70 के दशक में 18-21 साल की उम्र में शादी होती थी, जो बढ़कर 2026 तक 32-35 साल या उससे भी अधिक हो गई है।
Modern Astrology: 70 के दशक से अब तक कैसे बदला विवाह का स्वरूप? ज्योतिषी से जानें शादी में देरी का असली कारण
Modern Astrology: 70 के दशक में 18, अब 35 के पार, ज्योतिषी डॉ. अनीस व्यास से जानें विवाह में देरी और करियर के संघर्ष का असली कारण. क्या आपके सितारों में छिपा है समाधान? पढ़ें पूरी रिपोर्ट

- 70 के दशक में 18-21 में विवाह, अब 32-35 के पार सामान्य।
- करियर में पहचान की देरी, आर्थिक अनिश्चितता विवाह को टालती है।
- संतान की जगह पालतू जानवर, ज्योतिष में पितृ दोष का संकेत।
- ज्योतिष विद्या विवाह, करियर की बाधाओं के हल बताती है।
70s vs. Modern Marriage: आज के दौर में 'विवाह' और 'करियर' दो ऐसे विषय हैं, जिन्होंने न केवल सामाजिक ढांचे को बदला है, बल्कि व्यक्तिगत जीवन के संघर्षों को भी बढ़ा दिया है. प्रसिद्ध ज्योतिषी गोपालकृष्णन ने हाल ही में आधुनिक जीवनशैली और ज्योतिषीय प्रभावों के बीच के अंतर्संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला है. उन्होंने बताया कि कैसे पिछले कुछ दशकों में विवाह की परिभाषा और समय पूरी तरह बदल चुका है.
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1970 से 2026: बदलती उम्र का गणित
एक समय था जब भारतीय समाज में विवाह का अर्थ 18 से 21 वर्ष की आयु में जिम्मेदारी स्वीकार करना था. ज्योतिषी गोपालकृष्णन के अनुसार, 70 के दशक का यह ट्रेंड 80 और 90 के दशक तक आते-आते 21-24 वर्ष हुआ और फिर सहस्राब्दी (millennials) के दौर में 24-27 तक पहुँच गया.
लेकिन वर्तमान स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है. अब 32 से 35 वर्ष की आयु में भी विवाह का न होना एक 'न्यू नॉर्मल' बनता जा रहा है. कई युवा आज 30 की उम्र पार करने के बाद भी अकेले रहना पसंद कर रहे हैं या विवाह के प्रति उदासीन हैं. यह बदलाव केवल वैचारिक नहीं, बल्कि ग्रहों की बदलती स्थितियों और समाज के विकासवादी क्रम का भी हिस्सा है.
करियर का संघर्ष और 'वर्क कॉलिंग'
शादी में देरी का एक बड़ा कारण करियर में देरी से मिलने वाली स्थिरता भी है. ज्योतिषी जी बताते हैं कि आज का युवा 28 वर्ष की आयु तक भी यह तय नहीं कर पाता कि उसका वास्तविक जुनून (passion) क्या है. कई लोग अपनी 'वर्क कॉलिंग' को पहचानने में असफल रहते हैं, जिससे वे गलत करियर चुन लेते हैं और बाद में उन्हें विफलता का सामना करना पड़ता है.
आर्थिक अनिश्चितता और करियर में स्थापित होने की होड़ ने विवाह को प्राथमिकता सूची में नीचे धकेल दिया है. जब तक व्यक्ति आर्थिक रूप से स्थिर महसूस करता है, तब तक विवाह के लिए उपयुक्त ज्योतिषीय समय (दशा) अक्सर हाथ से निकल जाती है.
संतान सुख और नई जीवनशैली
वीडियो में एक और चौंकाने वाले ट्रेंड की चर्चा की गई है. आज के आधुनिक युग में कई शादीशुदा जोड़े संतान के स्थान पर पालतू जानवरों (जैसे कुत्तों) को पालना पसंद कर रहे हैं. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, यह पितृ दोष या कुंडली के पंचम भाव पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का संकेत हो सकता है. शादी के 5-6 साल बाद भी संतान सुख न मिल पाना अब एक बड़ी समस्या बन गई है, जो मानसिक तनाव का कारण बनती है.
क्या कहती है ज्योतिष विद्या?
गोपालकृष्णन जी का मानना है कि ये समस्याएँ भले ही आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा लगें, लेकिन इनके समाधान आज भी हमारी प्राचीन ज्योतिष विद्या में छिपे हैं. कुंडली में ग्रहों की विशेष चाल और दोषों के कारण व्यक्ति अपने प्रयासों में विफल होता है.
ज्योतिषीय समाधान के प्रमुख बिंदु:
- ग्रहों का विश्लेषण: सही समय पर कुंडली का विश्लेषण विवाह और करियर की बाधाओं को स्पष्ट कर सकता है.
- किफायती उपाय: उन्होंने अपनी पुस्तक और रेमेडियल सेंटर के माध्यम से बताया है कि महंगे अनुष्ठानों के बजाय विधिपूर्वक किए गए सरल उपाय और पूजा-हवन भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं.
- समय का महत्व: ज्योतिष हमें यह समझने में मदद करता है कि कब प्रयास करना है और कब धैर्य रखना है.
आधुनिकता और परंपरा के बीच का यह संघर्ष ही आज की सबसे बड़ी चुनौती है. यदि आप भी करियर में अस्थिरता या विवाह में अकारण देरी का सामना कर रहे हैं, तो यह समय अपनी कुंडली के सितारों की स्थिति पर गौर करने का है. ज्योतिष केवल भविष्यवाणी नहीं, बल्कि जीवन की बाधाओं को पार करने का एक विज्ञान सम्मत मार्ग भी हो सकता है.
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Frequently Asked Questions
पहले और आज के समय में शादी की उम्र में क्या अंतर आया है?
करियर की देरी का शादी पर क्या असर पड़ता है?
युवाओं को 28 साल की उम्र तक अपना जुनून पता नहीं चलता, जिससे करियर में देरी होती है और आर्थिक स्थिरता न मिलने से शादी पिछड़ जाती है।
आजकल शादीशुदा जोड़े बच्चों की जगह पालतू जानवर क्यों पाल रहे हैं?
ज्योतिष के अनुसार, यह पितृ दोष या पंचम भाव पर नकारात्मक प्रभाव का संकेत हो सकता है, जिससे संतान सुख में देरी होती है।
ज्योतिष विवाह और करियर की बाधाओं को कैसे दूर कर सकता है?
कुंडली का विश्लेषण सही समय पर विवाह और करियर की बाधाओं को स्पष्ट कर सकता है, और सरल उपाय जीवन में बदलाव ला सकते हैं।



















