Opinion: आकाशवाणी का 90 वर्षों का गौरवशाली इतिहास और संवेदनशील कड़ी के रुप में उभरा जेल रेडियो

आकाशवाणी के 90 वर्षों के गौरवशाली इतिहास और 12 नवंबर 1947 को महात्मा गांधी के वहां आने की स्मृतियों के बीच जेल रेडियो एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील कड़ी के रूप में उभरा है. भारत में जेल रेडियो की शुरुआत तो 2013 में तिहाड़ जेल से हुई थी, लेकिन तिनका तिनका फाउंडेशन ने इसे एक व्यवस्थित और सुधारात्मक स्वरूप प्रदान किया.
वर्ष 2019 में जिला जेल आगरा से इस मुहिम को एक नया आकार मिला, जहां महिला बंदियों और बच्चों की संचार संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रेडियो की स्थापना की गई. उदय, तुहीना और रजत जैसे बंदियों के सक्रिय सहयोग से शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे जेल प्रशासन और बंदियों के बीच एक मजबूत सेतु बन गई.
संकट का सहारा बना रेडियो
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान, जब बंदियों की बाहरी दुनिया से मुलाकातें पूरी तरह बंद हो गई थीं, तब जेल रेडियो उनका सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरा. इस संकट काल में रेडियो ने शिक्षा, मनोरंजन, ज्ञान और सूचना के माध्यम से बंदियों के अकेलेपन को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
हरियाणा के तत्कालीन डीजी प्रिजंस के. सेल्वराज के सहयोग से यह मुहिम और विस्तार पा सकी, जिसके परिणामस्वरूप आज हरियाणा की 21 में से लगभग 14 जेलों के साथ-साथ देहरादून जिला जेल में भी रेडियो का सफल संचालन हो रहा है. इस रेडियो की सबसे बड़ी खूबसूरती इसका स्वावलंबन है, जहां जेल के बंदी ही इसके निर्माता (प्रोड्यूसर), संचालक (RJ) और श्रोता हैं, और इसमें बाहरी दुनिया का कोई व्यावसायिक हस्तक्षेप या विज्ञापन नहीं है.
जेल रेडियो से संवेदनाओं का संचार
जेल रेडियो ने बंदियों को अवसाद से बाहर निकालकर उनके जीवन में नई खुशी और संवेदनाओं का संचार किया है. हर जेल में औसतन 15 से 20 रेडियो जॉकी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और संगीत के क्षेत्र में शेरू, सुचित नारंग, कशिश और सुरिंदर जैसी कई नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आई हैं. पानीपत जेल का आधुनिक रेडियो रूम और उसके साथ जुड़ी लाइब्रेरी इस ऊर्जा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.
तिनका तिनका फाउंडेशन इन जेलों के भीतर मानवीय संवेदनाओं का एक 'इंद्रधनुष' बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसका विस्तृत उल्लेख नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तक 'रेडियो एंड प्रिजन' और उपन्यास 'ज से जेल' में भी मिलता है.
नोट - (उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)






























