एक्सप्लोरर

Opinion: मिशिगन का चुनावी नतीजा और एपेक की कमजोर होती सियासी पकड़

अमेरिका की सियासत और एपेक, एक सिक्के के मानों दो पहलु हैं. डेमोक्रेट हो या रिपब्लिक इन पार्टी के नेताओं के राजनितिक चेतना में ये सोंच भीतर तक बैठी हुई थी कि अमेरिकी कांग्रेस में पहुंचने का रास्ता एपेक से होकर गुज़रता है. यानी बिना इजरायली लॉबी के समर्थन के चुनाव नहीं जीता जा सकता, लेकिन मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी ने इस धारणा को जोर का झटका दिया है. प्रोग्रेसिव नेता अब्दुल एल-सैयद ने डेमोक्रेटिक पार्टी के एस्टैब्लिशमेंट की पसंद मानी जा रही हेली स्टीवंस को हरा दिया. 

यह कोई मामूली चुनाव नहीं था. इस सीट पर अमेरिका के इतिहास के सबसे महंगे प्राइमरी चुनावों में से एक लड़ा गया. AIPAC और उससे जुड़े बाहरी समूहों ने करोड़ों डॉलर के विज्ञापन चलाए, लेकिन नतीजे में उनके हाथ में सिर्फ मायूसी लगी. इस चुनाव ने अमेरिका के राजनेताओं के दिल में ये शक जरूर पैदा कर दिया है कि सिर्फ एपेक के सहारे चुनावी वैतरणी पार करना एक सुरक्षित राजनितिक रणनीति नहीं है. जाहिर है कि ये सिर्फ चुनावी उलटफेर नहीं है, बल्कि अमेरिका की राजनीति में एक बड़े बदलाव की शुरुआत है.

हलांकि यह  कहना जल्दबाज़ी होगी कि AIPAC खत्म हो गया या उसका असर समाप्त हो गया, लेकिन इतना तय है कि उसकी राजनीतिक पकड़ अब पहले जैसी निर्विवाद नहीं रह गई है. अब एपेक को भी ये एहसास तो होने ही लगा होगा कि सिर्फ पैसा, टीवी विज्ञापन और लॉबिंग हर चुनाव का नतीजा अब तय नहीं कर रही है. सवाल उठना लाज़िमी है कि इस बदलाव की सबसे वजह क्या है? इस बदलाव की वजह है नई पीढ़ी. पिछले लगभग दो साल से गाजा की तस्वीरें पूरी दुनिया देख रही हैं. हजारों बच्चों और आम नागरिकों की मौत, बर्बाद होते अस्पताल, स्कूल और राहत शिविर, इन सबने अमेरिका के युवाओं के एक बड़े हिस्से की सोच बदल दी है. बहुत से युवा मतदाता अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर अमेरिका बिना शर्त इजरायल का समर्थन क्यों करता है?

यही वजह है कि आज डेमोक्रेटिक पार्टी के अंदर एक नया प्रोग्रेसिव धड़ा लगातार मजबूत हो रहा है. डेमोक्रेटिक सेनेटर बर्नी सैंडर्स ने जिस राजनीति की शुरुआत की थी, उसे अब अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़, अब्दुल एल-सैयद, ज़ोहरान ममदानी और दूसरे युवा नेता आगे बढ़ा रहे हैं. इन नेताओं का फोकस सिर्फ विदेश नीति नहीं है. वे हेल्थकेयर, अमीरों पर टैक्स, मजदूरों के अधिकार, चुनावी फंडिंग में सुधार और कॉरपोरेट लॉबिंग को सीमित करने की भी बात करते हैं, लेकिन गाजा का मुद्दा उनकी पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है.

यही बात इस चुनाव को अलग बनाती है. अब्दुल एल-सैयद ने सिर्फ यह नहीं कहा कि वह सीनेटर बनना चाहते हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान बार-बार कहा कि "मिशिगन बिकाऊ नहीं है." उनका सीधा निशाना बाहरी पैसे और चुनावों पर लॉबी के बढ़ते असर पर था. यह संदेश खासकर युवाओं और अरब-अमेरिकी मतदाताओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ. यहां एक और दिलचस्प बात है. कुछ साल पहले तक अमेरिका में कोई नेता अगर इजरायल की खुलकर आलोचना करता था तो उसका राजनीतिक करियर लगभग खत्म माना जाता था, लेकिन आज हालात बदल रहे हैं. अब डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ रही है जो खुलकर युद्धविराम, फ़िलिस्तीनियों के अधिकार और अमेरिकी सैन्य सहायता पर सवाल उठा रहे हैं. ये चाहे इजरायल हो या यूक्रेन.

यानी बहस अब हाशिए पर नहीं रही, मुख्यधारा में पहुंच चुकी है. इसीलिए इंडिपेंडेंट मीडिया, जैसे मेहदी हसन और कई दूसरे विश्लेषक, लंबे समय से यह दलील देते रहे हैं कि गाजा युद्ध ने अमेरिकी राजनीति में एक पीढ़ीगत बदलाव पैदा कर दिया है. सोशल मीडिया पर पली-बढ़ी नई पीढ़ी सिर्फ टीवी विज्ञापन देखकर राय नहीं बनाती. वह अलग-अलग स्रोतों से जानकारी लेती है, वीडियो देखती है, तथ्य जांचती है और फिर फैसला करती है. यही वजह है कि करोड़ों डॉलर के विज्ञापन भी अब वैसा असर नहीं छोड़ पा रहे, जैसा पहले छोड़ते थे, लेकिन तस्वीर का एक दूसरा रूख भी है.

एपेक का असर खत्म हो गया ये मानना जल्दबाज़ी होगी. AIPAC आज भी अमेरिका की सबसे ताकतवर लॉबियों में शामिल है. उसके समर्थित उम्मीदवार कई चुनाव जीतते भी हैं. इसलिए मिशिगन का नतीजा किसी युग के अंत का ऐलान नहीं, बल्कि एक नई राजनीतिक चेतना और बहस और बदलाव की शुरुआत ज़रूर माना जा सकता है. शायद सबसे बड़ा संदेश यही है कि अमेरिकी मतदाता, खासकर युवा, अब पहले से ज्यादा स्वतंत्र होकर वोट दे रहे हैं. वे सिर्फ पार्टी लाइन नहीं देख रहे, बल्कि उम्मीदवार का रूख भी देख रहे हैं.

विदेश नीति, गाजा, चुनावी फंडिंग और कॉरपोरेट प्रभाव जैसे मुद्दे अब वोटिंग के फैसले को प्रभावित करने लगे हैं. अगर आने वाले महीनों और वर्षों में ऐसे और नतीजे सामने आते हैं, तो यह मानना पड़ेगा कि अमेरिका की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां चुनाव सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि विचारों से भी जीते जाएंगे. मिशिगन की यह जीत शायद उसी नई कहानी का पहला बड़ा अध्याय है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.]

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
Advertisement
Advertisement
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

MLC चुनाव: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हारी BJP, गडकरी-फडणवीस का गृह जिला भी नहीं बचा?
MLC चुनाव: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हारी BJP, गडकरी-फडणवीस का गृह जिला भी नहीं बचा?
बेगूसराय में बड़ा हादसा, ढाब नदी में 20 लोगों से भरी नाव पलटी, दो अब भी लापता
बेगूसराय में बड़ा हादसा, ढाब नदी में 20 लोगों से भरी नाव पलटी, दो अब भी लापता
MLC चुनाव पर PM मोदी के पोस्ट पर भड़क गई कांग्रेस, पवन खेड़ा बोले- नागपुर में कौन जीता?
MLC चुनाव पर PM मोदी के पोस्ट पर भड़क गई कांग्रेस, पवन खेड़ा बोले- नागपुर में कौन जीता?
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा, अमृतसर से 2.50 लाख में खरीदी गई थी जिगाना पिस्टल
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा, अमृतसर से 2.50 लाख में खरीदी गई थी जिगाना पिस्टल

वीडियोज

Sansani: बैंक का 'गोलमाल'... ग्राहक 'कंगाल' !
Ballot Paper पर जीरो, अब क्या करेगी Congress?
Form-6 पर Supreme Court में क्या बहस हुई? सटीक विश्लेषण
MLC का नतीजा UP में 2027 का करेगा फैसला? सटीक विश्लेषण
YRKKH:🫨Badi Dadi ने मेहमानों के सामने Abhira को दिए ताने, बवाल के बीच Maira-Kabir का हुआ सामना  #sbs

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
MLC चुनाव: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हारी BJP, गडकरी-फडणवीस का गृह जिला भी नहीं बचा?
MLC चुनाव: PM मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हारी BJP, गडकरी-फडणवीस का गृह जिला भी नहीं बचा?
बेगूसराय में बड़ा हादसा, ढाब नदी में 20 लोगों से भरी नाव पलटी, दो अब भी लापता
बेगूसराय में बड़ा हादसा, ढाब नदी में 20 लोगों से भरी नाव पलटी, दो अब भी लापता
MLC चुनाव पर PM मोदी के पोस्ट पर भड़क गई कांग्रेस, पवन खेड़ा बोले- नागपुर में कौन जीता?
MLC चुनाव पर PM मोदी के पोस्ट पर भड़क गई कांग्रेस, पवन खेड़ा बोले- नागपुर में कौन जीता?
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा, अमृतसर से 2.50 लाख में खरीदी गई थी जिगाना पिस्टल
टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में बड़ा खुलासा, अमृतसर से 2.50 लाख में खरीदी गई थी जिगाना पिस्टल
WPL 2027 के लिए सभी 5 टीमें, ऑक्शन में किसने किसे खरीदा? जानें A टू Z डिटेल
WPL 2027 के लिए सभी 5 टीमें, ऑक्शन में किसने किसे खरीदा? जानें A टू Z डिटेल
विकसित भारत 2047 की UN रिपोर्ट को लेकर अभिजीत दीपके का सरकार पर तंज, क्या कहा?
विकसित भारत 2047 की UN रिपोर्ट को लेकर अभिजीत दीपके का सरकार पर तंज, क्या कहा?
वडोदरा: परिवार के 3 सदस्यों की फंदे से लटकी मिली लाश, सामूहिक सुसाइड से हड़कंप
वडोदरा: परिवार के 3 सदस्यों की फंदे से लटकी मिली लाश, सामूहिक सुसाइड से हड़कंप
मौत को दिखाई आंख... उफान मारती नदी में जेट स्की लेकर उतरा शख्स
मौत को दिखाई आंख... उफान मारती नदी में जेट स्की लेकर उतरा शख्स
Embed widget