एक्सप्लोरर

अनुभव के गलियारे से: ...जब 17 सेकेंड ने पूरी जिन्दगी को झकझोर दिया

विपत्ति में इंसान और समाज अपनी कई परतें खोलता है. मानवता की रक्षा में जुटे डॉक्टरों के साथ इस शहर ने जो किया. बदहाल वक़्त की शिला पर वह धब्बे के रूप में अंकित हो गया.

मोबाइल की रिंगटोन ने सुबह की लगी गहरी नींद में खलल डाली... अधखुली आंखों से स्क्रीन पर "मां का नंबर" तैरता दिखा. अब तक जगे नहीं. क्या खाये क्या नहीं... सवालों की झड़ी लगेगी... मन में यही सोचते हुए दाएं हाथ के अंगूठे ने हरी बत्ती को स्लाइड कर दिया... हां मां... प्रणाम... उधर से बंद नाक.. और गहरी सांसों के साथ हैलो हैलो.. मेरी आंखें चौड़ी हो गईं.. नींद गायब.. भौंए सिकुड़ने लगीं.. चिंता की लकीरों के साथ सवाल- तबीयत ठीक नहीं है क्या?...ना ना.. ठीक है. अरे...दो दिन लगातार व्रत था. सुबह सुबह नहाने और गीला तौलिया कुछ देर लपेटे रहे इसीलिए थोड़ी खांसी हो गई.

व्रत की वजह से खांसी की दवा नहीं खाई है तो भुगते--पीछे से जोर से पिता जी की आवाज आयी. मां बोली-अरे चुप रहिए.. वहां वो फालतू में चिंतित होंगे सब.. कुछ भी बोलते हैं. तब तक पिता जी फोन ले चुके थे और वह खांसना शुरू कर चुकी थीं.. आपको बता दें कि ईओसिनोफिलिया बढ़ जाता है उसका.. एक तरह की एलर्जी है. अचानक टेंपरेचर बदलने से खांसी जुकाम हो जाती है. मैं लगातार कोरोना महामारी की गंभीरता को लेकर दोनों वक्त मां पिता जी से बात करता हूं. फिर भी पिता जी कभी कभी एक आध घंटे किसी ना किसी बहाने घर से बाहर निकल जाते हैं. व्रत में दवा ना खाने पर चिल्लाते और झल्लाते हुए पिता जी बोले- बताओ और इसको समझाओ कि बाहर क्या हाल है...कोई कहीं निकल भी नहीं सकता. बताओ मर जाएगी तो कोई शव उठाने भी आजकल नहीं आएगा. पिता जी अपनी रौं में बोलते जा रहे थे और मुझे महाराष्ट्र में एबीपी न्यूज के वरिष्ठ पत्रकार जीतेंद्र दीक्षित की रिपोर्ट मेरे आंखों के सामने झलकने लगी. खुद को उसमें देखने लगा.. अब पिता जी के शब्द कानों पर गिर तो रहे थे, लेकिन दिमाग में मेरे फिल्म की तरह वह रिपोर्ट चलने लगी.. खुद को ऐसा जोड़ा कि पसीने से तर बतर हो गया.

दरअसल महाराष्ट्र के ठाणे में फर्नीचर का कारोबार करने वाले भैरों लाल लोहार को 25 मार्च को उस वक्त सदमा लगा जब खबर आई कि उनकी मां रूक्मिणी बाई का राजस्थान के राजसमंद जिले में निधन हो गया है. अपनी मां के इकलौते बेटे होने के चलते भैरों लाल का उनके अंतिम संस्कार में जाना जरूरी था. उन्हीं के हाथ से अंतिम संस्कार होना था. अब समस्या थी कि कर्फ्यू के दौरान घर से बाहर कैसे निकलें.

अनुभव के गलियारे से: ...जब 17 सेकेंड ने पूरी जिन्दगी को झकझोर दिया

(लॉकडाउन के दौरान की एक तस्वीर)

उन्होंने एक एंबुलेंस का इंतजाम किया. जिसमें बैठकर भैरों लाल और उनका परिवार राजस्थान जा सकता था. भैरों लाल ने व्हॉट्सएप के जरिए गांव से मां का मृत्यु प्रमाण पत्र मंगाया. इस प्रिंटआउट के आधार पर स्थानीय पुलिस से बाहर निकलने की अनुमति ले ली. सफर के दौरान पूरे महाराष्ट्र भर में तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई. लेकिन गुजरात के बॉर्डर पर पहुंचते ही गुजरात पुलिस ने उन्हें रोक दिया. पुलिस उनकी एक सुनने को तैयार नहीं हुई. उन्होंने रोते गिड़गिड़ाते खूब फरियाद की. लेकिन उन्हें आगे नहीं जाने दिया गया. वे मोबाइल पर वीडियो कॉल के जरिये अपनी मृत मां का शव भी सबूत के तौर पर दिखाने लगे, लेकिन पुलिसकर्मियों का पारा चढ़ गया. उन्होंने मोबाइल ही उठाकर फेंक दिया. मृत्यु प्रमाण-पत्र फाड़ दिया.

भैंरो लाल, उनके भाई और एंबुलेंस के ड्राईवर की डंडों से इतनी पिटाई की कि निशान तीनों के शरीर पर तीन दिन बाद भी नजर आ रहे थे. एंबुलेंस में बैठी भैरों लाल की पत्नी ने खूब मिन्नतें कीं. लेकिन पुलिस ने उनकी भी नहीं सुनी. भैरों लाल अपनी मां की चिता को मुखाग्नि देने से महरूम रह गये. उनके बाकी रिश्तेदारों को मां का अंतिम संस्कार करना पड़ा....

महज 17 सेकेंड में पूरी फिल्म की तरह मेरे दिमाग में यह खबर घूम गई..फिर मैंने व्रत में भी दवा खाने को लेकर जोर दिया... मां मान गईं...लेकिन फोन रखते ही दूर होने का दंश... एक बार फिर डंसने लगा. जैसे सुहागन की हथेली को सजाने के लिए मेहंदी खुद को सिलबट्टे पर पीसे जाने के लिए बेताब होती है.. ठीक उसी तरह अपने बच्चों के सुनहरे ख्वाब को सजाने, सुरक्षित भविष्य बनाने के लिए हमारे बुजुर्ग असुरक्षित वक्त की कैद में अपनी जिंदगी समेट लेते हैं.

मैं, मां और पिता जी ... फोन पर आजकल आपस में 30 मिनट से 1 घंटे तक बातचीत करते हैं. बातों के बोल-- खेत, खलिहान, तबीयत, पड़ोसी, बदलते परिवेश होते हैं, लेकिन हम तीनों के दिल और दिमाग में "हे ईश्वर कुछ बुरा ना हो" यही धुन बजती रहती है.

शहर, गांव, घरों की दीवारों के बीच ये पसरा सन्नाटा... बता रहा है कि थोड़ी सी शोर... और महामारी हम सभी के घर का दरवाजा खटखटाने लगेगी. आजकल निगाहें कुछ तलाशती नहीं हैं. ठहरी हुई हैं.. शक और डर के साथ शांत हैं... नितांत अकेले हैं. पूरी दुनिया में वायरस की बगल से आंखें बचाकर जिन्दगियां खुद को घसीट रही हैं.

किसने सोचा था कि चमचमाती, चिल्लाती, चहकती, सिसकती, उथल-पुथल मचाती जिंदगी की राग को एक वायरस ऐसे छेड़ेगा कि पूरी दुनिया वैरागी हो जाएगी. आजकल गांव हो या शहर..कोई छींकता तक नहीं, कोई खांसता तक नहीं, इस डर से कि आस पड़ोस में तमाम आशंकाओं का जन्म ना हो जाए. लोग दूरी बनाकर रखें ये तो सभी चाहते हैं.. लेकिन डर के साए में जिन्दगी को मौत का इंतजार बनाना कोई नहीं चाहता. पिता जी के लिए ये बेरहम वक्त बाहर की चारपाई से अंदर कमरे के पलंग की दूरी नापते कट नहीं रही है. मां को तो आदत है... चहारदिवारी में कैद रहने की.. उसने देखा है... पांच फिट चार इंच की सास के कदम... 77 साल में अस्पताल जाने के अलावे सिर्फ मौत के बाद ही आंगन से निकले. इंसानियत की यात्रा में औरतों का दमतोड़ता अस्तित्व हर घर की दीवारों पर लहू से अंकित है. बस हममें से कुछ को दिखता नहीं है.. और कुछ देखना नहीं चाहते. मेरा मानना है कि बदलाव में अगर तेजी ना हो तो उसे बदलाव नहीं मानना चाहिए. मेरी मां और मेरी बहन की 'सामाजिक परिस्थतियों' में कुछ खास अंतर नहीं है.

खैर.. विपत्ति में इंसान और समाज अपनी कई परतें खोलता है. मानवता की रक्षा में जुटे डॉक्टरों के साथ इस शहर ने जो किया. बदहाल वक़्त की शिला पर वह धब्बे के रूप में अंकित हो गया. शहरों ने संवेदनाओं के साथ रिश्तों की तुरपाई करना सीखा होता तो हमारे आपके आराम के लिए अपनी हड्डियां गलाने वाले मजदूर वापस ना जाते. उनका परिवार डर के साए में गांव में ना तड़प रहा होता. और यहां बेटे मां पिता की चिंता में झुलस ना रहे होते. कागज़ों में, कहानियों में, लड़ाइयों में कभी बंटता कभी एकजुट रहा समाज आज ठहरा हुआ है. जैसे डर की आहट सुन रहा है. मानवीय संवेदनाओं की तबाहियों पर आबाद है ये शहर.. अब शहर को संस्कार तो बदलना ही होगा... बेटों से माता पिता की दूरी का दंश अब झेला नहीं जा रहा है.

(उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

10 अक्टूबर को CJP नेताओं को हिरासत में क्यों लिया? सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का जवाब
10 अक्टूबर को CJP नेताओं को हिरासत में क्यों लिया? सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का जवाब
पंजाब में राहुल के अंकल को कांग्रेस में वापस लाएंगे सचिन पायलट? बयान से मिले ये संकेत
पंजाब में राहुल के अंकल को कांग्रेस में वापस लाएंगे सचिन पायलट? बयान से मिले ये संकेत
राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, कहा- हम मध्यस्थ नियुक्त करेंगे
राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, कहा- हम मध्यस्थ नियुक्त करेंगे
Box Office: बुधवार को फिर 'दृश्यम 3' ने मारी बाजी, 'हनुमान अंश' का कमाल जारी, 'द वन' का हुआ बंटाधार
बुधवार को फिर 'दृश्यम 3' ने मारी बाजी, 'हनुमान अंश' का कमाल जारी, जानें- कलेक्शन

वीडियोज

सजा-ए-मौत का नीला ड्रम!
CJP को भी 'हाइजैक' कर लेंगे राहुल ?
थम नहीं रहा घमासान... कैसे निकलेगा समाधान? सटीक विश्लेषण
घुसपैठिया और SIR, 2029 की 'जंग' तैयार!
Vasudha: Vasudha के प्यार में रस्में भूला Dev, दादी ने कान पकड़कर सिखाया सबक!

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
10 अक्टूबर को CJP नेताओं को हिरासत में क्यों लिया? सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का जवाब
10 अक्टूबर को CJP नेताओं को हिरासत में क्यों लिया? सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस कमिश्नर का जवाब
पंजाब में राहुल के अंकल को कांग्रेस में वापस लाएंगे सचिन पायलट? बयान से मिले ये संकेत
पंजाब में राहुल के अंकल को कांग्रेस में वापस लाएंगे सचिन पायलट? बयान से मिले ये संकेत
राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, कहा- हम मध्यस्थ नियुक्त करेंगे
राजपाल यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, कहा- हम मध्यस्थ नियुक्त करेंगे
Box Office: बुधवार को फिर 'दृश्यम 3' ने मारी बाजी, 'हनुमान अंश' का कमाल जारी, 'द वन' का हुआ बंटाधार
बुधवार को फिर 'दृश्यम 3' ने मारी बाजी, 'हनुमान अंश' का कमाल जारी, जानें- कलेक्शन
IPL 2027 से पहले ऋषभ पंत समेत 4 खिलाड़ियों का ट्रेड कंफर्म, देखें लिस्ट
IPL 2027 से पहले ऋषभ पंत समेत 4 खिलाड़ियों का ट्रेड कंफर्म, देखें लिस्ट
आशुतोष रांका, सौरव के तिहाड़ जाते ही CJP की रत्ना सिंह को मिल रही धमकी, बोलीं- '₹2 वाले...'
आशुतोष रांका, सौरव के तिहाड़ जाते ही CJP की रत्ना सिंह को मिल रही धमकी, बोलीं- '₹2 वाले...'
अनुप्रिया पटेल की बढ़ेंगी मुश्किलें? दिव्या मित्तल ने कर दिया बड़ा ऐलान
अनुप्रिया पटेल की बढ़ेंगी मुश्किलें? दिव्या मित्तल ने कर दिया बड़ा ऐलान
डॉ. कलाम के 5 विचार, जो छात्रों को देते हैं लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा
डॉ. कलाम के 5 विचार, जो छात्रों को देते हैं लक्ष्य हासिल करने की प्रेरणा
Embed widget