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'हिन्दुस्तान या पाकिस्तान, हमको है रोटी से काम...' दोहरे चरित्र के व्यक्ति थे मोहम्मद जिन्ना

मुगलों के बाद देश पर अंग्रेजों ने राज किया. स्वाधीनता संग्राम के बाद आखिरकार अंग्रेजों को देश छोड़कर जाना पड़ा. लेकिन, इसी के साथ 1947 में देश के दो टुकड़े भी हो गए. विभाजन के इस दर्द को कभी नहीं भुलाया जा सकता है. लेकिन जब बात हम भारत और पाकिस्तान के विभाजन की करते हैं तो फिर पंडित नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना की बात न हो, ऐसा नहीं हो सकता है. जहां तक मोहम्मद अली जिन्ना की बात करें तो वे बहुत  संदिग्ध व्यक्ति थे. वो सिर्फ ऊपर से अच्छा दिखने की कोशिश करते और अंदर से धुर्त व्यक्ति थे. उनकी तुलना में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को बहुत ही भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और आदर्शवादी  माना जा सकता है.

भारत का प्रधानंत्री बनते ही जवाहर लाल नेहरू की पॉलिसी की विशेषताएं रही, हीरा कुंड, कोशी बैराज, भाखड़ा नांगल जैसे तमाम बैराज को उन्होंने उचित समय पर सही करवाया. भारत में भूखमरी एक अहम समस्या थी. जब पाकिस्तान बना तब एक नारा दिया जाता था कि "हिन्दुस्तान या  पाकिस्तान, हमको है रोटी से काम" और ये नारा सोशलिस्ट लोगों के द्वारा दिया जाता था. मतलब यह कि हिन्दुस्तान हो या पाकिस्तान हमें सिर्फ रोटी से मतलब है और हमें सिर्फ रोटी चाहिए. 

नेहरू के सामने थी चुनौती

बंगाल में 1941 में अकाल पड़ा और यह जवाहर लाल नेहरू के सामने एक चुनौती थी. इसमें लगभग 35 लाख या उससे भी अधिक लोगों की मृत्यु हो गई थी. यह भी एक अनुमान ही है. जवाहर लाल नेहरू ने जल का प्रचार-प्रसार किया साथ ही हॉस्पिटल और आईटी का विस्तार कर भारत को टेक्नॉलॉजी में आगे लेकर गए. सांस्कृतिक रूप से नेहरू संवेदनशील व्यक्ति नहीं थे.

यह भी हो सकता है कि हैरो और कैम्ब्रिज में पढ़ने के कारण भारत की संस्कृति के प्रति संवेदनशील नहीं हो पाएं हो. लेकिन इसमें ब्रिटिश इंस्टीट्यूट को दोश देना सही नहीं होगा, क्योंकि अरविंदो घोष ने भी शुरू से ब्रिटेन में पढ़ाई की है और उसके बाद वो भारत की संस्कृति का इतने बड़े सपोर्टर बनें. नेहरू भारत के लिए एक अच्छे व्यक्ति थे और जिन्ना की तुलना में और भी अच्छे व्यक्ति थे.

सारे प्रमाण है कि जवाहर लाल नेहरू ने जनतंत्र को मजबूत बनाने की नींव रखी है. लेकिन सांस्कृतिक मंच पर जवाहर लाल नेहरू फिसड्डी निकले. भारत के डिफेंस में उन्होंने ऐसे कमांडर्स को चुना जो लड़ाई में हारने वाले थे क्योंकि जो लड़ाई जीतने वाले कमांडर थे वो उन्हें अभिमानी लगते थे. नेहरू की ये धारणा थी कि राजपूत, सिख और जाट सेना अध्यक्ष नहीं होने चाहिए. जवाहर लाल नेहरू की इस गलती के कारण भारत को चीन के साथ लड़ाई में जबरदस्त शिकस्त मिली थी, एयरफोर्स का प्रयोग नहीं किया गया.

हिंदुओं के लिए नहीं किया काम

जवाहर लाल नेहरू में बहुत बड़ी कमजोरी थी, लेकिन उनमें विशेषता भी थी. उन्होंने रोटी की समस्या को दूर किया, अभी जितने भी नहर में पानी की सुविधा मिलती है, सिचांई की सुविधा मिलती है, उसमें 80 प्रतिशत से ऊपर काम नेहरू द्वारा किया गया है. सांस्कृतिक क्षेत्र में हिंदुओं को मश्क्कत करनी पड़ रही है क्योंकि मथुरा, काशी या अयोध्या विवाद ये सभी 1947 से 1950 तक हल हो सकते थे. लेकिन नेहरू ने सभी को लंबित रखा. सभी की अपनी-अपनी सोच होती है. कुल मिलाकर जवाहर लाल नेहरू को यह कहा जा सकता है कि वो साम्यवाद के खिलाफ थे. नेहरू द्वारा हिंदुओं के लिए अच्छे से काम नहीं किया गया.

प्रचार-प्रसार करने के लिए नार्थ ईस्ट में फादर्स को अनुमति दी गई, वहीं हिंदुओं और सिखों को अनुमति नहीं मिली, नेहरू पक्षपात करते थे. जब कश्मीर के महाराजा ने जम्मू-कश्मीर दिया तब जम्मू-कश्मीर का कानून भारत से अलग रखा गया. वहां धारा 370 लगाकर एक बिमारी छोड़ दी गई. धारा 370 राष्ट्र विरोधी शक्तियों को प्रोत्साहन देने का काम करता था. जम्मू-कश्मीर में लगभग 90 प्रतिशत से अधिक भारतीय समर्थकों को मारा गया. कश्मीर भारत का है, हिंदू कभी भी गैर धर्मनिरपेक्ष (Non Secular) नहीं हो सकते, जो सभी जीव में ईश्वर का अंश देखते है वो कभी भी मानवता विरोधी कार्य नहीं कर सकते.

कांग्रेस बन गई है थर्ड ग्रेड पार्टी

नेहरू में अच्छाइयां थी कि वह इंसान को महत्व देते थे, लोकतांत्रिक चर्चा को हमेशा प्रोत्साहित करते थे. जनतंत्र की लोकतंत्र की भावना की रक्षा करते थे. भारत में जनतंत्र सफल रहा उसमें निश्चित रूप से नेहरू का योगदान है. नेहरू वैज्ञानिक स्वभाव (Scientific Temper) वाले व्यक्ति को बढ़ावा देते थे. भारत में जितने भी आईआईटी, इंजिनियरिंग या स्पेस साइंस में पढ़ाई को बढ़ावा मिला वो नेहरू की देन है.

परिवारवाद गलत चीज है. परिवार को कोई भी व्यक्ति यदि अपनी योग्यता से आगे बढ़ता है तो उसपर रोक नहीं लगनी चाहिए. मुख्य रूप से परिवारवाद की वजह से कांग्रेस को नुकसान हुआ है. एक ऐसी पार्टी जिसने आजादी की लड़ाई लड़ने में बहुत बड़ा योगदान दिया, अब वो परिवावाद के कारण सिर्फ थर्ड ग्रेड पार्टी बनकर रह गई है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

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