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झारखंड: 17 साल की मासूम बेटी की हत्या में क्या सरकार भी है गुनहगार?

झारखंड के दुमका में 17 साल की एक मासूम बेटी को जिंदा जलाकर मारने की घटना पर सियासत गरमा गई है. पुलिस इसे इकतरफा प्यार का मामला बता रही है लेकिन विपक्ष इसे "लव जिहाद" बताते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार को इसलिये कठघरे में खड़ा कर रहा है कि वह तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही है.

हालांकि हैवानियत का शिकार हुई इस बेकसूर छात्रा के समुचित इलाज में सरकार की तरफ से भी गंभीर लापरवाही बरती गई और अब सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी मान लिया है कि उनसे गलती हुई है जिसके लिए वे दुखी और शर्मिंदा हैं. लेकिन सवाल ये है कि पूरे समाज को हैरान कर देने वाली ऐसी घटना के बाद भी हमारे ही चुने हुए नुमाइंदे गूंगे-बहरे आखिर कैसे बन जाते हैं और ऐसी वीभत्स वारदात भी उनकी आत्मा को आखिर झकझोर क्यों नहीं पाती?

देश में इकतरफा प्यार की वारदातें पहले भी होती रही हैं जहां आरोपियों ने पीड़ित लड़की या महिला पर तेजाब फेंककर अपना बदला लिया हो लेकिन दुमका की वारदात थोड़ी ज्यादा हैरान करने वाली इसलिये है कि यहां अपने घर में सोई हुई लड़की अंकित सिंह पर पेट्रोल डालकर आग लगाई गई. इससे जाहिर होता है आरोपी शाहरुख़ किस कदर बेख़ौफ़ था कि उसे कानून का रत्ती भर भी डर नहीं था. 

बता दें कि 23 अगस्त को शाहरुख ने एकतरफा प्यार में असफल होने पर अपने पड़ोसी संजीव सिंह की 17 वर्षीय बेटी अंकिता पर अलसुबह चार बजे खिड़की से पेट्रोल उड़ेल कर आग लगा दी, जिसमें वह 90 प्रतिशत जल गयी थी. अंकिता खिड़की के नजदीक ही सो रही थी. पांच दिन तक वह जिंदगी व मौत से जंग लड़ती रही और आखिरकार रविवार को अंकिता की रांची स्थित रिम्स में मौत हो गई. उसके बाद से दुमका से लेकर रांची तक जबरदस्त तनाव बना हुआ है. हालांकि मुख्य आरोपी शाहरुख को गिरफ्तार कर लिया गया है लेकिन लोग उसे फांसी देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. 

अपनी मौत से पहले अंकिता ने मजिस्ट्रेट के आगे जो बयान दिया है,वह आरोपी को सख्त सजा दिलाने में अब एक अहम सबूत बन चुका है. उनके बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है.  इस वीडियो में अंकिता कहती हैं, "उसका नाम शाहरुख है.  वह 10-15 दिनों से हमको तंग कर रहा था.  हम स्कूल जाते थे तो आगे-पीछे करता था.  मेरा नंबर किसी से ले लिया था.  बोलता था कि बात नहीं करेगी तो ऐसे करेंगे, वैसे करेंगे. बात नहीं करेगी तो तुमको मारेंगे.सबको मारेंगे. वह बहुत लड़कियों से बात करता है. घुमाता है. धमकी दिया था हमको रात को 8-30 बजे. हम पापा को बताए थे. तब तक चार बजे सुबह ऐसा करके (आग लगाकर) चला गया. "

इस बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने ट्वीट में लिखा है कि "मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा. इसकी जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट एडीजी स्तर के अफसर से जल्द मांगी गई है. अंकिता के परिवार को 10 लाख रुपए की मदद देने का भी ऐलान मुख्यमंत्री ने किया है. 

लेकिन इस हत्याकांड को लेकर विपक्षी बीजेपी सोरेन सरकार पर हमलावर है.  पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि ये साधारण घटना नहीं है क्योंकि एक संप्रदाय विशेष के लोग लव जिहाद (love Jihad) के माध्यम से डेमोग्राफी बदलना चाहते हैं.  उन्होंने कहा कि सिर्फ डेमोग्राफिक ही नहीं बदलना चाहते बल्कि जमीन का भी जिहाद कर रहे हैं.  बांग्लादेशी जिहादियों ने अब तक 10 हजार एकड़ जमीन हड़प ली है.  दुमका की घटना से सारी मानवता, समाज और झारखंड शर्मसार हुआ है.  

उन्होंने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते  हुए कहा कि एक ओर हेमंत सोरेन सरकार उपद्रवी नदीम को एयर एंबुलेंस से भेजकर सरकारी खर्च पर इलाज करवा रही है,तो दूसरी ओर झारखंड की बेटी अंकिता को उसी के हाल पर मरने के लिए छोड़ दिया गया. 

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी विधायक बाबूलाल मरांडी का आरोप है कि बेहतर इलाज नहीं मिलने के कारण ही अंकिता की जान चली गई. मरांडी ने ट्वीट कर कहा, "जिस अस्पताल की कुव्यवस्था पर माननीय हाईकोर्ट ने यहां तक कह दिया कि इसे बंद क्यों नहीं कर देते. जहां पैरासिटामोल और सिरिंज तक नहीं हो, वहां गंभीर रूप से झुलसी बच्ची के बेहतर इलाज की कितनी अपेक्षा की जा सकती है और स्वास्थ्य मंत्री निर्लज्जता से कहते हैं कि इलाज में कोई कमी नहीं हुई. "उन्होंने दुमका में पदस्थापित एक डीएसपी पर भी सांप्रदायिक और आदिवासी विरोधी होने के आरोप लगाए और उन्हें इस मामले से अलग रखने की मांग की. वैसे मामला गरमाने के बाद सरकार ने अब उस अफसर को दुमका से हटा दिया है. 

हालांकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में कहा कि हम इस घटना पर दुखी और शर्मिंदा हैं.  उन्होंने कहा कि हम अपनी बहन (अंकिता) को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे लेकिन हम नहीं कर पाए. उन्होंने कहा कि इस मामले में आरोपी को फांसी होनी चाहिए. 

बन्ना गुप्ता ने दावा किया कि पीड़िता को दुमका से एयरलिफ्ट करवाना चाहते थे लेकिन डॉक्टर ने ऐसा ना करने की सलाह दी. बन्ना गुप्ता ने कहा- मैं बहुत मर्माहत हूं.  कहीं ना कहीं कुछ तो गड़बड़ हुई है.  मैं विश्वास दिलाता हूं सरकार किसी को भी बचाएगी नहीं. हम आरोपी को फांसी के फंदे तक पहुंचा कर दिखाएंगे.  हत्या के गुनहगार को तो अदालत अपनी  सजा सुना देगी लेकिन सवाल है कि सरकार द्वारा बरती गई इस लापरवाही की सजा उसे आखिर कौन सुनाएगा?

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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