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Cryptocurrency: रातोंरात अमीर बनाने वाला ये बाज़ार कहीं आपको कंगाल न कर दें

बेशक Cryptocurrency की सुनहली दुनिया को देख आप भी रातोंरात करोड़पति बनने का सपना देख रहे होंगे और उसमें अपनी गाढ़ी कमाई के पैसों को इन्वेस्ट करने की सोच भी रहे होंगे. लेकिन जरा ठहरिये और सावधानी के साथ सोचिये कि जिसे भारत सरकार ने अभी तक कोई मान्यता ही नहीं दी है,सो वहां आपका पैसा सुरक्षित होने की गारंटी भला कौन देगा. दुनिया की सबसे चर्चित डिजिटल मुद्रा कहलाने वाली बिटक्वाइन को लेकर कर्नाटक में हुए घोटाले के बाद सरकार के कान खड़े हो गए हैं कि वाकई इसका इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए ही तो नहीं किया जा रहा है.

चूंकि ये देश की सुरक्षा से जुड़ा बेहद नाजुक मसला है,लिहाज़ा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इससे जुड़े खतरों से निपटने के उपाय तलाशने के लिए जरा भी देर नहीं लगाई. ये घोटाला होने के आरोपों की नाजुकता समझते हुए मोदी ने कल यानी शनिवार को एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की थी. इसलिये नहीं कि Cryptocurrency को मान्यता कैसे दी जाए बल्कि इसलिये कि अपने देश में इस पर रोक लगाने के क्या प्रभावी तरीके अपनाये जा सकते हैं. शायद आपने भी गौर किया होगा कि पिछले कुछ महीनों में Crypto बाज़ार में उतरी कुछ कंपनियों ने बेहद लुभावने विज्ञापन देकर लोगों को अपने जाल में फांसने का बेहद चतुराई भरा बिजनेस गेम खेला है और काफी हद तक वे इसमें कामयाब भी हुई हैं.

लिहाज़ा,कल पीएम मोदी ने जो उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी,उसमें खासकर युवा वर्ग को गुमराह करने वाले ऐसे अति-लुभावने और गैर-पारदर्शी विज्ञापनों पर गहरी चिंता जताई गई और ये भी तय किया गया इन विज्ञापनों पर नकेल कसा जाना बेहद जरुरी है. बैठक में शामिल हुए एक आला अफसर से जुड़े सूत्र की मानें,तो मोदी सरकार इस बारे में जल्द ही एक सख्त गाइड लाइन का ऐलान करने वाली है,जिसे न मानने वाले पर भारी भरकम जुर्माने के साथ ही जेल की सजा का प्रावधान भी हो सकता है. हालांकि बैठक में ये भी तय किया गया कि अनरेग्युलेटेड क्रिप्टो बाजारों को मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा. लेकिन इसे लेकर सरकार में भी अभी ये संशय बना हुआ है कि इस क्रिप्टो बाज़ार में किसे रेगुलेटेड माना जाए और किसे नहीं और इसका पैमाना क्या हो. दरअसल,ये एक ऐसी डिजिटल मुद्रा है,जिस पर न तो किसी सरकार का कंट्रोल है और न ही कोई पुख्ता तौर पर ये बता सकता है कि इसका असली मालिक आखिर है कौन.

दरअसल,इस डिजिटल करंसी के गोरखधंधे का खुलासा तब हुआ,जब हाल ही में कर्नाटक में कथित हैकर श्रीकृष्णा उर्फ श्रीकी को गिरफ्तार किया गया था.  उसके पास से करोड़ों रुपये के बिटक्वाइन जब्त किये गए हैं.  श्रीकृष्णा पर सरकारी पोर्टलों की हैकिंग करने, ‘डार्कनेट’ के जरिए मादक पदार्थ मंगाने और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से उसका भुगतान करने का भी आरोप है.  लेकिन बड़ा सवाल ये है कि लोग इस डिजिटल मुद्रा में निवेश करने के लिए इतने पगलाये हुए क्यों हैं,तो इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि इसमें पैसा लगाने से बहुत कम समय में ही बेहतर रिटर्न मिलने का लालच ही उन्हें इस तरफ खींच रहा है. हैरानी की बात ये है कि इस डिजिटल करेंसी को सरकार द्वारा मान्यता न मिलने के बावजूद भारत में ये बाज़ार बेहद तेजी से अपने पैर पसार रहा है.  भारत में फिलहाल 15 से भी ज्यादा क्रिप्टो (Crypto) एक्सचेंज कामकाज कर रहे हैं जिनका रोजाना का कारोबार करीब 1500 करोड़ रुपये का है. बिटकॉइन (BitCoin) का मार्केट कैप 50,57,561 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है,जो सचमुच सरकार के लिए भी हैरानी वाली बात है. इसलिये कि यह देश की सबसे अमीर मानी जाने वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के मार्केट कैप 14,11,500 करोड़ से करीब तीन गुना अधिक है.

एक अनुमान के मुताबिक भारत में इस समय करीब एक करोड़ एक्टिव इन्वेस्टर हैं जो क्रिप्टो करेंसी में ट्रेडिंग करते हैं,जबकि शेयर बाजार में निवेश करने वाले और ट्रेडर की संख्या करीब 6 करोड़ है. शेयर बाजार की तुलना में करीब 20 फ़ीसदी लोग क्रिप्टो करेंसी में निवेश और ट्रेडिंग कर रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि इस बाजार में सब कुछ हरा-हरा ही है. आपका पूरा पैसा डूब जाने का खतरा भी है क्योंकि डिजिटल दुनिया में हेराफेरी करके मोटा पैसा कमाने का कुछ लोगों के लिए ये आसन जरिया भी है. इसके लिये एक सच्ची घटना का जिक्र करना जरूरी है. तकरीबन पांच साल पहले जून 2016 में लंदन की एक पेशेवर डॉक्टर रुजा इग्नातोवा ख़ुद को क्रिप्टोकरेंसी की महारानी कहा करती थीं.  रुजा ने लोगों को बताया था कि उन्होंने बिटकॉइन के मुक़ाबले एक नई क्रिप्टोकरेंसी ईजाद की है,जिसका नाम है-वनकॉइन.  यही नहीं, उन्होंने लोगों को इस करेंसी में करोड़ों के निवेश करने के लिए भी राज़ी कर लिया.  उस वक़्त 36 साल की डॉक्टर रुजा लंदन के मशहूर वेम्बली अरेना में अपने हज़ारों चाहने वालों के सामने स्टेज पर नमूदार होती है और उन्हें बताती है कि वनकॉइन बहुत जल्द दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बनने वाली है.  बहुत जल्द सारी दुनिया में हर कोई इसी के सहारे पैसे का भुगतान करेगा.

अगस्त 2014 से मार्च 2017 के बीच दुनिया भर के कई देशों से क़रीब चार अरब यूरो का निवेश वनकॉइन में हो चुका था.  इसमें पाकिस्तान और ब्राज़ील से लेकर हॉन्गकॉन्ग, नॉर्वे, क्यूबा,यमन यहां तक कि फ़िलस्तीन जैसे देशों के नागरिक भी शामिल था.  लेकिन, वनकॉइन में धड़ाधड़ निवेश कर रहे लोगों को एक बहुत ज़रूरी बात पता नहीं थी. कुछ लोग काफ़ी समय से ऐसी मुद्रा विकिसत करने की कोशिश कर रहे थे, जो किसी सरकार की पाबंदी से परे हो.  लेकिन ये कोशिश हमेशा नाकाम हो जाती थी.  क्योंकि लोग ऐसी करेंसी पर विश्वास नहीं कर सकते थे.  इसमें जालसाज़ी की संभावना भी ख़ूब थी.  बिटकॉइन ने लोगों के इस डर को ख़त्म कर दिया था.

दरअसल,बिटकॉइन एक ख़ास तरह के डेटाबेस पर आधारित है जिसे ब्लॉकचेन कहते हैं.  ये एक बड़ी सी डायरी की तरह होता है.  एक ब्लॉकचेन उसके मालिक के पास होता है.  लेकिन इससे अलग इस ब्लॉकचेन की कई कॉपी होती हैं. हर मर्तबा जब भी किसी और को एक भी बिटकॉइन भेजा जाता है, तो इस का लेखा-जोखा सभी बिटकॉइन मालिकों के पास मौजूद बिटकॉइन रिकॉर्ड बुक में दर्ज हो जाता है. इस रिकॉर्ड में कोई भी किसी भी तरह का बदलाव नहीं कर सकता.  इस ब्लॉकचेन का मालिक भी नहीं.  यहां तक कि इस रिकॉर्ड बुक को तैयार करने वाला भी इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता.

रुजा ने इस बात को अच्छे से समझ लिया था कि आज सच और झूठ के बीच फ़र्क़ करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है.  क्योंकि ऑनलाइन दुनिया में परस्पर विरोधाभासी जानकारियों की भरमार है.  रुजा ने ये भी ताड़ लिया था कि वनकॉइन के फ़र्ज़ीवाड़े से निपटने की समाज की व्यवस्था, यानी क़ानून बनाने वाले, पुलिस और हम जैसे मीडिया के लोगों को भी ये समझने में मशक़्क़त करनी पड़ेगी कि असल में हो क्या रहा है. और, इन सबसे भी ज़्यादा खीझ दिलाने वाली बात ये है कि रुजा ने ये अंदाज़ा बिल्कुल सही लगाया था कि जब तक हमें इस बात का एहसास होगा, वो सारे पैसे समेट कर जा चुकी होगी. रुज़ा ने भी वही किया क्योंकि अचानक दो साल बाद वो ग़ायब हो गईं.  और वनकॉइन खरीदने वाले आज भी अपना माथा पीट रहे हैं.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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