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पीएम मोदी ने एकता दिवस पर जिन सप्त पुरियों का जिक्र किया वे कौन हैं, क्या है इनका धार्मिक अर्थ?

राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम नरेंद्र मोदी ने सप्त पुरियों, चार धाम और शक्ति पीठों का जिक्र किया. जानिए कौन-कौन सी हैं ये सात पुरियां...अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैन और द्वारका और क्यों इन्हें मोक्षदायिनी कहते हैं.

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  • पीएम मोदी ने चार धाम, शक्ति पीठ और सप्त पुरियों का किया जिक्र।
  • हिंदू धर्म में सात मोक्षदायिनी पुरियों का विशेष महत्व बताया गया।
  • ये सात पुरियां अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, उज्जैन, द्वारका हैं।
  • सप्त पुरियां भारत की सांस्कृतिक विविधता और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक।

31 अक्टूबर के राष्ट्रीय एकता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवड़िया में दिए अपने भाषण में जब चार धाम, शक्ति पीठ और सप्त पुरियों का उल्लेख किया, तो देशभर में इन नामों को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई. चार धाम और शक्ति पीठों के बारे में अधिकतर लोग जानते हैं, लेकिन सवाल यह है कि सप्त पुरियां आखिर हैं क्या और हिंदू धर्म में इनका इतना विशेष महत्व क्यों है?

सप्त पुरियां, जहां मुक्ति और मोक्ष का मार्ग मिलता है

हिंदू धर्मग्रंथों में सप्त मोक्षदायिनी पुरियां का उल्लेख मिलता है. यह सात नगर वे स्थान माने गए हैं जहां धर्म, तप, ज्ञान और मोक्ष, चारों मार्ग एक दूसरे से मिलते हैं. पौराणिक मान्यता है कि इन नगरों में जीवन व्यतीत करने या मृत्यु प्राप्त करने से आत्मा को मुक्ति प्राप्त होती है. ये हैं सात पवित्र पुरियां-

अयोध्या (उत्तर प्रदेश)

भगवान श्रीराम की जन्मभूमि. मर्यादा, सत्य और नीति का प्रतीक. यह नगर धर्म के आचरण और आदर्श जीवन का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है.

मथुरा (उत्तर प्रदेश)

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि. यहां प्रेम, लीला और भक्ति का भाव सर्वोच्च है. यह स्थान भक्ति मार्ग का केंद्र है. जहां ईश्वर को प्रेम के रूप में देखा जाता है.

हरिद्वार (उत्तराखंड)

गंगा के तट पर बसा यह नगर तप, साधना और स्नान से जुड़ा है. कुंभ मेले की परंपरा ने इसे विश्वभर में मोक्ष के द्वार के रूप में प्रसिद्ध किया है.

काशी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

भगवान शिव की नगरी. कहा जाता है कि यहां मृत्यु भी मोक्ष का मार्ग बन जाती है. यह स्थान ज्ञान, ध्यान और साधना का केंद्र माना गया है.

कांची (तमिलनाडु)

दक्षिण भारत की यह प्राचीन नगरी माता कामाक्षी और भगवान विष्णु को समर्पित है. यह विद्या, शास्त्र और आध्यात्मिकता का संगम मानी जाती है.

अवंतिका या उज्जैन (मध्य प्रदेश)

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का निवास. यहां समय और कर्म के रहस्य छिपे हैं. उज्जैन में भी कुंभ का आयोजन होता है, जो इसे चारों धामों के समान प्रतिष्ठा देता है.

द्वारका (गुजरात)

भगवान श्रीकृष्ण की राजधानी. यह नगर धर्म, नीति और कर्तव्य के संतुलन का प्रतीक है. यह पश्चिम दिशा का वह धाम है जो पूरे भारत की एकता को दिशा देता है.

ग्रंथों में उल्लेख

गरुड़ पुराण, वायु पुराण और स्कंद पुराण में इन सात पुरियों का विस्तृत उल्लेख मिलता है. इन नगरों को मोक्षदायिनी सप्तपुरियां कहा गया है,  यानी ऐसे स्थान जहां मनुष्य अपने कर्मों से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा सकता है.

धार्मिक अर्थ से परे एकता का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इन नगरों का जिक्र केवल धार्मिक संदर्भ में नहीं था. सप्त पुरियां भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता का भी प्रतीक हैं. उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक यह बताती हैं कि भारत की आध्यात्मिक यात्रा एक ही भावना से जुड़ी हुई है. हर पुरि एक संदेश देती है. ये बताती है कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि जीवन जीने का संतुलित तरीका भी है. सप्त पुरियां भारत की आत्मा का जीवित इतिहास हैं.

इनमें से हर नगर यह सिखाता है कि मोक्ष केवल मृत्यु के बाद नहीं, बल्कि सत्य, प्रेम, तप और ज्ञान के आचरण में भी पाया जा सकता है. आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इनका उल्लेख किया, तो यह याद दिलाने जैसा था कि भारत की एकता उसकी भौगोलिक सीमाओं में नहीं, उसकी आस्था और परंपरा के साझा अनुभवों में है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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Frequently Asked Questions

हिंदू धर्म में सप्त पुरियां क्या हैं?

सप्त पुरियां वे सात पवित्र नगर हैं जहाँ धर्म, तप, ज्ञान और मोक्ष के मार्ग मिलते हैं। पौराणिक मान्यता है कि इन नगरों में जीवन व्यतीत करने या मृत्यु प्राप्त करने से आत्मा को मुक्ति मिलती है।

सप्त पुरियों के नाम क्या हैं?

सप्त पुरियां हैं: अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका। ये भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं।

सप्त पुरियों का महत्व क्या है?

इन पुरियों का महत्व यह है कि इन्हें मोक्षदायिनी माना जाता है, जहाँ मनुष्य अपने कर्मों से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा सकता है। ये भारत की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता का भी प्रतीक हैं।

क्या सप्त पुरियां केवल धार्मिक महत्व रखती हैं?

नहीं, सप्त पुरियां केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक हैं। ये उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत की आध्यात्मिक यात्रा को एक सूत्र में पिरोती हैं।

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