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उज्जैन महाकाल मंदिर में मोबाइल ने बदला दर्शन का अंदाज...

चलो, चलो, ओ भाई! ये सेल्फी पॉइंट नहीं है, जो सेल्फी लेने भिड़े हो, बढ़ो आगे.

अरे भाई! भगवान के दर्शन मोबाइल से नहीं आंखों से करो. ये मोबाइल वाले भैया यहां मत रुको.

ओ मैडम जी! सेल्फी बाद में लेना पहले दर्शन तो कर लो भगवान के, जो करने आए हो.

इस मोबाइल को दान पात्र में डाल दोगे तो जीवन भर खुशी में रहोगे. क्यों नहीं समझते आप भगवान दर्शन करने आए हो या फोटो खींचने.

ये सारे वो जुमले हैं जो मेरे कानों में आज भी गूंज रहे हैं जब मैं ये खबर पढ़ रहा हूं कि महाकाल मंदिर में अब प्रबंधन गर्भगृह और नंदी हाल में फोटोग्राफी पर पाबंदी की सोच रहा है. उस दिन हम चंद्र ग्रहण की कवरेज के लिए महाकाल मंदिर के नंदी हाल के सामने वाली रेलिंग पर थे. जहां से हमें तकरीबन कुछ-कुछ अंतराल के बाद लाइव कवरेज कर ये बताना था कि जब सारे देश के मंदिरों के पट बंद हैं तब महाकाल मंदिर में दर्शन हो रहे हैं. उस ग्रहण के दिन भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन को आ रहे थे.

कवरेज के उन कुछ घंटों में हमने देखा कि मंदिर में भगवान के दर्शन का अंदाज भी मोबाइल ने कितना बदल दिया है. मंदिर के बाहर से रेलिंग के सहारे सहारे लंबी कतार के बाद जैसे ही श्रद्धालु भगवान की मूर्ति के सामने आता है तुरंत मोबाइल को हाथ में लेकर कैमरे में कैद करने के एंगल बनाने लगता है. कभी जूम तो कभी वाइड एंगल से तस्वीर लेने में आगे वाला श्रद्धालु व्यस्त हो जाता है पीछे वाला आगे वाले की इस हरकत पर इसलिए आपत्ति नहीं करता कि उसे भी तो यही करना है. उसका हाथ भी अपनी जेब में मोबाइल निकालने में व्यस्त रहता है.

नंदी हाल के सामने बनी रेलिंग में कुछ रेलिंग दूर तो कुछ पास से गर्भगृह में विराजे भगवान महाकाल के दर्शन कराती हैं. आगे वाली रेलिंग आम तौर पर वीआईपी या ज्यादा पैसों का टिकट लेने वालों को दर्शन लाभ दिलाती है. वहां भीड़ कम होती है इसलिए वहां पर फोटो, तस्वीर और सेल्फी की मनमानी करने की छूट पीछे की रेलिंगों के मुकाबले ज्यादा होती है. आगे की रेलिंग में खडे़ होकर लोग मनमर्जी से सेल्फी लेने की कोशिश करते दिखते हैं. बैकग्राउंड में महाकाल के सेल्फी कभी अकेले तो कभी सबके साथ. इसमें भक्त ये भूल जाते हैं कि मंदिर के अलिखित नियमों में ये भी होता है कि भगवान के विग्रह को पीठ नहीं दिखाई जाती, मगर महाकाल के बैकग्राउंड में सेल्फी लेनी हो तो महाकाल तो बैक में ही होंगे.

किसे परवाह है पीठ की. परवाह तो बस अच्छे एंगल और सेल्फी में अपने चमक रहे चेहरे की होनी चाहिए जिसे यहां से हटते ही जब सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाए तो कमेंट की बाढ़ आ जाए. सेल्फी बाजों से अलग कुछ लोग और बडे़ वाले हैं वो मंदिर में प्रवेश करते ही मोबाइल पर वीडियो कॉलिंग कर कमेंटी करने लगते हैं और दूर बैठे दोस्त माता-पिता पत्नी प्रेमिका को पूरा ब्यौरा देने लगते हैं एकदम लाइव कमेंट्री सरीखा. ये देखो भगवान महाकाल बैठे हैं वहां दूर कितना अच्छा श्रृंगार किए हैं, प्रणाम कर लो और जो मांगना हो मांग लो. हां, अगली बार तुमको भी साथ लाउंगा. वगैरह वगैरह.

ऐसे लाइव कमेंट्री करने वालों, मोबाइल के सेल्फी बाजों को मंदिर में रेलिंग पर तैनात महिला कर्मचारी ही वो कमेंट करती हैं जो मैने ऊपर लिखे हैं. महाकाल मंदिर के अंदर के हाल में फोटोग्राफी पर पाबंदी पर इन महिलाओं को फोटो बाजों और सेल्फी के दीवानों से थोड़ी राहत मिलेगी और कम समय में ज्यादा लोग दर्शन कर सकेंगे.

ये तो था अंदर का हाल बाहर जब आप दर्शन कर मंदिर परिसर में निकलेंगे तो अलग ही नजारा दिखता है. आप ये देखकर भौंचक्के रह जाते हैं कि ये सारे लोग शिखर की ओर सिर से ऊपर हाथ उठाकर क्या कर रहे हैं. थोडी देर में समझ में आता हैं कि लोग हाथ ऊपर कर खडे़ हैं और पीछे से उनके भाई भगिनी भार्या तस्वीर खींच रहे हैं. एंगल ये है कि शिखर की ओर नमस्कार करते रोमांचित करती तस्वीर आए.

यहां भी मोबाइल से ही काम हो रहा है. कुछ ऐसे भी निकले जिन्होंने महाकाल मंदिर के आंगन में थोडे़ ठुमके लगाकर रील बना ली और जब अपलोड की तो मुश्किल में पड़ गए. तो रील तो नहीं मगर हां महाकाल के मंदिर में अब गर्भगृह नंदी हाल रेलिंग से लेकर परिसर के आंगन तक में मोबाइल बाजों का जलवा अलग-अलग अंदाज में दिखता है और जो दिखता है वही बिकता है.

इस बहाने बड़ी संख्या में माथे पर चंदन और जय महाकाल लिखी टीशर्ट या शर्ट पहने युवा वर्ग की भीड़ भी दिखी तो पहले इन मंदिरों से गायब थी. मेरा देश बदल रहा है तेजी से धार्मिक हो रहा है आप मान सकते हैं, मगर इसमें मोबाइल की बड़ी भूमिका है जिससे आप इंकार नहीं कर सकते क्योंकि जय महाकाल के एक दो मैसेज सुबह-सुबह तो आपके पास आते ही होंगे.

उज्जैन कलेक्टर आशीष सिंह भी कहते हैं कि मोबाइल से फोटोग्राफी से प्रबंधन को परेशानी तो है मगर मंदिर में मोबाइल ले जाने से रोक नहीं सकते. सामान्य दिनों में एक लाख तो छुट्टी के दिन करीब दो लाख लोग मंदिर आ रहे हैं तो उनके मोबाइल को रखना भी एक बड़ा काम होगा, मगर हां, नंदीहाल और गर्भगृह में फोटोग्राफी तो पूरी तरह मनाही हो जाएगी. मोबाइल ने मंदिर दर्शन का अंदाज और रिवाज भी बदल दिया है महाकालेश्वर मंदिर में कुछ वक्त बिताने के बाद आप महसूस कर लेंगे.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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