Monsoon Farming Tips: बारिश के बाद खेत में सबसे पहले क्या करें? एक्सपर्ट से जानिए सफल किसानी का तरीका
Monsoon Farming Tips: बारिश के बाद खेत में पानी जमा हो जाए तो सबसे पहले पहला कदम उसकी निकासी करना होना चाहिए. खेत के किनारों पर छोटी-छोटी नालियां बनाकर एक्स्ट्रा पानी बाहर निकाल दें.

Monsoon Farming Tips: मानसून के दौरान तेज बारिश किसानों के लिए जितनी राहत लेकर आती है, कई बार उतनी ही बड़ी परेशानी भी खड़ी कर देती है. लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से फसलों की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और लंबे समय तक जल भराव रहने पर जड़े सड़ने लगती है. हालांकि कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऐसी स्थिति में घबराने की बजाय सही समय पर सही कदम उठाया जाए तो फसल को बचाया जा सकता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि अगर बारिश के बाद आपके खेत में भी पानी भर गया तो आप सबसे पहले क्या करें.
सबसे पहले खेत से पानी निकालें
बारिश के बाद खेत में पानी जमा हो जाए, तो सबसे पहले पहला कदम उसकी निकासी करना होना चाहिए. खेत के किनारों पर छोटी-छोटी नालियां बनाकर एक्स्ट्रा पानी बाहर निकाल दें. अगर खेत ढलान पर है, तो पानी को उसी दिशा में मोड़ दें. जहां से वह आसानी से बाहर निकल सके. जहां पानी जमा हो, वहां निकासी का रास्ता बनाना जरूरी है.
जड़ों को ऑक्सीजन मिलना जरूरी
खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहने से मिट्टी के अंदर मौजूद हवा लगभग खत्म हो जाती है. ऐसे में पौधों की जड़ों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है, जिससे वह ठीक से काम नहीं कर पाती. इसका असर कुछ ही दिनों में दिखाई देने लगता है. पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगती है, इसलिए जल निकासी में देरी ने करें.
नालियों की भी करें सफाई
अगर खेत में अलग-अलग जगह पानी जमा है, तो मेड के सुरक्षित हिस्से से पानी निकालने का रास्ता बनाया जा सकता है. लाइन में बोई गई फसलों में कतारों के बीच बनी नालियों को साफ रखें, ताकि पानी आसानी से बाहर निकल सके. जहां मिट्टी या खरपतवार पानी के भराव में रुकावट पैदा कर रहे हो, उन्हें हटा दें.
पानी उतरते ही जल्दबाजी न करें
एक्सपर्ट्स के अनुसार पानी निकालने के तुरंत बाद खेत में ट्रैक्टर चलाना या गहरी जुताई करना सही नहीं होता है. बहुत ज्यादा गीली मिट्टी पर काम करने से मिट्टी दब जाती है और जड़ों को एक्स्ट्रा नुकसान पहुंचा सकता है. ऐसे में पहले खेत को इतना सूखने दें कि मिट्टी काम करने योग्य हो जाए. इस तरह पानी उतरते ही ज्यादा मात्रा में यूरिया या दूसरे उर्वरकों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए. पहले फसल की स्थिति का आकलन करना जरूरी है.
फसल की स्थिति का करें निरीक्षण
जब खेत से पानी पूरी तरह निकल जाए और मिट्टी सामान्य हो जाए तो पौधों का निरीक्षण करें. अगर नई पत्तियां निकल रही है और पौधों में बढ़वार दिखाई दे रही है, तो फसल के संभलने की संभावना रहती है. कई कृषि विशेषज्ञ ऐसे समय में पौधों को जल भराव के तनाव से बाहर निकालने के लिए बायो स्टिम्युलेट के उपयोग की सलाह देते. हालांकि किसी भी दवा या उसकी मात्रा का प्रयोग स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए.
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