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विकसित देशों के लिए कितना बड़ा काला धब्बा बन गया है 'बंदूक कल्चर' ?

दुनिया में अमेरिका को सबसे अधिक विकसित देश समझा जाता है, जबकि थाईलैंड विकसित होने के साथ ही एक शांतिप्रिय मुल्क है, जो दुनिया भर के पर्यटकों का एक प्रमुख केंद्र है. अमेरिका में तो पिछली दो सदियों से बंदूक कल्चर है, जहां बंदूक खरीदना सब्जी खरीदने जितना ही आसान है. उत्तरी अमेरिका से सटा हुआ ही मुल्क है मेक्सिको जिसे दुनिया में नशीले पदार्थों के कारोबार और तस्करी का सबसे बड़ा अड्डा भी समझा जाता है. इन दोनों ही देशों में गुरुवार को अंधाधुंध फायरिंग की जो वारदात हुई हैं, उसने विकसित देशों की 'बंदूक संस्कृति' पर ऐसा काला धब्बा लगाया है, जिसे धो पाना इतना आसान भी नहीं है.  

अमूमन शांत रहने वाला थाईलैंड गुरुवार को थाईलैंड गोलियों की आवाज से थर्रा उठा. उत्तरी थाईलैंड के ना क्लैंग शहर में पुलिस के एक पूर्व कर्मचारी को ऐसी सनक सवार हुई कि उसने एक चिल्ड्रन्स डे केयर सेंटर में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. फायरिंग की इस घटना में 34 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 22 बच्चे भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक 34 लोगों का बेरहमी से कत्ल करने वाले इस शख्स ने खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली. थाईलैंड मीडिया के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया है कि बंदूकधारी ने खुद को मारने से पहले अपनी पत्नी और बच्चे की हत्या कर दी, इसलिए अब ये एक ऐसा हत्याकांड बन गया है. जिसके बारे में कभी पता ही नहीं लग पायेगा कि हमलावर ने आखिर इस वारदात को अंजाम क्यों दिया था.

हालांकि थाईलैंड में इतने बड़े पैमाने पर गोलीबारी की इस घटना ने लोगों को डरा दिया, क्योंकि वहां ऐसी घटना होना बेहद दुर्लभ है. वैसे ये भी सच है कि अन्य छोटे देशों की तुलना में वहां बंदूक कल्चर ज्यादा है. साथ ही अवैध हथियार रखना भी आम बात है. साल 2020 में भी संपत्ति के सौदे से नाराज एक सैनिक ने भी ऐसे ही फायरिंग की घटना को अंजाम दिया था. उसमें 29 लोग मारे गए, जबकि 57 घायल हुए थे. मास फायरिंग की दूसरी वारदात की खबर मेक्सिको से आई है, जहां ग्युरेरो राज्य के सैन मिगुएल टोटोलापन शहर में हुई गोलीबारी में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं. मरने वालों में शहर के मेयर भी शामिल है.

बताया गया है कि मृतकों में मेयर के अलावा उनके पिता, पूर्व मेयर समेत पुलिस के अधिकारी भी मारे गए. पुलिस के अनुसार बंदूकधारियों ने बुधवार को स्थानीय समयानुसार दोपहर दो बजे सिटी हॉल पर हमला किया. सोशल मीडिया पर शेयर हो रहीं तस्वीरों में इमारत पर गोलियों के दर्जनों निशान देखे जा सकते हैं. संगठित आपराधिक गिरोह Los Tequileros को इस हमले का जिम्मेदार बताया जा रहा है. वहां के ड्रग माफिया गिरोह के हौसले कितने बुलंद हैं, इसका अंदाजा इससे ही लगा सकते हैं कि हमले के कुछ ही देर बाद Los Tequileros गिरोह के कथित सदस्यों ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर कहा कि 'वे इलाके में लौट आए हैं.

बता दें कि साल 2015 से 2017 के बीच ग्युरेरो में इस गिरोह का एकतरफा आतंक था और इसे शहरों के मेयरों को निशाना बनाने के लिए जाना जाता था. गिरोह के मुखिया रेबेल जैकोबो डी अल्मोन्टे की हत्या के बाद यह गिरोह निष्क्रिय हो गया था. इस वारदात के जरिये उसने दोबारा सक्रिय होने का ऐलान कर दिया है. डी अल्मोन्टे को El Tequilero के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वह टकीला पीता था. दरअसल, मेक्सिको पूरी दुनिया में ड्रग्स के लिए कुख्यात है और वहां दो गिरोहों के बीच ड्रग वॉर होना आम है. ड्रग माफिया इतना ताकतवर है कि उसे सरकार की किसी एजेंसी का कोई खौफ़ नहीं है. देश के जिन इलाकों में ड्रग माफ़िया ज्यादा सक्रिय है ,वहां की हवा में ही चौबीसों घंटे मौत का खतरा मंडराता राहत है. जानकर हैरानी होती है कि नशीले पदार्थों के लिए होने वाले खूनी संघर्ष में पिछले 10 सालों में एक लाख 60 हजार लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

दरअसल,मेक्सिको का ड्रग माफ़िया नये-नये तरीकों के जरिये अमेरिका में ड्रग्स भेजकर वहां की युवा पीढ़ी को बर्बाद करने में जुटा हुआ, जो कि बाइडन सरकार के लिये चिंता का विषय बन गया है. अमेरिका की पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार लाख कोशिशों के बावजूद मेक्सिको में ड्रग्स के कारोबार पर कंट्रोल नहीं कर पाई है बल्कि, अब यह और तेजी से बढ़ता जा रहा है. ड्रग एडिक्टस के चलते यहां कई माफिया सक्रिय है,जो सुरंगों या दूसरे रास्तें अपनाकर भारी मात्रा में ड्रग्स अमेरिका पहुंचाते हैं.

मेक्सिको के एक ऐसे ही कुख्यात ड्रग तस्कर राफेल कारो क्विंटरो को अमेरिकी एजेंसी एफबीआई ने मोस्ट वांटेड बताते हुए उस पर दो करोड़ डॉलर का इनाम घोषित कर रखा था. एफबीआई ने उसे 10 शीर्ष वांछित भगोड़ों की सूची में रखा हुआ था. काफी मशक्कत के बाद भी वह अमेरिकी एजेंसियों की गिरफ्त में नहीं आ पाया. आखिरकार बीते जुलाई महीने में मेक्सिको की एजेंसियों ने ही राफेल कारो क्विंटरो को गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई. सिनालोआ के चोइक्स शहर से जब उसे पकड़ा गया, तब वह झाड़ियों में छिपा हुआ था.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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