हर कप्तान उसे जीतने की ख्वाहिश रखेगा ही. लेकिन टॉस हारने वाली टीम पर इसका जो मनोवैज्ञानिक असर पड़ता है और खिलाड़ी जिस दबाव में खेलते हैं, उसका प्रमाण सिर्फ  भारत-पाकिस्तान का मैच ही नहीं है बल्कि अन्य आठ मुकाबले भी इसकी तस्दीक करते हैं कि वाकई टॉस ही वो बला है, जो मैच जीतने वाले ताले की चाबी है. हालांकि पाकिस्तान ने शुक्रवार को इस धारणा को तोड़ दिया और टॉस हारने के बावजूद अफगानिस्तान पर जीत हासिल करके इस वर्ल्ड कप की हैट्रिक बना डाली.

लेकिन हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन में एक सवाल ये उठ रहा है कि टी-20 के इस विश्व कप में आखिर ऐसा क्या है कि यहां टॉस जीतना ही इतना अहम हक गया है. तो इसका जवाब उनके पास है, जो पिच व मैदान की बारीकियों को गहराई से समझते हैं. उनके मुताबिक पूरे यूएई में, चाहे वो दुबई हो या ओमान, वहां पर इस वक़्त ओस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण बनी हुई है. पहले बेटिंग करने वाली टीम के खिलाड़ियों के लिए मुश्किल ये हो रही है कि गेंद रुक-रुक कर या कहें कि धीमी गति से उनके बल्ले पर आ रही है. लेकिन हैरानी ये है कि 20 ओवरों के बाद दूसरी बेटिंग करने वाली टीम के लिये यही ओस वरदान साबित हो रही है. लगभग हर गेंद उनके बेट पर भी ठीक से आ रही है और बैट्समैन को भी अपने शॉट लगाने में कोई ज्यादा मुश्किल नहीं हो रही है. हो सकता है कि ओस भी इसकी बड़ी वजह हो लेकिन देखने में आया है कि बाद में बॉलिंग करने वाली टीम के स्पिनर्स व फ़ास्ट बॉलर्स को गेंद पर अपनी ग्रिप बनाने में काफी मुश्किल हो रही है, जिसका नतीजा है कि बैट्समैन आसानी से रन बनाते हुए उस लक्ष्य को पार कर जाते हैं.

चाहे खेल का मैदान हो या फिर कोई सियासी चुनाव का अखाड़ा हो, वहां एक की हार तो तय ही मानी जाती है लेकिन अगर किसी मैच में हुई हार को सिर्फ टॉस हारने से जोड़कर ही देखने लगेंगे, तो अधिकांश लोग इसे अंधविश्वास भी कह सकते हैं. लेकिन क्रिकेट के जानकार ऐसा नहीं सोचते और उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सीरीज में विराट को कई बार टॉस की वजह से ही मैच गंवाना पड़ा है. बेशक वे एक बेतरीन खिलाड़ी हैं लेकिन बतौर एक कप्तान टॉस जीतने के मामले में भाग्य ने उनका साथ कम ही दिया है.

विराट कोहली  ने अब तक 65 टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कप्तानी की है और इसमें 28 बार वे टॉस जीते हैं, जबकि 37 मैचों में वे टॉस हारे हैं. अगर वनडे मैच की बात करें तो बतौर कप्तान वे 95 मैचों में से 55 में टॉस हार चुके हैं.  टी-20 में भी उनका रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है.  वे अब तक टी-20 के 45 मैचों में टीम इंडिया की कप्तानी कर चुके हैं और उनमें से 28 बार टॉस ने उनका साथ नहीं दिया है. इन तीनों तरह की श्रृंखला को मिलाकर वे 206 मैचों की कप्तानी कर चुके हैं, जिसमें से 120 मैचों में टॉस हारना, उनके नाम दर्ज है. देखते हैं कि रविवार को दुबई के मैदान में उछला सिक्का उनके साथ ही देश के क्रिकेट की किस्मत चमकाता है कि नहीं?

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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