एक्सप्लोरर

अनियोजित विकास से बेचैन पर्वतराज हिमालय, अलौकिक सौंदर्य की रक्षा के लिए करने होंगे गंभीर प्रयास

उत्तराखंड के माणा में हुए हादसे से इस विश्वास को बल मिलता है कि प्रकृति अपने साथ हो रही छेड़छाड़ के विरुद्ध चेतावनी देती रहती है. 54 मजदूर अचानक हिमस्खलन की चपेट में आ गए, हालांकि ज्यादातर मजदूरों को बचा लिया गया. सेना, आईटीबीपी, एयरफोर्स, एनडीआरफ, एसडीआरफ की टीमों ने आधुनिक उपकरणों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया, फिर भी आठ जिंदगियों को बचाया नहीं जा सका. हिमस्खलन में अक्सर भूस्खलन भी शामिल रहता है. हिमालय की पहाड़ियां संसार की सबसे नई तथा कच्ची पहाड़ियां हैं. इनमें निरंतर हलचल जारी है. इन प्राकृतिक हलचलों को रोकना संभव नहीं है. लेकिन इनका समुचित अध्ययन कर निश्चित रूप से इन्हें कम किया जा सकता है.

सामान्यतया निर्माण कार्यों में उचित तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जाता. भूस्खलन कोई अचानक होने वाली घटना नहीं है. बड़ी घटना से पूर्व ही घटनास्थल पर मिट्टी व पत्थर गिरने लग जाते हैं. फिर मलबा आने लगता है. यदि पानी का दबाव होता है तो पानी का रिसाव बढ़ जाता है, जमीन पर दरारें पड़ जातीं हैं. तब पहाड़ चटक कर टूट-टूटकर गिरने लगते हैं और हादसा घटित होता है.

हिमालय की हलचल पर नजर रखने वाले नंद किशोर गर्ग लिखते हैं, "वनों के अंधाधुंध कटान से हिमालयी ग्लेशियर कई मील सिकुड़ चुके हैं. यदि यही सिलसिला जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब संपूर्ण पर्वतीय क्षेत्र भूस्खलन की मार झेलने को विवश होगा." सरकारों के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती होती है पहाड़ों में रहने वाले लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना. उत्तराखंड एक सीमावर्ती राज्य है. इसलिए स्वाभाविक है कि सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रख कर सड़कों का निर्माण किया जाए.

भारत-चीन सीमा पर निर्माण कार्य में लगे हुए मजदूरों के हितों की रक्षा सरकार की जिम्मेदारी है. हिमस्खलन के बाद मजदूरों को बचाने के लिए जो कोशिशें हुईं उसकी सराहना की जानी चाहिए. लेकिन ग्लेशियर वाले इलाकों में किसी भी संरचना के निर्माण के पहले सावधानी बरतने की जिम्मेदारी भी सरकार की ही है. 

यह सच है कि भूस्खलन की भविष्यवाणी संभव नहीं है. लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों का नियमित अध्ययन कर खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है. वनों और पहाड़ों के संरक्षण हेतु स्थानीय लोगों के अनुभवों को सुनना जरूरी है. पर्यावरणविद चंडी प्रसाद भट्ट का मानना है कि, "आज पूर्व सूचना तंत्र स्थानीय, हिमालयी, एशियाई और वैश्विक स्तर पर होना चाहिए, ताकि मानव जीवन को आपदाओं से बचाया जा सके. इसके लिए भारत, चीन, नेपाल और भूटान का एक संयुक्त तंत्र बनना चाहिए.

हिमस्खलन और भूस्खलन से लेकर बाढ़ सुरक्षा तक के लिए यह जरूरी है. साथ ही, बारिश की मारक क्षमता को कम करने के कार्य भी बड़े पैमाने पर होने चाहिए. हिमनदों, हिमतालाबों, बुग्यालों और जंगलों की संवेदनशीलता की भी व्यापक जानकारी होनी चाहिए." समूचा हिमालय क्षेत्र आज अवैज्ञानिक और अनियोजित विकास के तहत भारी मात्रा में इस्तेमाल किए जाने वाले विस्फोटों से भीतर तक हिल गया है. इसके परिणामस्वरूप यहां हर दो किलोमीटर बाद एक भूस्खलन तथा दस किलोमीटर पर विशाल भूस्खलन सक्रिय हैं.

हिमालय की पीड़ा को लोकेंद्र सिंह बिष्ट कुछ इस तरह व्यक्त करते हैं, "पहाड़ के पहाड़ खिसकने-टूटने की घटनाएं अब सामान्य हो गयी हैं. बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक घटनाओं की बारंबारता बढ़ गयी है. सड़कों, नहरों के जाल ने यहां के पर्यावरण के संतुलन को ही डगमगा दिया है. अनेक प्रकार के वन्य जीव अब दिखाई नहीं देते. कई किस्म की जड़ी-बूटियां अब उग नहीं रहीं. जंगल अब बचे ही कहां हैं. हालात यहां तक बन आए हैं कि मध्य, उत्तर हिमालय तथा वृहत्तर हिमालय में 'बर्फ रेखा' (स्नो लाइन) तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रही है. यानी पहले जिस ऊंचाई पर हिमपात होता था, अब और भी ऊंचाई में होने लगा है. हमारे देश की तुलना में यूरोप में यह 'बर्फ-रेखा' काफी नीची है. हिमालय में स्थित विभिन्न तालों, झीलों का जलस्तर तेजी के साथ घट रहा है. ग्लेशियर पिघल रहे हैं; कुछ तो समाप्त भी हो गये हैं." 

हिमालय के समाज तथा वहां की प्रकृति के कष्टों को केवल स्थानीय समस्या मान कर ही नहीं देखा जाना चाहिए. साथ ही हिमालय की ओर देखने की वह दृष्टि भी बदलनी पड़ेगी जो वहां की नदियों और वन संपदा को आर्थिक लाभ के लिए दुहना चाहती है. कोहिमा से कश्मीर तक विस्तृत पर्वतीय क्षेत्र की जानकारी रखने वाले राजीव नयन बहुगुणा के अनुसार,"पिछले कुछ दशकों में विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों के दोहन ने स्थानीय लोगों को उनके प्रकृति प्रदत्त अधिकारों से भी वंचित कर दिया है." तय करना होगा कि हमें हिमालय की नदियों को दांव पर लगा कर कुछ वर्षों के लिए बिजली चाहिए या हमेशा के लिए अच्छी हवा, साफ पानी और सुरक्षित पर्यावरण. वैज्ञानिक मानते हैं कि हिमस्खलन की 90 प्रतिशत घटनाएं मानव जनित होती हैं और अक्सर वे मानव भी हादसे का शिकार हो जाते हैं. हिमस्खलन 320 किलोमीटर प्रति घंटे से भी अधिक तेज गति से गिर सकता है.

केदारनाथ हादसे के बाद आपदा प्रबंधन के स्तर पर काफी सुधार हुआ है. लेकिन हिमालय क्षेत्र में प्रकृति के साथ संतुलन बनाने के लिए बहुत कुछ किया जाना अभी बाकी है. पवित्र चार धाम - बदरीनाथ,केदारनाथ,गंगोत्री और यमुनोत्री हिमनदों के अंचल में ही स्थित है. इन तीर्थ स्थलों में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. हजारों वाहन आते हैं. तेज आवाज वाले हेलीकॉप्टरों का काफिला शांत प्रकृति को हिला देता है. शहरीकरण के लिए आधारभूत संरचना का निर्माण हो रहा है. परिणाम यह है कि ग्लेशियर साल-दर-साल घटते जा रहे हैं. पर्यावरण वैज्ञानिक वीरेंद्र कुमार पैन्यूली ग्लेशियर को बचाने के लिए चिंतित हैं. वह इसके लिए सुझाव भी देते हैं. पैन्यूली का मानना है कि "जिन चट्टानों पर ग्लेशियर टिके हों, वहां किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.

तापक्रम बढ़ने से ग्लेशियर का पिघलना सामान्य बात है, लेकिन उन पर गिरने वाली बर्फ से भरपाई होती रहे, तो उनका संतुलन बना रहता है." पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में भारी हिमपात और बारिश के कारण भूस्खलन हुआ. राज्य की प्रमुख सड़कें एवं राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित रहे. कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर,चंबा और शिमला में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया. अधिकारियों के अनुसार 2,300 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले जनजातीय क्षेत्रों और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन का खतरा है. स्पष्ट है कि अत्यधिक मानवीय हस्तक्षेप के कारण हिमालय के वातावरण में कई बदलाव आ रहे हैं. हिमालय के असीम व अलौकिक सौंदर्य और बेशकीमती प्राकृतिक संपदा की रक्षा हेतु गंभीर प्रयास जरूरी है. उत्तराखंड एवं अन्य हिमालयी राज्यों का विकास पर्यावरण के अनुकूल होना चाहिए.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.] 

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर भारत ने जताया दुख तो आया कांग्रेस का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा?
खामेनेई की मौत पर भारत ने जताया दुख तो आया कांग्रेस का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- भाजपा ने फिरौती में पूरा बिहार मांग लिया
नीतीश के राज्यसभा जाने पर अखिलेश की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- BJP ने फिरौती में पूरा बिहार मांग लिया
मिसाइल, टॉरपीडो और हेलिकॉप्टर से लैस… फिर भी डूब गया ईरान का IRIS Dena, जानें इस युद्धपोत की ताकत
मिसाइल, टॉरपीडो और हेलिकॉप्टर से लैस… फिर भी डूब गया ईरान का IRIS Dena, जानें इस युद्धपोत की ताकत
कौन हैं अर्जुन तेंदुलकर की दुल्हन सानिया चंडोक, कितनी पढ़ी-लिखी हैं? कितनी अमीर हैं? जानें A टू Z डिटेल्स
कौन हैं अर्जुन तेंदुलकर की दुल्हन सानिया चंडोक, कितनी पढ़ी-लिखी हैं? कितनी अमीर हैं?
ABP Premium

वीडियोज

Nitish Kumar Rajyasabha Nomination: नीतीश कुमार के बाद कौन संभालेगा CM कुर्सी? | Bihar Politics
Anupamaa: अनुपमा: प्रेरणा ने प्रेम पर डाली नज़र, अनुपमा ने समारोह के बीच सिखाया सबक
Bollywood News: सनी देओल की ‘एंटनी’ में विजय वर्मा की एंट्री, पहली बार आमने-सामने होगी जोरदार टक्कर
Anil Kapoor ने Subedaar की Cast, Fitness और Discipline पर की खुलकर बात
Vasudha: 😧Hanumant का License जब्त गाड़ी और नौकरी दोनों गए हाथ से, अब क्या करेगी Vasudha?

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर भारत ने जताया दुख तो आया कांग्रेस का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा?
खामेनेई की मौत पर भारत ने जताया दुख तो आया कांग्रेस का पहला रिएक्शन, जानें क्या कहा?
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- भाजपा ने फिरौती में पूरा बिहार मांग लिया
नीतीश के राज्यसभा जाने पर अखिलेश की तीखी प्रतिक्रिया, कहा- BJP ने फिरौती में पूरा बिहार मांग लिया
मिसाइल, टॉरपीडो और हेलिकॉप्टर से लैस… फिर भी डूब गया ईरान का IRIS Dena, जानें इस युद्धपोत की ताकत
मिसाइल, टॉरपीडो और हेलिकॉप्टर से लैस… फिर भी डूब गया ईरान का IRIS Dena, जानें इस युद्धपोत की ताकत
कौन हैं अर्जुन तेंदुलकर की दुल्हन सानिया चंडोक, कितनी पढ़ी-लिखी हैं? कितनी अमीर हैं? जानें A टू Z डिटेल्स
कौन हैं अर्जुन तेंदुलकर की दुल्हन सानिया चंडोक, कितनी पढ़ी-लिखी हैं? कितनी अमीर हैं?
कृति सैनन ने 'तेरे इश्क में' के लिए जीता बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड, यामी गौतम को लगी मिर्ची! फैंस ने किया ऐसा रिएक्ट
कृति सैनन ने 'तेरे इश्क में' के लिए जीता बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड, यामी गौतम को लगी मिर्ची! फैंस ने किया ऐसा रिएक्ट
बिहार को जंगलराज से मुक्ति, कुर्ते पर कोई दाग नहीं... अमित शाह ने नीतीश कुमार की जमकर की तारीफ
बिहार को जंगलराज से मुक्ति, कुर्ते पर कोई दाग नहीं... अमित शाह ने नीतीश कुमार की जमकर की तारीफ
Iran Attacks Middle East: सऊदी अरब से यूएई तक 8 मुस्लिम देशों को ईरान ने क्यों बनाया निशाना? जानें हमले की वजह
सऊदी अरब से यूएई तक 8 मुस्लिम देशों को ईरान ने क्यों बनाया निशाना? जानें हमले की वजह
कम डाउन पेमेंट में खरीद सकते हैं Hunter को टक्कर देने वाली TVS Ronin, हर महीने इतनी देनी होगी EMI
कम डाउन पेमेंट में खरीद सकते हैं Hunter को टक्कर देने वाली TVS Ronin, हर महीने इतनी देनी होगी EMI
Embed widget