एक्सप्लोरर

कोरोना टाइम को बच्चों के लिए किस तरह रचनात्मक और सहनीय बनाया जाए?

देशव्यापी लॉकडाउन के चलते लोग प्रायः घरों में सिमटे हुए हैं. सामाजिकता और सह-अस्तित्व का उत्सव मनाने वाले मानव के लिए एकांत व सामाजिक दूरी असहनीय और अव्यावहारिक है.

जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसे कोविड-19 यानी नए कोरोना वायरस ने प्रभावित न किया हो. कोरोना के संदिग्ध शिकारों और संक्रमण की पुष्टि हो जाने वाले लोगों की विकट मानसिक दशा का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.

देशव्यापी लॉकडाउन के चलते लोग प्रायः घरों में सिमटे हुए हैं. सामाजिकता और सह-अस्तित्व का उत्सव मनाने वाले मानव के लिए एकांत व सामाजिक दूरी असहनीय और अव्यावहारिक है. सोशल डिस्टेंसिंग, आइसोलेशन और सेल्फ क्वारेंटाइन तभी कारगर होता है, जब लोग इन्हें सहजता से स्वीकार करें. मौजूदा एकांत थोपा गया अजाब है, जिससे तनाव बढ़ना स्वाभाविक है. लंबे समय तक घर में बंद और महदूद होने का असर बोरियत और मानसिक तनाव से आगे बढ़कर अब मनोरुग्णता में बदलने लगा है. अमेरिका, इटली, स्पेन, जर्मनी, ईरान और चीन समेत कई देशों में इन परेशानियों से जुड़ी एडवाइजरी और हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं. लेकिन भारत जैसे देश में, जहां पहले ही मानसिक बीमारियों के प्रति जागरूकता बहुत कम है, वहां अभी कोरोना के मरीज जांच और उपचार के स्तर पर ही संभाले नहीं संभल रहे हैं, तो इसके सामाजिक और मनोवैज्ञानिक असर की चर्चा करने की फिक्र और फुर्सत किसे है.

मनोवैज्ञानिक असर इसलिए अटल और स्वाभाविक है कि कोरोना के विश्वव्यापी असर से पूरी दुनिया के भीषण आर्थिक मंदी में घिर जाने का खतरा पैदा हो गया है और भारत में उद्योग-धंधों की रीढ़ कहे जाने वाले कामगार वर्ग के अभूतपूर्व विपरीत पलायन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए दूरगामी दहशत पैदा कर दी है. इस दहशत के साये में लंबे समय तक घर से बाहर न निकलने का कामकाजी वर्ग के दिमाग पर असर ठीक वैसा ही होगा, जैसा किसी निजी त्रासदी का होता है.

लॉकडाउन समाप्त होने के बाद कच्चे माल की अनुपलब्धता, वर्किंग कैपिटल की नामौजूदगी, मशीनों की ओवरहॉलिंग के अभाव और कुशल कामगारों की अनुपस्थिति मझोले और छोटे उद्योगों को तो ले ही डूबेगी. इनसे जुड़े कुशल कर्मचारियों और मध्यम वर्ग को बैंक लोन, घर और वाहन की ईएमआई तथा बच्चों की मोटी फीस जुटाने की अनिश्चितता ने और ज्यादा मानसिक उलझनों में डाल दिया है. परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग घबराहट, व्याकुलता, व्यग्रता, चिंता, हताशा, उदासी और बाकी मानसिक तकलीफों की शिकायत करने लगे हैं. निश्चित ही संक्रमण का डर, बेरोजगारी की आशंका, वित्तीय परेशानियां और भविष्य में आर्थिक तंगी की चिंता लोगों पर अमिट और नकारात्मक प्रभाव छोड़ेगी.

सबसे नाजुक स्थिति विभिन्न आयु-समूहों के बच्चों और विद्यार्थियों की है. भारत में बच्चों के स्कूल और कॉलेज बंद हैं. उनके लिए सुकून की बात यह है कि मार्च के पहले ही शिक्षण-सत्र का पाठ्यक्रम लगभग पूरा कर लिया गया है. यह रिवीजन का वक्त होता है. लेकिन उनकी हर स्तर की परीक्षाएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो चुकी हैं. इसलिए मानसिक स्तर पर वे वर्तमान पाठ्यक्रम से मुक्त नहीं हो सके हैं. रिजल्ट की अनिश्चितता का दबाव वे सपनों तक में झेल रहे हैं. मनोवैज्ञानिक रवींद्र देओल का मानना है कि कोरोना के भय से स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे और कॉलेज जाने वाले युवा सबसे अधिक प्रभावित होंगे. परिवार और अभिभावक उन पर कई तरह की बंदिशें लगा रहे हैं. इससे उनमें एक तरह का निराशावादी रवैया उपजेगा.

अपनी बालसुलभता में जो वे करना चाहते हैं, कर ही नहीं पा रहे हैं. बड़ों की तरह ही बच्चे भी सामाजिक जीव होते हैं, अपने समूह में रहना पसंद करते हैं, साथियों से मिलना चाहते हैं, उनसे बात करना चाहते हैं लेकिन इस पर रोक लगा दी गई है. मुश्किल वक्त में बच्चे सलाह और मदद के लिए अपने मां-बाप की ओर उम्मीद भरी नजरों से निहारते हैं. लेकिन खुद माता-पिता को परेशान देख कर उनकी हताशा और बढ़ जाती है. अभिभावकों को खुद आत्मविश्वास से भरा दिखते हुए उनकी हताशा और चिंता दूर करनी होगी. बच्चों को समझाना होगा कि कोरोना वायरस वैसा ही है, जैसा उन्हें खांसी-जुकाम या उल्टी या दस्त कराने वाला वायरस होता है. उन्हें यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि बहुत सी बातें माता-पिता के नियंत्रण में भी नहीं होती हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी एडवाइजरी में कहा गया है कि ऐसी खबरों को देखने, सुनने और पढ़ने से बचें जो आपको परेशान करती हों. इनमें कोरोना से जुड़ी जानकारियां भी शामिल है. आम तौर पर परीक्षाओं के बाद का समय घर से दूर कहीं यात्रा करने, नाना-नानी, दादा-दादी के पास रहने या गांव के उन्मुक्त माहौल में चले जाने का मधुरिम समय होता है. घरों में कैद बच्चे पिछले साल की छुट्टियों के मजे याद करते हुए दिन-रात वही खिड़की-दरवाजे देख-देख कर तंग आ चुके होंगे. इसलिए बेहतर होगा कि बच्चों से दिन भर कोरोना की भयावहता से संबंधित जानकारियां शेयर न की जाएं. इसके बजाए उन्हें कोई म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट, कोई नई भाषा, चित्रकारी, राइटिंग, कुकिंग, सिलाई-बुनाई या फिरकैलीग्राफी और बीटबॉक्सिंग जैसा कोई नया कौशल सीखने की सलाह दी जाए. इसमें यूट्यूब और ऑनलाइन ट्यूटोरियल खासे मददगार साबित हो सकते हैं. इसके अलावा किताबें, इंटरनेट पर मौजूद ज्ञान का खजाना, एमेजॉन प्राइम और नेटफ्लिक्स जैसे मंचों पर मौजूद शानदार कंटेट भी उनके वक्त बिताने का बेहतरीन जरिया साबित हो सकता है.

बच्चों को प्रोग्रेसिव मसल्स रिलेक्सेशन और मेडीटेशन जैसे तरीके भी ऑनलाइन सिखाए जा सकते हैं. लेकिन इस सबका ओवरडोज भी नहीं होना चाहिए. एकल परिवारों की संरचना आइसोलेशन के लिए बिल्कुल उपयुक्त नहीं होती. लॉकडाउन के दरम्यान बच्चों का माता-पिता से फेस टू फेस कम्युनिकेशन राहत देता है, लेकिन आस-पड़ोस के बच्चों और स्कूल के सहपाठियों से दूरी तब भी उन्हें कुंठित और डिप्रेस करती है. वयस्कों की ही तरह अच्छी नींद, पोषक भोजन, साफ वातावरण, खेल-कूद, रचनात्मक सक्रियता और समवयस्कों से मेल-जोल बच्चों की मूलभूत ज़रूरतें हैं. ऐसे में दूर बैठे रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों से लगातार फोन पर संपर्क बनाए रखना यावीडियो चैट करना उनके लिए सेफ्टी बॉल्व बन सकता है. किशोरवय के बच्चों को खाना बनाने, घर की साफ-सफाई या दीगर घरेलू काम निपटाने में शामिल किया जा सकता है.

यदि आपके घर में ग्रीन एरिया हो तो बच्चों के साथ थोड़ा समय वहां गुजारें और यदि ग्रीन एरिया नहीं है, तो उनके साथ सुबह-शाम छत पर घूमें. बच्चों के साथ रोज सूर्योदय व सूर्यास्त देखने पर आपका ध्यान भी कोरोना से हटेगा. कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन को सकारात्मक बनाना आपके हाथ में है. आपाधापी भरे जीवन के बीच मयस्सर हुए इस दुर्लभ एकांत में अपने अब तक के जीवन को पलट कर निहारें और उसकी समीक्षा करें. पुराने एल्बम देखें और अपनी संतान के साथ उनसे जुड़ी यादें साझा करें. परिवार के साथ शतरंज, कैरम व लूडो जैसे सामूहिक खेल खेलें. अपनी भावनाएं खुल कर साझा करें. अलग-अलग तरह का खाना मिलजुल कर पकाएं और घर को सुव्यवस्थित करने में एक दूसरे की मदद करें. इसे देखकर बच्चों में भी आपसी सहयोग की भावना विकसित होगी. पुस्तकें पढ़ें और डायरी लिखें. यदि आप गाना गाने के शौकीन हैं, तो उसकी रिकॉर्डिंग करें, फिर बच्चों को सुनाएं और उनकी राय लेकर उसे ठीक करें. दिन भर में कम से कम एक बार आईने के सामने खड़े होकर अपनी बॉडी लैंग्वेज पर फोकस करें. डरावनी खबरों के बीच खुद से खुद की मुलाकात करवाएं.

लॉकडाउन खत्म होगा तो फिर वही घर और दफ्तर के बीच की चूहा दौड़ शुरू हो जाएगी. बच्चे अपने स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और परीक्षा की दौड़ में शामिल हो जाएंगे. क्या यह अद्भुत नहीं होगा कि इस जड़ और अनुत्पादक समय को बड़ों और बच्चों के बीच रिश्तों की ऊष्मा पैदा करने वाली गतिविधियों से जीवंत और रचनात्मक बना दिया जाए!

लेखक से ट्विटर पर जुड़ने के लिए क्लिक करें-  https://twitter.com/VijayshankarC

और फेसबुक पर जुड़ने के लिए क्लिक करें-  https://www.facebook.com/vijayshankar.chaturvedi

(उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

Israel-Iran War: ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें ये क्या है और इससे दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें ये क्या है और इससे दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
JNU में पुलिस-छात्रों में टकराव, 26 तारीख को लॉन्ग मार्च में भिड़ंत के बाद 14 गिरफ्तार; AISA ने लगाए गंभीर आरोप
JNU में पुलिस-छात्रों में टकराव, 26 तारीख को लॉन्ग मार्च में भिड़ंत के बाद 14 गिरफ्तार; AISA ने लगाए गंभीर आरोप
साहिबजादा फरहान ने ऐतिहासिक शतक से तोड़े 5 बड़े रिकॉर्ड, 'सिक्सर किंग' बन वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया
साहिबजादा फरहान ने ऐतिहासिक शतक से तोड़े 5 बड़े रिकॉर्ड, 'सिक्सर किंग' बन वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया
'मेरे पास 1200 करोड़ का काम है', राजपाल यादव बोले 'बच्चों ने अपनी गुल्लक के पैसे भी भेजे'
'मेरे पास 1200 करोड़ का काम है', राजपाल यादव बोले 'बच्चों ने अपनी गुल्लक के पैसे भी भेजे'
ABP Premium

वीडियोज

Mayank Agarwal : 'नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की चांदी' ।  Ideas Of India Summit
Ganga Sambhaji Kadam : गंगा संभाजी कदम की कहानी रुला देगी ! ।  Ideas Of India Summit
Pankaj Tripathi : बोले पंकज त्रिपाठी...अब मैं घमंडी बनूंगा ।  Ideas Of India Summit
A.S. Dulat And Asad Durrani : कैसे सुलझेगी भारत-पाक की लड़ाई ? ।  Ideas Of India Summit
Siddhant Chaturvedi : बलियाब्वॉय सिद्धांत का शानदार इंटरव्यू ।  Ideas Of India Summit

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
Israel-Iran War: ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें ये क्या है और इससे दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
ईरान ने बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जानें ये क्या है और इससे दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
JNU में पुलिस-छात्रों में टकराव, 26 तारीख को लॉन्ग मार्च में भिड़ंत के बाद 14 गिरफ्तार; AISA ने लगाए गंभीर आरोप
JNU में पुलिस-छात्रों में टकराव, 26 तारीख को लॉन्ग मार्च में भिड़ंत के बाद 14 गिरफ्तार; AISA ने लगाए गंभीर आरोप
साहिबजादा फरहान ने ऐतिहासिक शतक से तोड़े 5 बड़े रिकॉर्ड, 'सिक्सर किंग' बन वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया
साहिबजादा फरहान ने ऐतिहासिक शतक से तोड़े 5 बड़े रिकॉर्ड, 'सिक्सर किंग' बन वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया
'मेरे पास 1200 करोड़ का काम है', राजपाल यादव बोले 'बच्चों ने अपनी गुल्लक के पैसे भी भेजे'
'मेरे पास 1200 करोड़ का काम है', राजपाल यादव बोले 'बच्चों ने अपनी गुल्लक के पैसे भी भेजे'
तीसरे विश्वयुद्ध की कगार पर दुनिया! जानें ईरान की इजरायल और अमेरिका से दुश्मनी की पूरी टाइमलाइन
तीसरे विश्वयुद्ध की कगार पर दुनिया! जानें ईरान की इजरायल और अमेरिका से दुश्मनी की पूरी टाइमलाइन
क्रिएटिव फील्ड में करियर बनाना हुआ आसान, आईआईसीटी में 18 कोर्स और ग्लोबल इंटर्नशिप
क्रिएटिव फील्ड में करियर बनाना हुआ आसान, आईआईसीटी में 18 कोर्स और ग्लोबल इंटर्नशिप
आर-पार के मूड़ में ईरान, US के 7 एयरबेसों पर दागीं मिसाइलें, जारी की खामेनेई की सांकेतिक फोटो
आर-पार के मूड़ में ईरान, US के 7 एयरबेसों पर दागीं मिसाइलें, जारी की खामेनेई की सांकेतिक फोटो
रोड एक्सीडेंट घायलों की मदद करेंगे, तो सरकार देगी 25000 रुपये, जान लें स्कीम
रोड एक्सीडेंट घायलों की मदद करेंगे, तो सरकार देगी 25000 रुपये, जान लें स्कीम
Embed widget