एक्सप्लोरर

क्या नई कहानी लिखेगा गुजरात : BLOG

जो भी जीते जो भी हारे इतना तय है कि अगले दो सालों यानि 2019 के लोकसभा चुनाव तक होने वाले तमाम विधानसभा चुनावों में (लोकसभा चुनावों में भी) किसानों का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है.

गुजरात में पहले चरण का चुनाव निपट गया है. कुल 89 सीटों में वोट डाले गये और वोट प्रतिशत चुनाव आयोग के अनुसार 66.75 फीसद रहा जो पिछली बार के 70.50 के मुकाबले करीब पौने चार फीसद कम है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों इसे अपने पक्ष में बताकर जीत का दावा कर रहे हैं. बीजेपी का दावा है कि उसे पहले चरण में 60 से ज्यादा सीटें मिलेंगी पिछली बार उसे 63 सीटें मिली थी.

उधर कांग्रेस का कहना है उसे 54 से ज्यादा सीटें मिल रही है जबकि उसे पिछली बार 22 मिली थी. बीजेपी का दावा है कि गांवों में पाटीदार बहुल इलाकों में पिछली बार के मुकाबले कम वोट गिरा है यानि बीजेपी से नाराज पाटीदार वोट देने घर से नहीं निकला (निकलता तो बीजेपी के खिलाफ वोट देता). उधर कांग्रेस का कहना है कि नाराज वोटर ने हाथ का साथ दिया है और ऐसा सौराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों से लेकर सूरत के शहरी इलाकों तक में एकसार देखा गया है.

अब चुनाव नतीजे ही बताएंगे कि आखिर वोटर ने किसका साथ दिया है लेकिन जिस तरह से बीजेपी नकारात्मक प्रचार पर उतर आई है उससे साफ है कि उसे जनता की नाराजगी का अहसास है और वह राष्ट्रवाद के मुद्दे पर दांव खेलने लगी है. उधर कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर सरीखे कुछ नेताओं के आखिरी दौर में आए बयानों ने भी बीजेपी को गेम चेंज करने का आसान मौका दे दिया है.

जमीनी हालात कैसे हैं आइए देखते हैं...

अहमदाबाद एयरपोर्ट से टैक्सी ली और टैक्सी चालक राजपूत था. उसने बीजेपी सरकार के गुण गाने शुरु किये कहा कि बीजेपी 99 फीसद जीतेगी. नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को कोई हरा नहीं सकता कांग्रेस में दम नहीं है, हार्दिक पटेल तमाशा भर है. पांच मिनट हम चुपचाप सुनते रहे रिवर फ्रंट का आगे से गाड़ी घूमी तो उसने गियर बदलने के साथ ही सुर भी बदला. एयरपोर्ट पर उसका प्री पेड बूथ होता था वह बंद कर दिया गया. उसके पास तीन टैक्सी थी अब एक ही रह गयी है. गुजारा चलाना मुश्किल होता जा रहा है कहने लगा कि बीजेपी नेताओं की चर्बी बहुत चढ़ गयी है और इस बार उतार देनी है.

गुजरात में अगले चार दिन सौराष्ट्र से लेकर सूरत और उत्तर में मेहसाणा, पाटन बनासकांठा तक गांव देहातों में घूमते हुए चर्बी उतार देने वाली बात बहुत से लोगों के मुंह से सुनी. कुल मिलाकर दस लाइनों में गुजरात चुनाव को समेटा जा सकता है.

एक, लोग चर्बी उतार देने या कम कर देने की बात करते हैं. दो, पाटीदार बहुल गांवों में बीजेपी का भारी विरोध है. तीन, शहरों में बीजेपी की जड़ें मजबूत हैं. चार, जीएसटी से व्यापारी नाराज हैं और जीएसटी के नाम पर लूट भी हो रही है. पांच, हार्दिक पटेल की रैलियां गजब ढा रही हैं. छह, चुनाव हिंदु–मुस्लिम नहीं हुआ है. सात, युवा वोटर जिसने कांग्रेस का शासन नहीं देखा वह बदलाव की बात ज्यादा करता है. आठ, किसानों का गुस्सा चरम पर है. नौ, लोगों को लगता है कि मोदी जी दिल्ली जाकर उनको भूल गये और यहां जिनके हाथ में सत्ता सौंपी वह शासन करने लायक नहीं है. दस, आरक्षण मांग रहे पाटीदारों का कहना है कि अगर कांग्रेस ने आरक्षण नहीं दिया तो पांच साल उसे ऐसा उखाड़कर फेंकेंगे कि वह फिर अगले पचास सालों तक सत्ता में नहीं आ पाएगी.

पाटीदारों के हाथ में सत्ता की चाबी है, यहां भी तीन तरह के वोटर साफ दिखते हैं. एक, जो बीजेपी से नाराज है लेकिन कांग्रेस को वोट देने से हिचक रहे हैं. दो, जो बीजेपी से नाराज हैं और मजबूरी में कांग्रेस को वोट देंगे. तीन, कांग्रेस और बीजेपी के परपंरागत वोटर. चुनाव का चौथा कोण पाटीदार वोटों का गणित है. गुजरात में करीब एक करोड़ पाटीदार वोटर हैं इनमें से करीब 90 लाख बीजेपी को वोट देते आए हैं. जानकारों का कहना है कि अगर इन 90 लाख में चालीस लाख को कांग्रेस अपनी तरफ खींच लेती है तो वह उलटफेर करने में कामयाब हो सकती है. अब कितने लाख पाटीदार वोटर कांग्रेस की तरफ जाएंगे इस सवाल पर आकर पूरा चुनाव अटक गया है.

गुजरात चुनाव का सबसे बड़ा आर्कषण हार्दिक पटेल की रैलियां हैं. वह हर सभा में एक से डेढ़ घंटा लेट आते हैं लेकिन भीड़ जमी रहती है. जय सरदार के नारे लगाती रहती है, चक दे इंडिया फिल्म का गाना दोहराती रहती है. हार्दिक के आने के साथ ही भीड़ का उन्माद बढ़ जाता है, हार्दिक की हर बात पर तालियां बजती हैं. भीड़ हर बात पर रेस्पांस करती है हार्दिक मोबाइल की लाइट जलाने को कहते हैं और ऐसा लगता है कि पूरे मैदान में छोटे छोटे जुगनु छा गये हों. ऐसी भीड़ आरक्षण के लिए आती है. आरक्षण का फार्मूला न तो हार्दिक स्पष्ट करते हैं और न ही भीड़ हार्दिक से सफाई मांगती है.

हैरानी की बात है कि हार्दिक पटेल आरक्षण को पीछे छोड़ पूरे चुनाव को पाटीदारों की अस्मिता से जोड़ने में लगे हैं. वह इशारा करते हैं कि अगर इस बार बीजेपी जीत गयी तो वह पाटीदारों को हाशिए पर पटक देगी. अब ऐसी भीड़ सिर्फ तमाशा देखने आती है या हार्दिक पटेल के कहने पर बीजेपी को हराने यानि कांग्रेस को वोट देने भी जाएगी. हार्दिक पटेल की दो तीन रैली देखने के बाद तो यही लगता है कि बड़ा हिस्सा हार्दिक के साथ दिल से जुड़ा है. यह बात बीजेपी के लिए खतरे की पहली घंटी है.

बीजेपी के लिए खतरे की दूसरी घंटी किसानों का गुस्सा है. अहमदाबाद से सुरेन्द्रनगर, राजकोट, अमरेली की तरफ जाते हुए रास्ते में किसी भी गांव में पूछकर देखने पर किसान नाराज नजर आता है. ज्यादातर जगह पाटीदार किसान हैं जो पहले से ही आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी से खफा हैं. यहां के किसान कपास और मूंगफली की खेती करते हैं और इन दिनों कपास के भाव नहीं मिलने से दुखी हैं . उनका कहना है कि बीस किलो कपास के 800 से 900 रुपये ही मिल रहे हैं जो पहले 1200 से 1400 रुपये तक में बिकती थी और बीजेपी ने तो 1500 रुपए न्यूनतम समर्थन मूल्य का वायदा किया था. किसान कहते हैं कि खेती करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है, खेती करना मुनाफे का सौदा नहीं रहा है, सिर्फ जैसे तैसे खर्चा निकल रहा है, बारिश कम होती है, सिंचाई की सुविधा नहीं है और सूखा पड़ने पर मजदूरी तक करने को मजबूर होना पड़ रहा है.

पटेल किसानों की नजर में आरक्षण से बड़ा मुद्दा खेती का है. उनका कहना है कि अगर सरकार खेत को पानी दे दे और फसल का अच्छा भाव दे दे तो आरक्षण की जरुरत ही क्या है. बच्चा खेती करेगा वह क्यों रोजगार के लिए शहर में भटकेगा. युवा पटेल जरुर आरक्षण चाहते हैं और इनका कहना है कि अगर कांग्रेस ने वायदा नहीं निभाया तो उसे पांच साल बाद उखाड़ देंगे, इस तरह खदेड़ेंगे कि पचास सालों तक कांग्रेंस गुजरात में नजर नहीं आएगी लेकिन इस बार एक चांस जरुर देंगे.

शहर के पटेल इस सोच को पढ़े लिखों की महाबेवकूफी मानते हैं. अहमदाबाद के पाटीदार चौक पर कुछ पाटीदारों से बात हुई, वह कहते हैं हार्दिक पटेल समाज में विभाजन कर रहा है, वह कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गया है और युवाओं का भावनात्मक शोषण कर रहा है. जब कांग्रेस आरक्षण दे ही नहीं सकती तो फिर उसको वोट देने की या चांस देने की जरुरत ही क्या है. बीजेपी समर्थक पाटीदारों का कहना है कि आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी ने पाटीदारों और ओबीसी को आपस में लड़ाने की कोशिश करने के बजाए मसले को हल करने का प्रयास करना चाहिए था.

दो नैरेटिव साफ तौर पर दिखते हैं, एक का कहना है कि सत्ता पक्ष पर काफी चर्बी चढ़ गयी है जिसे कम करना है या उतार देना है. यह वर्ग 2019 में तो बीजेपी का साथ देना चाहता है लेकिन विधानसभा में बीजेपी को निपटाने को आतुर दिखता है. इसका बीजेपी से मोहभंग साफ साफ दिखता है. वहीं दूसरा नैरेटिव है कि अगर 2017 में गुजरात गया तो 2019 में केन्द्र भी चला जाएगा. इस वर्ग का कहना है कि वैसे ही विपक्ष मोदीजी को काम करने नहीं दे रहा है अगर गुजरात हाथ से निकला तो मोदीजी की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

2019 में सहयोगी दलों की मदद से सरकार बनानी पड़ी तो वह दल बात बात पर अडंगा लगाएंगे और मोदीजी खुलकर शासन नहीं कर पाएंगे. इसलिए 2019 को बचाना है तो 2017 में भी गुजरात में बीजेपी को फिर से मौका देना ही पड़ेगा. गुजरात ने 1985 में कांग्रेस को 149 सीटें देकर नयी कहानी लिखी थी. इसी गुजरात ने 2002 में दंगों के बाद नयी कहानी लिखी और नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में मोदी युग शुरु हुआ. क्या 2017 में भी नयी कहानी लिखी जाएगी ?

कुल मिलाकर अगर बीजेपी गुजरात में जीती तो वह एक मुश्किल चुनाव जीतेगी और जीत का सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाएगा. अगर कांग्रेस यह चुनाव जीती तो सारा श्रेय हार्दिक पटेल को जाएगा. हालांकि इसका सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ राहुल गांधी को मिलेगा विपक्ष में पैठ बनेगी. जो भी जीते जो भी हारे इतना तय है कि अगले दो सालों यानि 2019 के लोकसभा चुनाव तक होने वाले तमाम विधानसभा चुनावों में (लोकसभा चुनावों में भी) किसानों का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाला है. किसानों की कर्ज माफी से भी बात कहीं आगे बढ़ गयी है. यह गुजरात चुनाव का सबसे बड़ा निचोड़ है.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आकड़ें लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

BJP की नई टीम के गठन पर राजनाथ सिंह से जेपी नड्डा तक…, किसने क्या कहा?
BJP की नई टीम के गठन पर राजनाथ सिंह से जेपी नड्डा तक…, किसने क्या कहा?
बीजेपी ने लिख दी 2027 की जीत की स्क्रिप्ट! अखिलेश कैसे भेदेंगे ये चक्रव्यूह?
बीजेपी ने लिख दी 2027 की जीत की स्क्रिप्ट! अखिलेश कैसे भेदेंगे ये चक्रव्यूह?
कौन हैं Sonal Dinusha? भारत के खिलाफ पहले टेस्ट में शतक जड़ लूटी महफिल
कौन हैं Sonal Dinusha? भारत के खिलाफ पहले टेस्ट में शतक जड़ लूटी महफिल
गोविंदा ने पटाया के क्लब में किया डांस, यूजर्स बोले- क्या दिन आ गए
गोविंदा ने पटाया के क्लब में किया डांस, यूजर्स बोले- क्या दिन आ गए

वीडियोज

ChatGPT Viral Video: AI का कमाल! भीड़ में खोई चप्पल, ChatGPT ने ऐसे ढूंढ निकाली, वीडियो चौंका देगा!
Himanshi Khurana का बड़ा खुलासा, Asim Riaz संग रिश्ते में लगा था भगवान को धोखा देने का डर
Lalit Modi ने ठुकराई Bigg Boss 20 में एंट्री की खबर, Salman Khan के शो पर दिया बड़ा बयान
Shah Rukh Khan, Ajay Devgn और Tiger Shroff को Vimal Elaichi Ad पर Maharashtra FDA का नोटिस
Sansani: कैमरे में कैद मर्डर की LIVE पिक्चर

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
BJP की नई टीम के गठन पर राजनाथ सिंह से जेपी नड्डा तक…, किसने क्या कहा?
BJP की नई टीम के गठन पर राजनाथ सिंह से जेपी नड्डा तक…, किसने क्या कहा?
बीजेपी ने लिख दी 2027 की जीत की स्क्रिप्ट! अखिलेश कैसे भेदेंगे ये चक्रव्यूह?
बीजेपी ने लिख दी 2027 की जीत की स्क्रिप्ट! अखिलेश कैसे भेदेंगे ये चक्रव्यूह?
कौन हैं Sonal Dinusha? भारत के खिलाफ पहले टेस्ट में शतक जड़ लूटी महफिल
कौन हैं Sonal Dinusha? भारत के खिलाफ पहले टेस्ट में शतक जड़ लूटी महफिल
गोविंदा ने पटाया के क्लब में किया डांस, यूजर्स बोले- क्या दिन आ गए
गोविंदा ने पटाया के क्लब में किया डांस, यूजर्स बोले- क्या दिन आ गए
लखीसराय से उज्जैन तक, सावन के तीसरे सोमवार पर हादसों का कहर
लखीसराय से उज्जैन तक, सावन के तीसरे सोमवार पर हादसों का कहर
नितिन नवीन की टीम में कितने मुस्लिम? ये बने अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष
नितिन नवीन की टीम में कितने मुस्लिम? ये बने अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष
NSP Scholarship 2026: स्कॉलरशिप के लिए NSP पर आवेदन शुरू, 31 अक्टूबर तक करें अप्लाई  
स्कॉलरशिप के लिए NSP पर आवेदन शुरू, 31 अक्टूबर तक करें अप्लाई  
Flowers Not Turning into Fruit: फसल में फूल आ रहे हैं लेकिन फल नहीं बन रहे, कहीं ये कमी तो नहीं?
फसल में फूल आ रहे हैं लेकिन फल नहीं बन रहे, कहीं ये कमी तो नहीं?
Embed widget