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चीन से मुकाबले के लिए परमाणु ताकत को कब बढ़ायेगा भारत?

चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अपनी सामरिक ताकत को औऱ मजबूत करने की दिशा में आज बड़ी कामयाबी हासिल की है.दुश्मन मुल्क के हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए DRDO ने बुधवार को जिस प्रलय बैलेस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है,उसकी ताकत ब्रह्मोस मिसाइल से ज्यादा है,लिहाज़ा भारत की इस उपलब्धि से चीन व पाकिस्तान का खार खाना स्वाभाविक है. जमीन से जमीन पर मार करने वाली प्रलय की मारक क्षमता 150 से 500 किलोमीटर है,यानी बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक इनकी रेंज में होंगे. लेकिन DRDO के वैज्ञानिकों की तारीफ इसलिये भी की जानी चाहिए कि प्रलय मिसाइल को इतना ताकतवर बनाया गया है कि वह करीब 500 से 1000 किलो तक का गोला-बारूद ले जाने में सक्षम है,इसलिये दुश्मन मुल्कों का भारत की इस बढ़ती हुई सामरिक ताकत को देखकर कुछ परेशान होना जायज़ भी है.

दरअसल,हाल के वर्षों में चीन ने अपनी सेना को बेहद तेज़ी से मज़बूत बनाया है. मिसाइल टेक्नोलॉजी, परमाणु हथियारों और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में उसकी तेज़ तरक़्क़ी ने अमेरिका समेत अन्य पश्चिमी देशों के जानकारों के मन में गहरी चिंता बिठा दी है.उनका मानना है कि चीन के चलते दुनिया की सैन्य शक्ति के संतुलन में तेज़ी से बड़ा बदलाव हो रहा है.चीन की बढ़ती सामरिक ताकत भारत के लिए भी उतनी ही बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि वह हमारा एकदम नजदीकी पड़ोसी है.लिहाज़ा,उसके संभावित खतरों से निपटने के लिए भारत को अपनी सैन्य क्षमता को और तेजी से मजबूत करने पर जोर देना होगा.हालांकि इस तथ्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले सात सालों में मोदी सरकार ने इस दिशा में जो कदम उठाए हैं,वैसी तत्परता पिछली सरकारों ने दो दशकों में भी नहीं दिखाई थी.

वैसे चीन का लक्ष्य अपनी सामरिक ताकत को अमेरिका के बराबर तक ले जाने का है लेकिन उसका हर कदम भारत के लिए भी उतने ही बड़े खतरे का संकेत होता है.पिछले दिनों ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2035 तक चीन की सेना को आधुनिक बनाने का आदेश दिया था. उन्होंने चीन को 'विश्व स्तर' की एक ऐसी सैन्य शक्ति बनाने को कहा है जो 2049 तक हर तरह 'युद्धों को लड़ने और जीतने' में सक्षम हो.जानकार मानते हैं कि भले ही यह लक्ष्य बहुत बड़ा हो, लेकिन चीन इसके लिए सही रास्ते पर चल रहा है. ऐसे में,भारत खोमोश रहकर तमाशबीन भला कैसे बन सकता है.

रक्षा जानकार मानते हैं कि यही वजह है कि भारत ने भी अपनी सामरिक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और सरकार ने DRDO को अत्याधुनिक मिसाइल तैयार करने के लिए कहा है.इस प्रलय मिसाइल के सफल परीक्षण से पहले 18 दिसंबर को डीआरडीओ (DRDO) ने अग्नि-प्राइम का भी परीक्षण किया था.रक्षा सूत्रों के मुताबिक आने वाले कुछ महीनों में कुछ और मिसाइल के परीक्षण की भी तैयारी है.

हालांकि भारत हर साल अपने रक्षा बजट में बढ़ोतरी करता है लेकिन चीन के मुकाबले ये अभी भी बहुत कम है.यह सब मानते हैं कि वर्तमान में सेना पर होने वाले ख़र्च के मामले में चीन से आगे केवल अमेरिका ही है.सेंटर फ़ॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़, वॉशिंगटन की संस्था के मुताबिक चीन के रक्षा बजट में हाल में जो वृद्धि हुई है, वह अपनी अर्थव्यवस्था के विकास के लिहाज से कम से कम एक दशक आगे चली गई है.लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ रक्षा से जुड़े आंकड़ों के लिए चीन की आलोचना भी करते हैं. उनका मानना है कि इसे लेकर चीन में 'पारदर्शिता की कमी' है और उसके 'आंकड़े अक्सर सही नहीं होते.'

लेकिन अमेरिका समेत भारत के लिये भी चिंता की एक और बड़ी बात ये है कि चीन अपने परमाणु ज़ख़ीरे को तेजी से बढ़ा रहा है.पिछले महीने ही अमेरिका के रक्षा विभाग ने अनुमान लगाया था कि इस दशक के अंत तक चीन अपने परमाणु भंडार को चौगुना कर लेगा. हालांकि चीन का कहना है कि "2030 तक उसके पास कम से कम 1,000 परमाणु वॉरहेड होंगे." चीन के सरकारी मीडिया ने अमेरिका के दावे को 'मनमाना और पक्षपातपूर्ण' क़रार देते हुए कहा था कि परमाणु हथियारों को 'न्यूनतम स्तर' पर ही रखा गया है.लेकिन दुनिया के देश मानते हैं कि चीन की 'कथनी और करनी' में बहुत फर्क होता है,लिहाज़ा उसके दावे पर यकीन नहीं किया जा सकता.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट दुनिया के परमाणु भंडार को लेकर हर साल अपना आकलन प्रकाशित करता है. उसके विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पिछले कई सालों से अपने परमाणु हथियार बढ़ाने में लगातार जुटा हुआ है.हालांकि चीन अभी भी अमेरिका के 5,550 परमाणु हथियारों से काफ़ी दूर है. लेकिन इसके परमाणु ढांचे को पश्चिमी देशों के वर्चस्व के लिए सबसे बड़ा ख़तरा माना जा रहा है. ऐसे में भारत को सिर्फ मिसाइल परीक्षण तक ही सीमित नहीं रहना होगा बक्की अपनी परमाणु ताकत को बढ़ाने की तरफ भी ध्यान देना होगा.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

 

 

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