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82 साल पुराने कानून को बदलने पर आखिर क्यों मजबूर हुई मोदी सरकार ?

डिजिटल क्रांति के इस दौर में आप किसी भी मेडिकल वेबसाइट पर जाकर सिर्फ एक क्लिक करते हैं और अगले ही पल आपके जरुरत की दवाइयां देने या फिर कोई टेस्ट कराने के लिए उस फार्मेसी का व्यक्ति आपके घर के नीचे आकर खड़ा हो जाता है. लेकिन अब आपको इस आदत से छुटकारा पाने के लिए खुद को मानसिक रुप से तैयार करना होगा. इसलिये कि मोदी सरकार देश को आजादी मिलने से पहले बने एक कानून को न सिर्फ बदलने जा रही है, बल्कि उसे बेहद सख्त करने वाली है.

दरअसल, हमारे देश का मेडिकल जगत फिलहाल एक कानून से संचालित होता है, जिसका नाम है 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट.' ये कानून भारत में राज करने वाली ब्रिटिश हुकूमत ने साल 1940 में बनाया था. लेकिन हैरानी की बात ये है कि देश को आजादी मिलने के सालों बाद कई सरकार आईं और चली गईं लेक़िन उन्होंने जरा भी ये ख्याल नहीं किया कि अंग्रेजों का बना कानून आखिर अभी भी अस्तित्व में क्यों है और उसे क्यों नहीं बदला जाए. खैर, मोदी सरकार 82 साल पुराने इस कानून को अब बदलने जा रही है. हो सकता है कि कई लोग इसका विरोध भी करें लेकिन प्रस्तावित नए कानून में आम लोगों को जहां बहुत सारे अधिकार मिल रहे हैं, तो वहीं मेडिकल जगत की ऐसी सेवाएं देने वालों की जवाबदेही भी तय की जा रही है, जिसमें किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर उनके खिलाफ मोटे जुर्माने के साथ ही सजा का भी प्रावधान है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले हफ्ते ही इस प्रस्तावित विधेयक के मसौदे को सार्वजनिक किया है. संसद के मानसून सत्र में लाये जाने वाले इस बिल को "ड्रग्स,मेडिकल डिवाइसेस एंड कॉस्मेटिक्स बिल 2022" का नाम दिया गया है. इसमें चिकित्सा उपकरणों को एक पृथक इकाई मानते हुए कहा गया है कि किसी भी क्लीनिकल परीक्षण या जांच के दौरान अगर कोई व्यक्ति जख्मी हो जाता है या फिर उसकी मौत हो जाती है, तो संबंधित संस्थान के खिलाफ जुर्माना लगाने के अलावा सजा का भी प्रावधान किया गया है. साथ ही देश भर में वेबसाइट के जरिये चल रही फार्मेसी पर भी सरकार का नियंत्रण रहेगा, ताकि वे कोई मनमानी न कर सकें.

लेकिन ये जानकर सबसे ज्यादा हैरानी होती है कि देश में इस वक़्त जितनी भी ई-फार्मेसी चल रही हैं, उन पर ये पुराना कानून लागू ही नहीं होता. आल इंडिया आर्गेनाइजेशन ऑफ़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स के सचिव संदीप नांगिया कहते हैं "इस वक्त देश में जितनी भी ऑनलाइन फार्मेसी चल रही हैं, वो क़ानूनन नहीं हैं. हालांकि हो सकता है कि इनमें से कुछ ने अपनी दुकान या गोदाम के लिए लाइसेंस लिया हो. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि जब ये किसी भी तरह का उल्लंघन करते हैं, तब ड्रग इंस्पेक्टर को ये समझ नहीं आता कि वो कानून के किस प्रावधान के तहत इन वेबसाइटों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे."

वे ये भी कहते हैं कि बेशक हम भी एक नया कानून चाहते हैं लेकिन वो ऐसा हो जो मौजूदा कानून में इतना बदलाव कर दे कि तमाम ई-फार्मेसी उससे रेगुलेट होना शुरु हो जाएं. लेकिन वे एक और महत्वपूर्ण तथ्य की तरफ इशारा भी करते हैं. उनके मुताबिक ऐसी अधिकांश वेबसाइट दिल्ली से बाहर रजिस्टर्ड होती हैं, लिहाजा दिल्ली के किसी ड्रग इंस्पेक्टर का न्यायिक क्षेत्र ही नहीं बनता है कि वो उनके ख़िलाफ कोई कार्रवाई  कर पाये. यहीं हाल देश के बाकी राज्यों पर भी लागू होता है.

दरअसल, वेबसाइट पर चल रही इन दवा दुकानों का बहुत बड़ा गड़बड़झाला है, जिसे आम इंसान तो पकड़ ही नहीं पाता क्योंकि आप यहां से डॉक्टर के लिखे पर्चे के बगैर ही अपनी कोई भी दवाई मंगा सकते हैं. इन्होंने अपने यहां इन हाउस डॉक्टर नियुक्त कर रखे हैं, जो आपका आर्डर मिलते ही उसके मुताबिक अपना Prescription तैयार करके उसे वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं. लेकिन जब उस कंपनी का ऑडिट होता है, तो वो सारा रिकॉर्ड गायब हो जाता है और दलील ये दी जाती है कि डॉक्टर ने तो महज दवाइयां लिखी थीं, सो साल भर तक उसका रिकॉर्ड भला कैसे रखा जा सकता है.

लेकिन मोदी सरकार ने दवाइयां बेचकर रातोंरात मालामाल हुए इस ड्रग माफ़िया पर शिंकजा कसने का तोड़ निकाल लिया है.जो नया कानून आने वाला है, उसके मुताबिक कोई भी व्यक्ति न तो खुद और न ही किसी और के नाम पर ऑनलाइन न तो कोई दवा बेच सकता है, न उसका प्रदर्शन कर सकता है और न ही उसका भंडारण ही कर पायेगा. इसके लिए पहले उसे केंद्र सरकार से लाइसेंस लेना होगा,जो तय मापदंडों की शर्तें पूरी करने के बाद ही उसे मिलेगा.

प्रस्तावित कानून में चिकित्सा उपकरणों व मेडिकल परीक्षण में किसी भी तरह की लापरवाही का दोषी पाए जाने पर फार्मा कंपनियों व संबंधित लेब पर भी मोटा जुर्माना लगाने औऱ उसके संचालक को जेल की सजा का प्रावधान भी किया गया है. दलगत राजनीति से हटकर जो कोई भी इस प्रस्तावित कानून की बारीकियों को समझने की कोशिश करेगा,तो वो यही मानेगा कि ये एक क्रांतिकारी फैसला है, जो देश के लोगों को बहुत बड़े जंजाल से मुक्त कराने में काफी हद तक कारगर बनेगा.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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