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मोदी सरकार के 12 साल, 12 राशियां, 12 बड़े फैसले...ऐसे शायद आपने पहले कभी नहीं समझा होगा

Modi 12 Years: मेष से मीन तक 12 राशियों के जरिए समझिए मोदी सरकार के 12 साल की सबसे बड़ी उपलब्धियां. जानिए 2027 के ग्रह गोचर भारत और नरेंद्र मोदी के लिए क्या संकेत देते हैं.

Modi 12 Years: क्या राजनीति और देश के बड़े नीतिगत बदलावों का राशियों से कोई कनेक्शन हो सकता है? मोदी सरकार के 12 साल, 12 बड़े फैसले और 12 राशियों का यह ताना-बाना सिर्फ बीते कल की कहानी नहीं कहता, बल्कि यह भी बताता है कि साल 2027 में देश का पासा किस तरफ पलटने वाला है.

12 साल, 12 बड़े फैसले और 12 राशियां मिलकर एक ऐसी कहानी बनाती हैं जो पहली नजर में असामान्य लग सकती है, लेकिन अगर ज्योतिष को केवल भविष्यवाणियों से इतर प्रतीकों की भाषा माना जाए, तो केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल को समझने का यह एक बिल्कुल नया और रोचक नजरिया बन जाता है.

मोदी सरकार के 12 साल, 12 राशियां, 12 बड़े फैसले...ऐसे शायद आपने पहले कभी नहीं समझा होगा

मेष का साहस, सिंह का नेतृत्व, तुला का संतुलन और कुंभ का नवाचार (innovation) मिलकर एक ऐसा ताना-बाना बुनते हैं जहां हर राशि का अपना एक स्वभाव नजर आता है.

जब इन एनर्जी को पिछले 12 वर्षों के नीतिगत बदलावों और उनकी व्यावहारिक चुनौतियों के साथ जोड़कर देखा जाता है, तो देश के विकास की एक मुकम्मल और निष्पक्ष तस्वीर सामने आती है, जहां राशियां भविष्य नहीं बता रहीं, बल्कि बीते 12 वर्षों की कहानी को एक नए नजरिए से बयां कर रही हैं.

मेष (Aries): जब भारत ने सुरक्षित खेलना छोड़ दिया

ज्योतिष में मेष वह राशि है जो रास्ता मिलने का इंतजार नहीं करती, बल्कि खुद रास्ता बनाती है. स्टार्टअप इंडिया, रक्षा क्षेत्र में निजी भागीदारी और अंतरिक्ष के द्वार खोलने जैसे साहसिक कदम इसी मेष ऊर्जा की याद दिलाते हैं, जिसने देश की पुरानी सोच को झकझोरा है.

एक समय था जब नौकरी सबसे सुरक्षित सपना मानी जाती थी, लेकिन आज देश का युवा जोखिम उठाकर खुद का उद्यम शुरू करने का हौसला रख रहा है. हालांकि, इस आक्रामक मेष ऊर्जा के बीच छोटे और पारंपरिक उद्योगों को अपनी जमीन बचाए रखने के लिए आज भी कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है, जो इस बदलाव का दूसरा पहलू है.

वृषभ (Taurus): भरोसे की नई डिजिटल अर्थव्यवस्था

वृषभ स्थिरता, संसाधन और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है और भारत के वित्तीय परिदृश्य में यह भूमिका यूपीआई ने निभाई है. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस ने भारत की अर्थव्यवस्था को केवल डिजिटल नहीं बनाया, बल्कि आम नागरिक के दैनिक व्यवहार और भरोसे को पूरी तरह बदल दिया.

कभी बड़े नोटों को संभालकर रखने वाला देश आज रेहड़ी-पटरी से लेकर बड़े मॉल तक पलक झपकते ही डिजिटल लेनदेन कर रहा है, जिसने भारतीय बाजार को एक अभूपूर्व आर्थिक स्थिरता दी है. इसके बावजूद, ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी की समस्या और डिजिटल फ्रॉड से निपटने की चुनौतियां आज भी इस व्यवस्था के सामने एक बड़ा मुद्दा बनी हुई हैं.

मिथुन (Gemini): संवाद और सूचना की महाक्रांति

मिथुन संचार, नेटवर्किंग और विचारों के तीव्र आदान-प्रदान की राशि है, जिसका अक्स भारत की डिजिटल क्रांति में साफ दिखता है. डिजिटल इंडिया, सस्ते डेटा की उपलब्धता और कंटेंट क्रिएशन की लहर ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल संवाद मंच में तब्दील कर दिया है.

आज दूरदराज के गांवों का युवा भी मुख्यधारा की सूचनाओं से सीधा जुड़ा हुआ है और ज्ञान का लोकतंत्रीकरण हुआ है. लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू भी चिंताजनक है, क्योंकि जहां करोड़ों लोग ऑनलाइन हुए हैं, वहीं डिजिटल साक्षरता की कमी, फेक न्यूज का प्रसार और साइबर सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां देश के सामने खड़ी हैं.

कर्क (Cancer): सुरक्षा और सम्मान की पक्की छत

कर्क राशि आंतरिक सुरक्षा, संवेदना, मां और परिवार का प्रतीक है, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना का सीधा जुड़ाव महसूस होता है. इस योजना के तहत बने करोड़ों पक्के मकान किसी सरकारी फाइल के नीरस आंकड़े नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा की नई परिभाषा हैं.

जिस परिवार ने पीढ़ियों से कच्ची या टपकती छत के नीचे वक्त गुजारा हो, उसके लिए एक पक्का घर केवल बुनियादी जरूरत नहीं, बल्कि समाज में सिर उठाकर जीने का सम्मान बन जाता है. हालांकि क्रियान्वयन के स्तर पर देश के कुछ हिस्सों में सुस्ती और भ्रष्टाचार की शिकायतें जरूर रहीं, लेकिन इसका सामाजिक और भावनात्मक प्रभाव निर्विवाद है.

सिंह (Leo): वैश्विक मंच पर गूंजी भारत की आवाज

सिंह नेतृत्व, संप्रभुता और राजसी प्रतिष्ठा का प्रतीक है, जिसकी झलक पिछले एक दशक में भारत की विदेश नीति में साफ देखी जा सकती है. वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती धमक, बहुपक्षीय मंचों पर उसका मुखर रुख और जी20 जैसे आयोजनों की भव्य अध्यक्षता ने दुनिया को एक नया संदेश दिया है.

जब दुनिया के कई विकसित देश आर्थिक और रणनीतिक मोर्चों पर संघर्ष कर रहे थे, तब भारत ने भू-राजनीतिक तनावों के बीच भी किसी के दबाव में न आते हुए अपना स्वतंत्र एजेंडा तय किया. इस सिंह जैसी नेतृत्व क्षमता ने दुनिया की मेज पर भारत को सिर्फ एक कुर्सी नहीं कराई, बल्कि उसे एजेंडा तय करने वाला देश बना दिया.

कन्या (Virgo): सफाई सिर्फ सड़कों की नहीं, सोच की भी

कन्या अनुशासन, सूक्ष्म विश्लेषण और व्यवस्था की राशि है, और भारत में स्वच्छता अभियान इसी ऊर्जा की तार्किक परिणति है. स्वच्छ भारत अभियान ने देश को यह सिखाया कि बड़ा बदलाव केवल सरकारी बजट या आदेशों से नहीं, बल्कि नागरिक अनुशासन और स्वभाव बदलने से आता है.

इस अभियान ने स्वच्छता को प्रशासनिक दायित्वों से निकालकर एक जनआंदोलन और सामाजिक मर्यादा का विषय बना दिया, जिससे लोगों की सोच बदली. हालांकि, शहरों में कचरा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों का अभाव और डंपिंग ग्राउंड्स की विकराल समस्या आज भी इस सुधार के सामने एक अधूरी चुनौती बनकर खड़ी है.

तुला (Libra): 'एक देश, एक कर' का ढांचागत संतुलन

तुला संतुलन और न्यायसंगत व्यवस्था का प्रतीक है, और भारत की जटिल कर प्रणाली को एक सूत्र में पिरोना इसी संतुलन की एक ऐतिहासिक कोशिश थी. देशभर के दर्जनों अप्रत्यक्ष करों को समाहित कर वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी को लागू करना देश के आर्थिक इतिहास का सबसे बड़ा आर्थिक प्रयोग था.

समर्थकों ने इसे आर्थिक एकीकरण का माध्यम कहा, जबकि छोटे और मध्यम कारोबारियों ने शुरुआती वर्षों में अनुपालन की जटिलताओं और बार-बार बदलते नियमों पर गंभीर सवाल उठाए. आज यह व्यवस्था राजस्व के मोर्चे पर स्थिर हो रही है, लेकिन नीतिगत संतुलन की यह परीक्षा अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.

वृश्चिक (Scorpio): वो फैसले जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी

वृश्चिक गहरे रूपांतरण, रणनीतिक गोपनीयता और अत्यंत साहसिक तथा अपरिवर्तनीय निर्णयों की राशि मानी जाती है. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का निष्प्रभावीकरण और राज्य का पुनर्गठन इसी ऊर्जा का सबसे सटीक उदाहरण है. राजनीतिक और संवैधानिक हलकों में इस फैसले के तौर-तरीकों पर आज भी तीखी बहस होती है और आलोचक इस पर सवाल उठाते हैं.

लेकिन रणनीतिक और ऐतिहासिक नजरिए से देखें, तो यह केंद्र सरकार का एक ऐसा निर्णय रहा जिसने दशकों पुराने राजनीतिक नैरेटिव को हमेशा के लिए जमींदोज कर दिया और इतिहास का एक बिल्कुल नया अध्याय लिख दिया.

धनु (Sagittarius): चांद के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा

धनु राशि उच्च विजन, लंबी छलांग और खोजी स्वभाव का प्रतीक है, जिसका सीधा प्रतिबिंब भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में दिखाई देता है. इसरो का चंद्रयान मिशन इसी दूरगामी सोच और अदम्य हौसले का परिणाम था, जिसने वैश्विक स्तर पर भारत का कद बढ़ाया.

जब दुनिया के कई विकसित और विशाल बजट वाले देश चांद के दुर्गम और अंधेरे दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की चुनौती से जूझ रहे थे और असफल हो रहे थे, तब भारत ने अपेक्षाकृत बेहद कम बजट और स्वदेशी तकनीक के दम पर वहां सफलतापूर्वक कदम रखा. इस मिशन ने भारत की असीम वैज्ञानिक क्षमताओं को दुनिया के सामने साबित किया.

मकर (Capricorn): धैर्य की परीक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान

मकर दीर्घकालिक लक्ष्यों, कठोर तप, समय चक्र और अगाध धैर्य की राशि है, और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण इसी प्रकृति को दर्शाता है. यह निर्माण कई लोगों के लिए केवल एक भव्य ढांचा नहीं है, बल्कि सदियों पुराने सांस्कृतिक, कानूनी और सामाजिक संघर्ष का एक तार्किक और शांतिपूर्ण समापन है.

मकर की तरह ही इस पूरे मुद्दे ने देश की कई पीढ़ियों के धैर्य को परखा और अंततः एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद इसका शांतिपूर्ण समाधान निकलना देश के सांस्कृतिक इतिहास का एक बड़ा पड़ाव बना, जिसने राष्ट्रीय विमर्श को प्रभावित किया.

कुंभ (Aquarius): भविष्य की तकनीक की तरफ लंबी छलांग

कुंभ नवाचार, अत्याधुनिक सोच और लीक से हटकर की जाने वाली भविष्यवादी क्रांतियों का प्रतीक है, जिसका जुड़ाव देश की नई तकनीकी नीतियों से है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर मिशन, क्वांटम कंप्यूटिंग और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत का आक्रामक निवेश यह दिखाता है कि देश भविष्य की चौथी औद्योगिक क्रांति में पीछे नहीं रहना चाहता.

भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. हालांकि, इस तकनीकी दौड़ के बीच देश की विशाल आबादी के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर पैदा करना सरकार के लिए सबसे बड़ी व्यावहारिक परीक्षा होगी.

मीन (Pisces): अंत्योदय और करुणा का मानवीय चेहरा

मीन सेवा, संवेदनशीलता और निस्वार्थ भाव की राशि है, जिसका सामाजिक रूप मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में परिलक्षित होता है. आयुष्मान भारत जैसी मुफ्त स्वास्थ्य योजनाएं और दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त राशन व्यवस्था इस बात की याद दिलाती हैं कि विकास के बड़े-बड़े आर्थिक आंकड़ों के बीच अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सुरक्षा सर्वोपरि है.

आलोचक इसे लोक-लुभावन या चुनावी राजनीति का हिस्सा कह सकते हैं, लेकिन किसी गरीब परिवार के लिए बीमारी के समय इलाज का खर्च बच जाना उनके जीवन को सुरक्षा की एक मानवीय गारंटी देता है, जो विकास के मानवीय चेहरे को उजागर करता है.

2027 का गोचर: क्या कहती है ग्रहों की चाल?

यदि पिछले 12 वर्षों को साहस, सुधार और कड़े प्रयोगों की एक लंबी यात्रा माना जाए, तो आने वाला वर्ष 2027 भारत की इस विकास गाथा में सबसे निर्णायक मोड़ लेकर आ सकता है. ज्योतिषीय गणनाओं के धरातल पर देखें तो वर्ष 2027 कोई साधारण समय नहीं है क्योंकि इस दौरान ग्रहों का एक बेहद दुर्लभ संयोजन बनने जा रहा है.

शनि 3 जून 2027 को मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे, लेकिन अतिगामी चाल के कारण 20 अक्टूबर 2027 को यह पुनः मीन राशि में वापस आ जाएंगे

वैदिक ज्योतिष के अनुसार वर्ष 2027 में न्याय और कर्म के देवता शनि देव मीन राशि में गोचर करेंगे, जबकि देवगुरु बृहस्पति का गोचर सिंह राशि में होगा. ज्योतिष शास्त्र में यह संयोजन एक बहुत बड़े समीक्षा काल और परिणाम काल की ओर इशारा करता है, जहां गुरु सिंह राशि में बैठकर भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, ज्ञान-विज्ञान और दीर्घकालिक विजन को अभूतपूर्व विस्तार देंगे.

वहीं मीन राशि में बैठे शनि देव की दृष्टि यह सुनिश्चित करेगी कि केवल कागजी घोषणाएं काम न आएं. शनि यहां बहुत कड़ाई से यह परखेंगे कि जो बीज पिछले एक दशक में बोए गए थे, उनकी जमीनी नींव कितनी मजबूत है, इसलिए यह समय विजन और उसकी व्यावहारिक परीक्षा का एक अनूठा संगम साबित होने जा रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली और 2027 की राजनीतिक परीक्षा

ज्योतिषीय जगत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रचलित जन्मकुंडली लंबे समय से गहन शोध का विषय रही है, जो उनके राजनीतिक निर्णयों के समय को समझने में मदद करती है. उनकी कुंडली वृश्चिक लग्न और तुला राशि की है, जिसमें लग्न में बैठा स्वगृही मंगल रुचक महापुरुष योग बनाता है, जो उन्हें एक बेहद आक्रामक रणनीतिकार और विपरीत परिस्थितियों में भी न टूटने वाला नेतृत्व प्रदान करता है.

चर्चा का मुख्य विषय यह है कि वर्ष 2027 में जब गोचर के गुरु सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, तो वे पीएम मोदी की कुंडली के दशम यानी कर्म और सत्ता भाव को सीधे प्रभावित करेंगे, जिससे उनका अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और बड़े नीतिगत निर्णय एक नई ऊंचाई छू सकते हैं.

लेकिन इसी समय मीन राशि का शनि उनकी कुंडली के पंचम भाव से गोचर करते हुए एकादश यानी लाभ और सिद्धि भाव पर अपनी पूर्ण दृष्टि डालेगा, जो यह संकेत देता है कि नेतृत्व के लिए आंतरिक सांगठनिक बदलावों, आर्थिक सुधारों की कसौटी और कड़े नीतिगत निर्णयों के रूप में जवाबदेही और परीक्षा का दौर और अधिक कठिन हो जाएगा, जिसे राजनीतिक विश्लेषक अगले आम चुनावों की बिसात का प्रस्थान बिंदु मानेंगे.

एक बदलता हुआ भाग्य चक्र

समर्थक इसे देश के कायाकल्प की ऐतिहासिक और स्वर्णिम गाथा कह सकते हैं, और आलोचक इसे कई मोर्चों पर अधूरी आकांक्षाओं और क्रियान्वयन की कमियों का दौर बता सकते हैं.

लेकिन इन दोनों विमर्शों के बीच एक बात पर सभी पक्षों को सहमत होना होगा कि पिछले एक दशक से अधिक समय में देश के सोचने और काम करने के तौर-तरीकों में एक बड़ा गुणात्मक बदलाव आया है. राशियां अपनी जगह से नहीं बदलीं, लेकिन भारत का भाग्य-वृत्त बदल गया है, जिसने वैश्विक परिदृश्य पर देश की स्थिति को मजबूत किया है.

अगर वर्ष 2014 ने देश की सामूहिक दिशा को बदलने का काम किया था, तो आने वाला वर्ष 2027 ज्योतिषीय और राजनीतिक दोनों ही दृष्टियों से यह तय कर सकता है कि वह दिशा आने वाले दशकों का स्थायी इतिहास बनेगी या सिर्फ बदलाव का एक अध्याय बनकर रह जाएगी.

यह भी पढ़ें- Sawan Grahan 2026: सावन 2026 में दो ग्रहण का संयोग, क्या खतरे की घंटी का संकेत?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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