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रूस-यूक्रेन जंग: अमेरिका को खुश करने के लिए रूस को क्यों नाराज करेगा भारत?

जंग के नौवें दिन रूस ने यूक्रेन के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला करके ये जता दिया है कि वह यूक्रेन को पूरी तरह से तबाह करने के मूड में है. रूस के इस कदम के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आज रात को इमरजेंसी बैठक बुलाई गई है, जिस पर आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. 

लेकिन न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमले के फौरन बाद रूस के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने देश छोड़कर  छोड़कर पोलैंड में शरण ले ली है. हालांकि इस दावे पर तब तक यकीन नहीं किया जा सकता,जब तक कि जेलेंस्की खुद सामने आकर इसकी पुष्टि न करें क्योंकि लड़ाई छिड़ने के बाद से ही वे अपने नागरिकों को ये भरोसा दिलाते आए हैं कि वे देश छोड़कर कहीं नहीं भागेंगे.

इस बीच पूर्वी यूक्रेन के दो शहरों में फंसे करीब 1700 भारतीयों की सुरक्षित निकासी को लेकर मोदी सरकार की चिंता और बढ़ गई है. दो शहरों पिसोचिन और सुमी में रूसी सेना की तरफ से भीषण बमबारी हो रही है,जिसके चलते भारतीय नागरिकों का वहां से निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है.

इसलिये भारत ने आज दोनों देशों से अनुरोध किया है कि वो कुछ समय के लिये सीज़फायर कर दें. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है बिना युद्ध विराम के यह बेहद कठिन है.हम रूस और यूक्रेन से अनुरोध करते हैं कि कम से कम स्थानीय युद्ध विराम करें, ताकि हम अपने लोगों को वहां से निकाल सकें. 

पिसोचिन में करीब एक हजार और सुमी में 700 से ज्यादा भारतीय फंसे हुए हैं. बागची ने कहा कि हमने यूक्रेन के अधिकारियों से विशेष ट्रेनों की व्यवस्था करने का अनुरोध किया है लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला है. इस बीच हम बसों की व्यवस्था कर रहे हैं.

लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल भारत के लिए अपने नागरिकों को वहां से सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है और चूंकि उन दोनों शहरों में लड़ाई भीषण रूप ले चुकी है, इसलिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर से रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत करके उन्हें कुछ देर के सीजफायर के लिए राजी करना ही पड़ेगा.

दरअसल,रूसी सेना ने शुक्रवार को यूरोप के सबसे बड़े जेपोरिजिया न्यूक्लियर पावर प्लांट पर हमला करके उसका कुछ हिस्सा अपने कब्जे में ले लिया है.इसे लेकर ही भारतीय समयानुसार आज रात 10 बजे UNSC ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है.इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के अलावा अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा (आईएईए) के अधिकारी भी हिस्सा लेंगे.

लेकिन उधर,नाटो ने बड़ी चेतावनी देकर ये आगाह कर दिया है कि रूस रुकने वाला नहीं है.नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने चेताया है कि रूस-यूक्रेन यूद्ध के चलते आने वाला समय और बदतर हो सकता है क्योंकि रूस भारी हथियार ला सकता है और पूरे यूक्रेन में हमले जारी रख सकता है. उन्होंने रूस के हमले को यूरोप में दशकों की सबसे खराब सैन्य आक्रामकता करार देते हुए कहा है कि आने वाला समय और बदतर होगा, मारे जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ेगी और अधिक विनाश होगा. स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि हम इस विवाद का हिस्सा नहीं हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि हम इसे आगे बढ़ने न दें और यूक्रेन से बाहर न फैलने दें.

इस बीच ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यूक्रेन की राजधानी कीव की ओर बढ़ रहा रूसी सेना का विशाल क़ाफ़िला पिछले कुछ दिनों में बमुश्किल ही कुछ आगे बढ़ा है. बताया जाता है कि ये क़ाफ़िला 64 किलोमीटर लंबा है.

लेकिन अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि रूस अभी भी 30 लाख की आबादी वाले कीव को घेरने और उस पर क़ब्ज़ा करने की अपनी नीयत से पीछे नहीं हटा है. हालांकि रूसी सेना के क़ाफ़िले की सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरें 28 फ़रवरी को सामने आई थीं जिसके बाद से ये आशंका जताई जाने लगी थी कि जल्दी ही कोई बाद हमला होने वाला है.

मगर ब्रिटिश और अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि शायद लॉजिस्टिक वजहों से यानी रसद या अन्य सामानों से जुड़ी दिक्कतों के कारण क़ाफ़िले के आगे बढ़ने में मुश्किल आ रही है. गुरुवार सुबह एक ख़ुफ़िया अपडेट में ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि ये क़ाफ़िला "पिछले तीन दिनों में बहुत मामूली तौर पर आगे बढ़ा है" और राजधानी कीव से ये अभी भी 30 किलोमीटर दूर है.

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने रूस व यूक्रेन को लेकर अभी भी अपना तटस्थ रुख अपनाया हुआ है और वह रूस के खिलाफ होने वाली किसी भी तरह की वोटिंग में हिस्सा नहीं ले रहा है.भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में उस मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिसमें यूक्रेन के खिलाफ रूस की सैन्य कार्रवाई के परिणामस्वरूप तत्काल एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग स्थापित करने का निर्णय लिया गया. 

संयुक्‍त राष्‍ट्र की 47 सदस्यीय इस परिषद में यूक्रेन में मानवाधिकारों की स्थिति पर एक मसौदा प्रस्ताव पर मतदान हुआ. प्रस्ताव पारित कर दिया गया. प्रस्ताव के पक्ष में 32 वोट पड़े जबकि दो वोट (रूस और इरित्रिया) इसके खिलाफ पड़े, वहीं भारत, चीन, पाकिस्तान, सूडान और वेनेजुएला सहित 13 देशों ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

लेकिन अब अमेरिका ने भारत पर कूटनीतिक तरीके से ये दबाव बनाने की शुरुआत कर दी है कि वह रूस के खिलाफ होने वाली वोटिंग से खुद को अलग न रखे. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि अमेरिका को खुश करने के लिए भारत क्या रूस को नाराज़ करने की हिम्मत दिखा पायेगा?

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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